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असम में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में रिकॉर्ड उछाल, सीएम की पत्नी पर भी लग चुका है आरोप

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक पिछले दो सालों के मुकाबले साल 2022 में असम में भ्रष्टाचार के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं

असम के सीएम हेमंता बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लग चुका है
अपडेटेड 7 दिसंबर , 2023

भारत के पूर्वोत्तर के हिस्से में आने वाले सबसे बड़े राज्य असम में भ्रष्टाचार के मामलों में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की तरफ से सोमवार यानी 4 दिसंबर को एक आंकड़ा जारी किया गया. इन्हीं आंकड़ों से पता चला है कि पिछले दो सालों के मुकाबले साल 2022 में असम के अंदर भ्रष्टाचार के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं.

असम में इस दौरान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) की अलग-अलग धाराओं के तहत कुल 57 मामले दर्ज किए गए. वहीं साल 2020 और साल 2021 के दौरान यह आंकड़ा महज 16 पर था. हालांकि इन आंकड़ों में एक तथ्य यह भी है कि इन 57 मामलों में से लगभग 95 प्रतिशत मामले अदालतों में लंबित रहे. 

हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से 50 ऐसे मामले थे जहां पर सरकारी अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था. इसके अलावा आय से अधिक संपत्ति के चार मामले और क्रिमिनल मिसकंडक्ट यानी आपराधिक कदाचार के भी तीन मामले सामने आए थे.

असम में पिछले साल भ्रष्टाचार के इन मामलों में कुल 58 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और 45 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था. NCRB के आंकड़े बताते हैं कि इन मामलों में दो लोगों को दोषी भी ठहराया गया, लेकिन किसी भी अपराधी को बरी नहीं किया गया. हालांकि इस दौरान किसी भी आरोपी को बर्खास्त नहीं किया गया. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत भ्रष्टाचार निरोधक, सतर्कता और लोकायुक्त द्वारा मामलों के पुलिस निपटान के संबंध में, आंकड़ों से पता चला कि पिछले साल से 109 मामलों की जांच लंबित थी. 

इस दौरान 13 मामलों में पुलिस की तरफ से अंतिम रिपोर्ट फाइल की गई और 37 मामलों में आरोप पत्र दायर किए गए. NCRB की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 के आखिर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत जांच के लिए लंबित मामलों की गिनती 116 थी. साल 2022 में अदालतों के सामने कानून के इन प्रावधानों के तहत विचाराधीन मामलों की कुल संख्या 78 थी, जिनमें से 41 पिछले साल से ही लंबित थे. वहीं इस दौरान 37 नई मामले सुनवाई के लिए भेजे गए.

जबकि साल 2022 में एक मामले का निपटारा बिना सुनवाई के ही कर दिया गया था. साल 2022 के आखिर में असम के अंदर भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों में लंबित मामलों की दर 94.9 प्रतिशत थी. अदालतों ने पिछले साल ऐसे तीन मामलों में सुनवाई पूरी की, जिससे दो में दोषसिद्धि हुई और एक में बरी कर दिया गया. भ्रष्टाचार के मामलों में सजा की दर 66.7 प्रतिशत रही. एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल के अंत में कुल 74 मामलों की सुनवाई लंबित थी, जिसमें अदालत ने पिछले साल के दौरान चार मामलों का निपटारा किया था. 

असम के सीएम और उनकी पत्नी पर भी लग चुका है भ्रष्टाचार का इल्जाम

असम के सीएम हेमंता बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लग चुका है. सरमा का नाम साल 2014 में शारदा चिट फंड घोटाले में सामने आ चुका है. इस दौरान सीबीआई ने उनके घर पर रेड भी मारी थी. यहां तक कि सीबीआई की एक टीम ने उस वक्त गुवाहाटी के एक मीडिया हाउस के दफ्तर का दौरा भी किया था. इस मीडिया हाउस की प्रमुख हेमंता की पत्नी रिनिकी भूयान सरमा हैं.

साल 2014 में ही हेमंता से कोलकाता में कई घंटों की पूछताछ भी की गई थी. उन पर शारदा कंपनी के मालिक और मुख्य आरोपी सुदीप्त सेन से रिश्वत लेने का आरोप भी है. वहीं कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने रिनिकी भुइयां सरमा पर असम में भूमि घोटाले का आरोप लगाया था. गोगोई ने अपने एक एक्स पोस्ट में लिखा था कि पीएम मोदी ने किसानों के लिए किसान संपदा स्कीम को दोगुना किया था, पर असम में सीएम ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपनी पत्नी की फर्म को क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी के हिस्से के रूप में 10 करोड़ रुपये दिलाने में मदद की. 

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