NEET प्रश्नपत्र विवाद और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर हुए Gen Z के विरोध प्रदर्शन तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंध्र प्रदेश में विपक्षी युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने राज्य के शिक्षा मंत्री नारा लोकेश से इस्तीफे की मांग शुरू कर दी है.
YSRCP प्रमुख वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी की पार्टी पूरे राज्य में इस अभियान को आगे बढ़ा रही है. पार्टी आंध्र प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती के लिए हुई DSC-2025 प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का मुद्दा उठा रही है.
DSC (डिस्ट्रिक्ट सिलेक्शन कमेटी) आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सरकारी स्कूलों के लिए शिक्षकों की भर्ती के लिए आयोजित होने वाली राज्य स्तरीय और बेहद प्रतिस्पर्धी परीक्षा प्रक्रिया है.
YSRCP नेताओं ने नारा लोकेश के तत्काल इस्तीफे और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) सरकार के दौरान अपनाई गई DSC भर्ती प्रक्रिया की CBI से व्यापक जांच कराने की मांग की है. पार्टी के छात्र और युवा संगठनों ने 28 जुलाई को राज्यभर के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए.
जगन मोहन रेड्डी ने इन प्रदर्शनों को 'न्याय की बढ़ती जन मांग' और Gen Z व बेरोजगार युवाओं की निराशा का प्रतीक बताया. YSRCP पिछले कुछ समय से DSC भर्ती का मुद्दा उठा रही है. जून में रेड्डी ने उन अभ्यर्थियों से भी मुलाकात की थी, जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप लगाया था.
रेड्डी ने आरोप लगाया कि प्रश्नपत्र लीक से लेकर खेल कोटा के तहत कथित पक्षपातपूर्ण नियुक्तियों तक, चंद्रबाबू नायडू सरकार की विफलताओं ने प्रतिभाशाली और मेहनती युवाओं को, जिन्हें अपनी योग्यता के आधार पर करियर बनाना चाहिए था, विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया.
रेड्डी ने कहा, “हजारों बेरोजगार युवाओं ने शिक्षक की नौकरी पाने के लिए वर्षों तक दिन-रात मेहनत की. लेकिन पेपर लीक और कथित अनियमित नियुक्तियों के कारण सरकार की मेगा DSC भर्ती प्रक्रिया ने उनकी उम्मीदें तोड़ दीं. सबूत और दस्तावेज सार्वजनिक होने के बावजूद न तो मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और न ही शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने कोई जवाब दिया. उन्होंने वैध सवालों का जवाब देने के बजाय लोगों का ध्यान भटकाने का रास्ता चुना.”
यह मुद्दा दिल्ली तक भी पहुंचा. YSRCP सांसद मड्डिला गुरुमूर्ति ने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान आंध्र प्रदेश की मेगा DSC भर्ती का मामला उठाया. यह भर्ती 16,347 शिक्षक पदों के लिए थी, जिसमें 3.52 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था.
गुरुमूर्ति ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि खेल कोटा के उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य अर्हता परीक्षा की शर्त को पहले हटाया गया और फिर बहाल किया गया. उनके मुताबिक, इसी प्रक्रिया के तहत “384 नियुक्तियां बिना निर्धारित परीक्षा या इंटरव्यू के कर दी गईं.”
उन्होंने मांग की कि राज्य स्तरीय भर्ती बोर्डों को भी लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक के दायरे में लाया जाए. साथ ही CBI से आंध्र प्रदेश मेगा DSC भर्ती की जांच कराई जाए और नारा लोकेश नैतिक आधार पर इस्तीफा दें.
29 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में YSRCP के राज्यसभा सांसद गोल्ला बाबू राव, गुरुमूर्ति और लोकसभा सांसद डॉ. जी. थानुजा रानी ने TDP और नारा लोकेश पर हमले और तेज कर दिए. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने नियमों का उल्लंघन करते हुए DSC संयोजक को दरकिनार कर परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के निदेशक को सौंप दी.
सांसदों ने दावा किया कि प्रश्नपत्र तैयार करने और उसे अपलोड करने जैसे गोपनीय कार्य आउटसोर्स कर्मचारियों को सौंप दिए गए, जिससे पेपर लीक की आशंका पैदा हुई. उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि SCERT का एक आउटसोर्स कर्मचारी कथित तौर पर DSC परीक्षा में शीर्ष रैंक कैसे हासिल कर गया.
सांसदों ने आरोप लगाया कि नायडू सरकार ने खेल कोटा के नियमों में हेरफेर कर अनियमित नियुक्तियों का रास्ता बनाया. राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेताओं की अनदेखी की गई, जबकि सिर्फ प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले उम्मीदवारों को नौकरी दे दी गई. उनका दावा था कि ऑडियो और वीडियो सबूतों में खेल कोटा के तहत नौकरी दिलाने के लिए 15 लाख से 20 लाख रुपए तक की मांग किए जाने की बात सामने आई है.
पूर्व शिक्षा मंत्री और YSRCP नेता आदिमुलापु सुरेश ने नारा लोकेश को खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा कि नायडू सरकार ने सत्तारूढ़ दल के समर्थकों को फायदा पहुंचाने के लिए नियम बदले, मेरिट और रोस्टर सूची सार्वजनिक नहीं की तथा जनता के सामने रखे गए दस्तावेजी सबूतों का कोई जवाब नहीं दिया.
इसके जवाब में नारा लोकेश ने कहा कि वे DSC भर्ती पर YSRCP नेताओं के साथ किसी भी बहस के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, “लेकिन क्या वे अपने शासनकाल के शराब घोटाले और भूमि माफिया के मामलों पर चर्चा के लिए तैयार हैं? TDP का इतिहास दो लाख शिक्षकों की भर्ती का रहा है, जबकि YSRCP ने अपने कार्यकाल में एक भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की.”
विजयवाड़ा के पास हाल में आयोजित एक बैठक में लोकेश ने दावा किया कि उनकी सरकार ने DSC भर्ती पूरी पारदर्शिता के साथ सफलतापूर्वक कराई है. उन्होंने कहा कि भर्ती को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं को अदालतों द्वारा खारिज किया जाना सरकार की ईमानदार मंशा का प्रमाण है.
हालांकि जगन मोहन रेड्डी ने दोहराया कि YSRCP छात्रों और बेरोजगार युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और जब तक उसकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

