
बिहार में 13-14 दिसंबर को ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट का आयोजन है. दिलचस्प है कि इस समिट में सबसे अधिक चर्चा अदाणी समूह की हो रही है. ऐसा माना जा रहा है कि 'बिहार बिजनेस कनेक्ट-2023' नाम से हो रही इस समिट में अदाणी परिवार से कोई न कोई व्यक्ति जरूर उपस्थित होगा.
खबरें ऐसी भी हैं कि अदाणी समूह इस समिट में बिहार सरकार के उद्योग विभाग के साथ 5000 करोड़ रुपए के आसपास का एमओयू साइन कर सकता है. अदाणी समूह की बिहार में साइलो हाउस और सीमेंट फैक्ट्री लगाने में दिलचस्पी है. पहले से ही बिहार के कटिहार में समूह का एक साइलो हाउस है. वह समस्तीपुर में एक और साइलो हाउस खोलने पर विचार कर रहा है. इसके अलावा समूह बिहार के नवादा और मुजफ्फरपुर में सीमेंट फैक्ट्री लगाने की तैयारी में भी है.
भले ही विपक्षी दल अदाणी समूह पर राजनीतिक हमले करते रहे हों, मगर बिहार सरकार का उद्योग विभाग इस समूह के आगे पलक पांवड़े बिछाता नजर आ रहा है. बिहार बिजनेस कनेक्ट में आने वाले उद्योग समूह में सबसे बड़ा नाम अदाणी समूह का ही है. समूह की तरफ से इस समारोह में हिस्सा लेने कौन आ रहा है, इस बात की तो अब तक पुष्टि नहीं हुई है. मगर प्रणव अदाणी या राजेश अदाणी के आने की चर्चा है. पिछले दिनों भी अदाणी समूह की तरफ से प्रणव अदाणी बिहार आये थे. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात भी की.
इस साल अगस्त-सितंबर महीने में अदाणी समूह ने नवादा के वारसलीगंज और मुजफ्फरपुर के मोतीपुर में सीमेंट फैक्ट्री खोलने की घोषणा की है. इसके लिए समूह ने दो बंद पड़ी चीनी मिलों की जमीन का अधिग्रहण भी किया है. हालांकि बिहार में समूह की सबसे अधिक दिलचस्पी अनाज भंडारण के उद्योग में है. इसके लिए समूह ने पहले से बिहार के कटिहार में अपना साइलो स्टोरेज स्थापित कर रखा है. अब वह समस्तीपुर में एक साइलो हाउस खोलने की तैयारी में है. खबरें हैं कि बिजनेस समिट में इसको लेकर एमओयू साइन हो सकता है.

उद्योग विभाग से कोई भी अधिकारी अभी इस मामले में खुलकर जानकारी नहीं दे रहा. मगर ऑफ द रिकार्ड बातचीत में अधिकारी कह रहे हैं कि ऐसा समझौता अंतिम चरण में है. समिट के दूसरे दिन 32 हजार करोड़ के एमओयू साइन होने की बात कही जा रही है. इसमें 500-500 करोड़ रुपए से अधिक के 12 एमओयू साइन होने हैं. अधिकारी बताते हैं कि राजनीतिक बातें अलग हैं, मगर आज की तारीख में अदाणी देश के सबसे बड़े उद्यमी हैं, इस लिहाज से हर समिट में उनको लेकर आकर्षण रहता ही है और हर सरकार चाहती है कि उनके यहां अदाणी अपना उद्योग शुरू करें. इसलिए अगर ऐसा होता है तो कोई हैरत की बात नहीं. अदाणी के अलावा इस समिट में छह सौ से अधिक उद्यमी भाग लेंगे. इनमें आइओसीएल, नाहर ग्रप, गोदरेज समूह, माइक्रोमैक्स बायोफ्यूल, टायगर एनालिटिक्स आदि कंपनियों के प्रतिनिधि होंगे.
इस समिट में बिहार का फोकस फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल एंड लेदर और आईटी सेक्टर के उद्योगों को आकर्षित करना है. उद्योग विभाग के अधिकारी यह मानकर चल रहे हैं कि बिहार में बांग्लादेश की तर्ज पर टेक्सटाइल और लेदर इंडस्ट्री के स्थापित होने की उम्मीद है. शुरुआत में विभाग ने अपनी तरफ से मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी स्थापित की है और प्लग एंड प्ले सिस्टम के तहत अपने औद्योगिक परिसरों में ऐसे भवन तैयार किये हैं, जहां उद्यमी पहुंचते ही अपना काम शुरू कर सकता है. उसे भवन, बिजली और दूसरी चीजें तैयार मिलेंगी.
सरकार को मक्का, मखाना, आम और लीची से जुड़े खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के सफल होने की भी उम्मीद है. इस समिट से एक दिन पहले ब्रिटेनिया ने पटना के बिहटा में अपनी दूसरी यूनिट शुरू की है. इससे पहले उसकी एक यूनिट 2011 में हाजीपुर में शुरू की थी. बिहार सरकार राज्य को आईटी हब बनाने की भी तैयारी में है. इस समिट में एक्सेंचर, न्यूटानिक्स, रूब्रीक, सुरेश चिप्स एंड सेमिकंडक्टर, फॉक्सकॉन और टाईगर एनालिटिक्स जैसी कंपनियों के प्रतिनिधि भी आ रहे हैं. इन कंपनियों से राज्य के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव सीधे बात करने वाले हैं. औद्योगिक रूप से पिछड़े राज्य बिहार को इस समिट से बड़ी उम्मीदें हैं.

