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अब AMUL बनेगा बंगाल के औद्योगिक विकास का इंजन?

हावड़ा में 700 करोड़ रुपए के AMUL प्लांट से लेकर ‘भारत टैक्सी’ तक, BJP सरकार सहकारिता के जरिए बंगाल में इंडस्ट्री और रोजगार को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु सरकार
अपडेटेड 22 जुलाई , 2026

पश्चिम बंगाल की BJP सरकार ने 19 जुलाई को सहकारिता संस्थाओं को केंद्र में रखते हुए औद्योगीकरण, ग्रामीण समृद्धि और रोजगार का एक ‘ब्लूप्रिंट’ पेश किया. केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हावड़ा के सांकराइल में 700 करोड़ रुपए की AMUL की इंटीग्रेटेड डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट की आधारशिला रखी.

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अधिकारी और BJP के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य की मौजूदगी में हुए इस समारोह में डेयरी कोऑपरेटिव नेटवर्क के विस्तार से लेकर प्राइवेट राइड-हेलिंग कंपनियों को टक्कर देने वाले नए कोऑपरेटिव आधारित टैक्सी प्लेटफॉर्म तक कई पहलों की शुरुआत की गई.

AMUL की यह सुविधा दही और फर्मेंटेड डेयरी प्रोडक्ट्स का दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बनने की उम्मीद है. यहां हर दिन 30 लाख लीटर दूध प्रोसेस किया जाएगा. रोजाना 10 लाख लीटर पैकेज्ड मिल्क का उत्पादन होगा और 1,000 मीट्रिक टन दही बनाया जाएगा. इसके अलावा लॉन्ग-लाइफ मिल्क, आइसक्रीम, छेना, घी और मिठाइयां भी बनाई जाएंगी.

AMUL ने 2004 में पश्चिम बंगाल में दूध खरीदना शुरू किया था. फिलहाल यह 880 गांवों की डेयरी कोऑपरेटिव सोसाइटीज और जिलों में फैले 107 बल्क मिल्क चिलिंग सेंटर के जरिए 1.25 लाख से ज्यादा किसानों के साथ काम करता है. कोऑपरेटिव हर दिन करीब 9 लाख लीटर दूध खरीदता है और अगले कुछ वर्षों में इसे बढ़ाकर 20 लाख लीटर करने की योजना है.

सभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि यह प्रोजेक्ट BJP सरकार के तहत राज्य के आर्थिक विकास के एक नए दौर की शुरुआत है. शाह ने कहा, “जिस बंगाल ने कभी विज्ञान, शिक्षा, संस्कृति और देशभक्ति में देश को रास्ता दिखाया था, उसे कम्युनिस्ट और तृणमूल कांग्रेस के शासन के वर्षों के दौरान व्यवस्थित तरीके से बर्बाद किया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJP बंगाल को उसका पुराना गौरव लौटाने के लिए प्रतिबद्ध है.”

हर चुनावी वादे को पूरा करने का भरोसा देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार “एक शिक्षित, सुरक्षित और समृद्ध सोनार बांग्ला” बनाएगी. सहकारिता मॉडल पर जोर देते हुए शाह ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से करीब 1.20 लाख डेयरी किसानों को सीधे फायदा होगा. उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन को उत्तर और दक्षिण बंगाल में दो और डेयरी प्रोजेक्ट्स के लिए 30 एकड़ जमीन देगी. उनके मुताबिक, इससे 2.5 लाख और पशुपालकों को फायदा होगा.

उन्होंने कहा, “AMUL आज दुनिया की नंबर वन कोऑपरेटिव सोसाइटी है. इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत यह है कि 87 फीसदी मुनाफा सीधे किसानों के बैंक खातों में जाता है, पूंजीपतियों की जेब में नहीं.” उन्होंने राज्य में पशुओं की ब्रीडिंग सुधारने और दूध की उत्पादकता 25 फीसदी बढ़ाने के लिए एक नए प्रोग्राम की भी घोषणा की.

शाह ने यह भी कहा कि केंद्र ने पश्चिम बंगाल के लिए कोऑपरेटिव सेक्टर के 70 से ज्यादा इनीशिएटिव शुरू किए हैं. ये छह महीने के भीतर किसानों तक पहुंचनी शुरू हो जाएंगे. उन्होंने रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज के कंप्यूटरीकरण की घोषणा की और कृषि भंडारण के लिए 1,400 मीट्रिक टन क्षमता वाले कोऑपरेटिव वेयरहाउस का उद्घाटन किया.

अधिकारी ने इस प्रोजेक्ट को बंगाल में ‘श्वेत क्रांति’ की शुरुआत बताया. उन्होंने कहा कि इससे राज्य के मशहूर स्वीट योगर्ट इंडस्ट्री का कमर्शियल विस्तार होगा और ‘मीठी क्रांति’ भी आएगी. उन्होंने कहा, “कोऑपरेटिव आंदोलन ने दिखाया है कि यह एक वैकल्पिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकता है.” उन्होंने सहकारिता और मत्स्य पालन के लिए अलग-अलग मंत्रालय बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के फैसले को इसका श्रेय दिया.

अधिकारी ने बंगाल में AMUL के विकास का जिक्र करते हुए कहा कि 11 प्राइमरी सोसाइटीज से शुरू हुआ यह संगठन अब 880 कोऑपरेटिव्स के नेटवर्क तक पहुंच गया है. ये कोऑपरेटिव्स रोजाना करीब 9.5 लाख किलोग्राम दूध इकट्ठा करते हैं. उन्होंने कहा कि संगठन अब करीब 1.25 लाख किसानों को सपोर्ट करता है, जिनमें 30,000 महिलाएं शामिल हैं.

आगे निवेश की मांग करते हुए मुख्यमंत्री ने AMUL से उत्तर और दक्षिण बंगाल में दो बड़े आइसक्रीम प्लांट लगाने का आग्रह किया. उन्होंने कंपनी को भरोसा दिया कि राज्य हर प्रोजेक्ट के लिए 15 एकड़ जमीन उपलब्ध कराएगा. उन्होंने कहा, “इन प्लांट्स से दूध उत्पादकों को फायदा होगा. साथ ही स्किल्ड, सेमी-स्किल्ड और अनस्किल्ड वर्कर्स के लिए रोजगार पैदा होगा. इसके अलावा 10,000 से 15,000 हॉकरों और रिटेलर्स के लिए आजीविका के अवसर भी पैदा होंगे.”

भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल एक बार फिर इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के तौर पर उभर रहा है. BJP के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “‘बंगाल मीन्स बिजनेस’ और ‘डेस्टिनेशन बंगाल’ अब सिर्फ नारे नहीं रहेंगे. पूंजी का पलायन रुक गया है. अपने कुशल कर्मचारियों, उपजाऊ जमीन और रणनीतिक स्थिति के साथ पश्चिम बंगाल एक साल के भीतर भारत के प्रमुख इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशंस में शामिल हो जाएगा.”

इस कार्यक्रम में ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी घोषणा भी की गई. शाह ने सहकार टैक्सी पहल के तहत कोऑपरेटिव राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म ‘भारत टैक्सी’ की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि इससे ड्राइवर प्राइवेट ऐप-बेस्ड एग्रीगेटर्स पर निर्भरता से मुक्त होंगे. उन्होंने कहा, “ड्राइवर अब सिर्फ ड्राइवर नहीं रहेंगे. वे खुद कंपनी के मालिक और स्टेकहोल्डर बनेंगे और मुनाफा सीधे उन तक पहुंचेगा.”

बंगाल सरकार ने इसी दौरान घोषणा की कि उसका यात्री साथी ऐप भारत टैक्सी के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा. नया प्लेटफॉर्म दोनों सर्विसेज के टेक्नोलॉजिकल फीचर्स को मिलाएगा. इसके अलावा पूरे राज्य में बाइक टैक्सी और ऑटो-रिक्शा को भी इसमें शामिल किया जाएगा. पार्टनर ड्राइवरों को कोऑपरेटिव मेंबर बनाया जाएगा और वे सरकारी वेलफेयर स्कीम्स के लिए पात्र होंगे.

अधिकारी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “हम पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए एक अधिक प्रभावी, भरोसेमंद और तेज ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए टेक्नोलॉजी का सबसे बेहतर इस्तेमाल करते रहेंगे.”

जहां BJP सरकार ने इस प्रोजेक्ट को कोऑपरेटिव के नेतृत्व में औद्योगीकरण के नए दौर के प्रतीक के तौर पर पेश किया, वहीं विपक्ष ने इस कहानी को चुनौती देने की कोशिश की. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के एक धड़े के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि इस निवेश की नींव उनकी सरकार के दौरान रखी गई थी. घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा, “फैसले, प्लानिंग और घोषणाएं तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में शुरू हुई थीं. प्रोजेक्ट का स्वागत है. स्वाभाविक रूप से, मौजूदा सरकार इस कार्यक्रम का प्रचार कर रही है- सरकारें यही करती हैं. लेकिन सारी पब्लिसिटी के बीच कृपया यह न भूलें कि बंगाल में AMUL को तृणमूल सरकार लेकर आई थी.”

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