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सरकार बदलने के साथ ही बिहार में अदाणी समूह की बढ़ी दिलचस्पी!

गौतम अदाणी ने 17 मई को अपनी बिहार यात्रा के दौरान घोषणा की है कि उनका समूह राज्य में 50-60 हजार करोड़ रुपए का निवेश करने जा रहा है

Gautam Adani with Samrat Chaudhary
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ गौतम अदाणी
अपडेटेड 18 मई , 2026

अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी 17 मई को बिहार के सारण जिले में थे. हालांकि उनकी यह बिहार यात्रा पूरी तरह से गैर-व्यावसायिक थी. उनका मकसद सारण के मस्तीचक गांव में पिछले बीस साल से अत्याधुनिक नेत्र चिकित्सालय चला रहे गायत्री परिवार के अस्पताल 'अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल' के साथ मिलकर इस इलाके में आंख के इलाज को बढ़ावा देना था.

यह अदाणी समूह की सामाजिक कार्यों से जुड़ी संस्था अदाणी फाउंडेशन का काम था. इसलिए उनके साथ इस यात्रा में इस फाउंडेशन की चेयरपर्सन और गौतम अदाणी की पत्नी प्रीति भी थीं. हालांकि इस मौके पर समूह के मुखिया ने बिहार में अगले तीन-चार साल के दौरान 50 से 60 हजार करोड़ रुपए के इन्वेस्टमेंट की घोषणा करके इसे कारोबारी यात्रा में बदल दिया.

इतना ही नहीं, इस कार्यक्रम के बाद वे पटना जाकर बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी मिले और उनसे इस विषय में बातचीत की. भारत के सबसे अमीर कारोबारी एक गौतम अदाणी इस साल दूसरी दफा बिहार आए हैं. इससे पहले वे 22 फरवरी को भागलपुर के पीरपैंती गए थे, जहां अदाणी समूह 2400 मेगावाट क्षमता वाले पावर प्लांट का निर्माण कर रहा है.

हालांकि तब उन्होंने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात नहीं की थी, न ही बिहार के बारे में निवेश की अपनी योजनाओं का खुलासा किया. ऐसे में बिहार के बदले राजनीतिक माहौल में उनकी यात्रा के कई मायने देखे जा रहे हैं.

गौतम अदाणी अपनी पत्नी प्रीति के साथ अखंड ज्योति संस्थान के कार्यक्रम में
गौतम अदाणी अपनी पत्नी प्रीति के साथ अखंड ज्योति संस्थान के कार्यक्रम में

17 मई की यात्रा के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए गौतम अदाणी ने कहा, “बिहार में अब इनवेस्टमेंट का समय आ गया है, इसका स्वागत करना चाहिए. मेरा मानना है कि हर बिहारी को बिहार के अंदर ही जॉब मिले. हमलोग यहां पावर प्रोजेक्ट, रोड प्रोजेक्ट, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक जैसी परियोजनाओं के लिए प्रयास कर रहे हैं. सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भी हम काम करना चाहेंगे. मेरी इच्छा है कि पटना में स्कूल, अस्पताल या यूनिवर्सिटी खोलने जैसा कोई काम हमलोग कर सकें.”

नए सीएम सम्राट चौधरी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “नया जोश है. मुझे पूरा विश्वास है कि नए मुख्यमंत्री बिहार की प्रगति के लिए हर तरह का काम करेंगे. अदाणी ग्रुप का भी प्रयास रहेगा कि उन्हें पूरा सहयोग करें.” पटना में अदाणी से मुलाकात के बाद सीएम सम्राट चौधरी की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि मुलाकात के दौरान बिहार में निवेश और बड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर विस्तृत चर्चा हुई. गौतम अदाणी ने बिहार के विकास में हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है.

जाहिर है, यह बिहार को लेकर गौतम अदाणी की अप्रोच में आया बड़ा बदलाव है, जो नई सरकार के साथ उनकी सहजता को भी दिखाता है. हालांकि अदाणी समूह काफी पहले से बिहार में सक्रिय है. समूह ने 2016 में ही कटिहार में अपना साइलो बनाने की तैयारी कर ली थी जो 2022 में बनकर पूरा हो गया. 2024 में बिहार बिजनेस कनेक्ट में भाग लेने आए अदाणी समूह के प्रणव अदाणी ने पीरपैंती के पावर प्लांट समेत राज्य में लगभग 50 हजार करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा की थी. एक तरह से गौतम अदाणी ने लगभग उन्हीं बातों को दोहराया है.

इस वक्त बिहार में अदाणी समूह की कई परियोजनाएं चल रही हैं. इनमें सबसे बड़ा काम पीरपैंती का पावर प्लांट है ही. इसके साथ नवादा और मुजफ्फरपुर में सीमेंट प्लांट का निर्माण चल रहा है. ये दोनों प्लांट हर साल साठ-साठ लाख टन सीमेंट तैयार करेंगे. दोनों की सम्मिलित लागत 3000 करोड़ रुपए बताई गई है.

इन दोनों कारखानों के अलावा अदाणी समूह यहां बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने का काम भी कर रहा है. वह राज्य में अब तक 1.75 करोड़ स्मार्ट मीटर लगा चुका है. अदाणी समूह की दिलचस्पी शहरी गैस वितरण का नेटवर्क तैयार करने में भी है. समूह की वेबसाइट के मुताबिक, गया और नवादा जिले में इसका नेटवर्क खड़ा किया जा रहा है.

इसके अलावा जैसा गौतम अदाणी ने कहा, समूह की रुचि बिहार के मेगा कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में भी है. हाल के वर्षों में बिहार में कंस्ट्रक्शन का काम काफी बढ़ा है. अदाणी समूह इसमें से किस परियोजना में भागीदारी करेगा, इसका खुलासा अभी नहीं किया गया है. मगर माना जा रहा है कि बिहार सरकार के महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड टाउनशिप प्रोजेक्ट में उसकी रुचि हो सकती है. बिहार सरकार ने हाल ही में राज्य में 11 ऐसी टाउनशिप बसाने की योजना का ऐलान किया है. राज्य में बड़ी संख्या में नए एयरपोर्ट खुलने जा रहे हैं और ग्रीनफील्ड हाईवे भी बनने वाले हैं. इन परियोजनाओं में भी अदाणी समूह की दिलचस्पी हो सकती है.

हालांकि इसके साथ अदाणी समूह ने बिहार में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) से जुड़े काम के बारे में भी रुचि जाहिर की है. अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल के साथ साझेदारी में वे काम करने की तैयारी में है. इसके लिए 'अदाणी अखंड ज्योति फाउंडेशन' के नाम से नया ट्रस्ट बना है. फिलहाल समूह 150 करोड़ की राशि से आई सेंटर और ऑप्थेल्मिक ट्रेनिंग का काम करेगा. गौतम अदाणी ने आने वाले दिनों में इस फाउंडेशन में 500 करोड़ की अतिरिक्त राशि देने का भी वादा किया है. इसके अलावा अदाणी समूह पीरपैंती में 200 बेड का एक अस्पताल भी खोलने जा रहा है.

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अदाणी समूह की इस सक्रियता से बिहार को कितना लाभ होगा? इस बारे में टाटा सामाजिक संस्थान के पूर्व प्राध्यापक पुष्पेंद्र कहते हैं, “मैंने पीरपैंती पावर प्लांट और दो सीमेंट प्लांट के बारे में उनके पोर्टल पर जानकारी देखी है. पीरपैंती पावर प्लांट में तीन हजार लोगों को रोजगार दिए जाने की बात कही गई है और नवादा के वारसलीगंज सीमेंट प्लांट में 250 लोगों को फुलटाइम रोजगार मिलने की बात है. अगर मुजफ्फरपुर के सीमेंट प्लांट को भी शामिल कर लें तो अधिकतम साढ़े तीन से चार हजार लोगों को रोजगार मिलेगा. यह कोई बहुत बड़ी संख्या नहीं है. मगर इन तीनों परियोजनाओं से आसपास के पर्यावरण को नुकसान का खतरा हो सकता है. इसकी कीमत अधिक होगी.”

पुष्पेंद्र की बात इसलिए ठीक लगती है, क्योंकि पिछले महीनों में पीरपैंती और वारसलीगंज में इन परियोजनाओं के खिलाफ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है. पीरपैंती में विरोध पेड़ों की कटाई को लेकर था, तो वारसलीगंज के लोगों का कहना था कि सीमेंट कारखाना खुलने से आसपास के इलाके में काफी प्रदूषण होगा. यह बंद पड़ी चीनी मिल का इलाका है, यहां चीनी मिल ही खुलनी चाहिए. इस मसले पर इंडिया टुडे की इस रिपोर्ट (चीनी की मिठास के बदले सीमेंट की धूल) को देखा जा सकता है.

साथ ही पुष्पेंद्र यह भी कहते हैं, “अदाणी समूह की बाकी परियोजनाएं जो बिजली और गैस की आपूर्ति से जुड़ी हैं, उसमें इतने बड़े समूह को शामिल किए जाने की जरूरत नहीं, क्योंकि बिहार की पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ठीक-ठाक काम कर रही है. वैसे भी दूसरे राज्यों के अनुभव बहुत अच्छे नहीं हैं. इसलिए अदाणी समूह भले आंकड़ों के जरिए बिहार में भारी निवेश का दावा कर रहा है, मगर वे बहुत उम्मीद जगाने वाले नहीं लगते.”

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