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अंबानी-अदाणी के लिए 2027 का यूपी चुनाव कितना अहम?

धनराज नाथवानी की सपा से राज्यसभा में एंट्री और यूपी में रिलायंस-अदाणी समूह के बड़े निवेशों के बीच 2027 के चुनाव के बाद की औद्योगिक नीति पर सबकी नजर है

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अखिलेश यादव, धनराज नाथवानी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
अपडेटेड 30 सितंबर , 2026

30 सितंबर की सुबह लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्यसभा उम्मीदवार धनराज परिमल नाथवानी का नामांकन सियासी हलकों से ज्यादा कॉरपोरेट गलियारों में चर्चा का विषय बना. विधान भवन में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में नाथवानी ने वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव के साथ राज्यसभा चुनाव के लिए पर्चा दाखिल किया. 

एक तरफ लंबे समय से केंद्र में समाजवादी पार्टी की राजनीति का चेहरा रहे राम गोपाल यादव थे, तो दूसरी तरफ गुजरात से आने वाले और रिलायंस इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ अधिकारी धनराज नाथवानी. सपा के इस चयन ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में कॉरपोरेट जगत के रिश्तों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी. संभवत: राज्य सभा उम्मीदवार का यही सरप्राइज फैक्टर था जिसकी चर्चा अख‍िलेश यादव ने 28 सितंबर को मीडिया कर्मियों के सामने की थी. 

नाथवानी की उम्मीदवारी को रिलायंस समूह की कोई घोषित राजनीतिक रणनीति मानने का सार्वजनिक आधार नहीं है. लेकिन उनकी पेशेवर पृष्ठभूमि और उत्तर प्रदेश में बड़े कॉरपोरेट समूहों की बढ़ती मौजूदगी ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा किया है. क्या 2027 का विधानसभा चुनाव सिर्फ राजनीतिक सत्ता के लिए महत्वपूर्ण है या यह उन बड़े उद्योग समूहों के लिए भी अहम है, जिनकी अरबों रुपये की परियोजनाएं राज्य में चल रही हैं या प्रस्तावित हैं.

कॉरपोरेट-राजनीति का गठजोड़

धनराज परिमल नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और समूह की कॉरपोरेट गतिविधियों से जुड़े रहे हैं. रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड समेत समूह की विभिन्न कंपनियों में उनकी निदेशक स्तर की जिम्मेदारियां भी रही हैं. खेल प्रशासन में उनकी पहचान गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में रही है. 

धनराज नाथवानी रिलायंस समूह में वरिष्ठ अधिकारी हैं (फाइल फोटो)
धनराज नाथवानी रिलायंस समूह में वरिष्ठ अधिकारी हैं (फाइल फोटो)

उनके पिता परिमल नाथवानी भी रिलायंस समूह के लंबे समय से वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं और राज्यसभा सदस्य हैं. परिमल नाथवानी की आधिकारिक प्रोफाइल में रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट और कॉरपोरेट अफेयर्स से जुड़ी जिम्मेदारी तथा 2008 से राज्यसभा सदस्य रहने का उल्लेख है. 2026 में वे झारखंड से भी राज्यसभा पहुंचे हैं. यही वजह है कि धनराज नाथवानी की सपा उम्मीदवार के रूप में एंट्री को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई है. 
मेरठ के एक निजी कालेज में डायरेक्टर इनोवेशन संदीप कुमार वर्मा कहते हैं, “यहां एक फर्क समझना जरूरी है. नाथवानी का सपा उम्मीदवार बनना एक राजनीतिक घटनाक्रम है जबकि रिलायंस समूह का उत्तर प्रदेश में कारोबारी विस्तार एक आर्थिक प्रक्रिया. दोनों को सीधे एक ही रणनीति मानना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा.” 

लेकिन यह संयोग जरूर महत्वपूर्ण है कि जिस समय 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं, उसी समय रिलायंस से जुड़े एक वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारी की उत्तर प्रदेश की राजनीति में संसदीय भूमिका बनने जा रही है. 

आर्थ‍िक मामलों के जानकार संदीप कुमार वर्मा बताते हैं कि उत्तर प्रदेश का बाजार देश में सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है. यही वजह है कि बड़े कारोबारी समूहों के लिए राज्य का महत्व केवल सरकार की औद्योगिक नीति तक सीमित नहीं है. आबादी, बाजार, डिजिटल सेवाओं की मांग, रिटेल, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे का विस्तार इसे लंबे समय के कारोबार के लिए महत्वपूर्ण बनाता है.

अदाणी समूह के प्रोजेक्ट

अगर रिलायंस की मौजूदगी को बड़े उपभोक्ता और डिजिटल बाजार के संदर्भ में देखा जाए तो अदाणी समूह का यूपी मॉडल अपेक्षाकृत अधिक पूंजी-प्रधान और बुनियादी ढांचा केंद्रित दिखाई देता है. उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर इसका बड़ा उदाहरण है. राज्य सरकार के निवेश दस्तावेजों के अनुसार कानपुर नोड में अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस का एम्युनिशन और मिसाइल-कंपोनेंट से जुड़ा निवेश कॉरिडोर के सबसे बड़े प्रतिबद्ध निवेशों में शामिल है. 

उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में अदाणी समूह ने बड़ा निवेश किया है (सांकेतिक तस्वीर)
उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में अदाणी समूह ने बड़ा निवेश किया है (सांकेतिक तस्वीर)

राज्य सरकार के अनुसार छह नोड वाले डिफेंस कॉरिडोर में कानपुर सबसे बड़े निवेश वाले केंद्र के रूप में उभरा है. डेटा सेंटर क्षेत्र में भी अदाणी समूह की मौजूदगी दर्ज है. उत्तर प्रदेश की आधिकारिक डेटा सेंटर नीति के आंकड़ों में अदाणी की दो परियोजनाओं के लिए करीब 2,713 करोड़ और 2,416 करोड़ रुपए के प्रस्तावित निवेश का उल्लेख है. दोनों की प्रस्तावित क्षमता 50-50 मेगावाट बताई गई है. 

ऊर्जा क्षेत्र में सोनभद्र के पनौरा की पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज परियोजना भी महत्वपूर्ण है. अदाणी ग्रीन एनर्जी को फरवरी 2025 में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन से 1,250 मेगावाट पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज क्षमता के लिए लेटर ऑफ अवॉर्ड मिला था. 

कंपनी के मुताबिक परियोजना की न्यूनतम अवधि 40 वर्ष है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति के लिए अदाणी पावर की प्रस्तावित 1,500 मेगावाट क्षमता की परियोजना और ट्रांसमिशन से जुड़े निवेश भी राज्य में समूह की ऊर्जा क्षेत्र में मौजूदगी को बढ़ाते हैं.

इन परियोजनाओं को एक साथ देखने पर तस्वीर साफ होती है. अदाणी समूह का यूपी में कारोबार केवल एक फैक्ट्री या एक सेक्टर तक सीमित नहीं है. रक्षा उत्पादन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा भंडारण और बिजली जैसे क्षेत्रों में उसकी हिस्सेदारी बढ़ रही है. इनमें से कई परियोजनाएं लंबी अवधि की हैं. इसलिए इनके लिए सरकार की नीतिगत निरंतरता, भूमि, बिजली, पर्यावरणीय मंजूरियां, कनेक्टिविटी और स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी.

चुनाव के बाद बड़े निवेशों का भविष्य

संदीप कुमार वर्मा कहते हैं, “उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा विधानसभा वाला राज्य है और 2027 का चुनाव नई सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं को तय करेगा. पिछले वर्षों में राज्य सरकार ने बड़े निवेश सम्मेलनों और औद्योगिक नीतियों के जरिए उत्तर प्रदेश को निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है. रिलायंस और अदाणी समूह की गतिविधियां इसी व्यापक औद्योगिक विस्तार का हिस्सा हैं.” 

रिलायंस की तरफ देखें तो उत्तर प्रदेश में कंपनी की डिजिटल और खुदरा उपस्थिति पहले से व्यापक है. जियो का दूरसंचार और डिजिटल नेटवर्क तथा रिलायंस रिटेल का विस्तार राज्य के बड़े उपभोक्ता बाजार से सीधे जुड़ा है. दूसरी तरफ अदाणी समूह की नई परियोजनाएं अधिकतर बड़े औद्योगिक और बुनियादी ढांचे वाले निवेशों से जुड़ी हैं. इसलिए 2027 का चुनाव दोनों समूहों के लिए एक समान अर्थ में महत्वपूर्ण है, ऐसा कहना भी सही नहीं होगा. 

दोनों समूहों के कारोबार की प्रकृति अलग है और राज्य में उनकी परियोजनाओं का स्वरूप भी अलग है. लेकिन राज्य में बनने वाली अगली सरकार की औद्योगिक नीति, बिजली की मांग, डेटा सेंटर नीति, रक्षा उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, भूमि और बुनियादी ढांचे से जुड़े फैसले दोनों समूहों के भविष्य के निवेश माहौल को प्रभावित कर सकते हैं.

यहीं समाजवादी पार्टी की ओर से धनराज नाथवानी की उम्मीदवारी इस कहानी में एक अतिरिक्त परत जोड़ती है. नाथवानी का राज्यसभा जाना उनके व्यक्तिगत राजनीतिक करियर का घटनाक्रम है. इसे सीधे रिलायंस समूह की राजनीतिक रणनीति मानना उपलब्ध तथ्यों से आगे जाना होगा. 

उसी तरह उत्तर प्रदेश में अदाणी समूह की परियोजनाओं को केवल BJP सरकार से जोड़कर देखना भी पर्याप्त नहीं होगा क्योंकि बड़े औद्योगिक निवेश अक्सर सरकार बदलने के बाद भी जारी रहते हैं और उनका भविष्य नीतिगत निरंतरता पर निर्भर करता है. 

2027 के चुनाव में इसलिए असली सवाल यह नहीं होगा कि अंबानी या अदाणी किस राजनीतिक दल के साथ हैं. अधिक तथ्यात्मक सवाल यह होगा कि चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश की सरकार बड़े निवेशों के लिए किस तरह की नीति अपनाती है और पहले से घोषित परियोजनाओं को जमीन पर उतारने की गति क्या रहती है.

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