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दो नदियों के पानी से घिरा खंडवा, 30 से ज्यादा गांव प्‍यासे

खंडवा के हरसूद क्षेत्र में दो नदियां पानी से लबालब भरी हैं, लेकिन इस तहसील के 30 से ज्यादा गांव लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण प्यासे हैं.

अपडेटेड 25 मई , 2013

खंडवा के हरसूद क्षेत्र में दो नदियां पानी से लबालब भरी हैं, लेकिन इस तहसील के 30 से ज्यादा गांव लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण प्यासे हैं.

नदी किनारे बसे लोग प्यासे हों, क्या ऐसा हो सकता है? खंडवा जिले की हरसूद तहसील के 30 गांवों की कुछ ऐसी ही अजीबोगरीब स्थिति है. इन गांवों के नजदीक इंदिरा सागर बांध पर बना 913 वर्ग किमी का जलाशय मौजूद है. जिस वजह से यहां सतही जल भरपूर मात्रा में है. फिर भी भूजल स्तर लगातार गिर रहा है. यहां हर साल औसत से अधिक बरसात भी हो रही है. लेकिन हालात इतने खराब हैं कि लोगों की गाढ़ी कमाई पानी खरीदने में खर्च हो रही है. ऊपर से तर लेकिन अंदर से सूखी यहां की जमीन शोध का विषय बन गई है.

तहसील के गांव कसरावद के 36 वर्षीय राधाकिशन पंवार कहते हैं, ''खेतों के लिए भरपूर पानी है लेकिन पेयजल की दिक्कत है. गांव में 20 नलकूप और छह कुएं हैं लेकिन अब सिर्फ 4 नलकूपों और 2 कुओं में ही पानी बचा है, वह भी थोड़ा. नदियों का पानी पीना तो दूर, नहाने के लायक तक नहीं है. 'और भी खराब स्थिति गांव बरूड़माल की है. गांव के सरपंच 35 वर्षीय आनंद मुकाती कहते हैं, ''हमें पेयजल की व्यवस्था का निजीकरण करना पड़ा. जिन लोगों के निजी नलकूपों में पानी है, वे प्रति कनेक्शन 2 से 3 हजार रु. सालाना अग्रिम पैसा लेकर दूसरों को पानी दे रहे हैं.' गांव में बिजली की लाइन के साथ पौने इंच का काला पीवीसी पाइप लगभग हर घर में जा रहा है. गांव के 36 वर्षीय गणेश रायखेड़े कहते हैं, 'मैं 4-5 साल से पीने का पानी खरीद रहा हूं. सालभर के पानी के बदले दो क्विंटल गेहूं देता हूं. मौजूदा भाव के हिसाब से यह 3,000 रु. सालाना पड़ता है.'

पेयजल की समस्या तो पूरे देश में है, लेकिन यहां की समस्या खास तौर से ध्यान इसलिए खींचती है क्योंकि ये गांव घोडापछाड़ और रुपारेल नदी के संगम के किनारे बसे हैं. भीषण गर्मी में भी इंदिरा सागर बांध का बैकवाटर इन नदियों में पानी बनाए रखता है. आम तौर पर नदियों के नजदीकी इलाकों में जल स्तर अच्छा होता है. लेकिन इन गांवों का जल स्तर नीचे जा रहा है. नर्मदा हाइड्रोइलेक्ट्रिक डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएचडीसी) के महाप्रबंधक बी.के. मिश्रा इसकी संभावित वजह बताते हैं, 'भूजल स्तर में गिरावट की वजह सिल्ट (गाद) हो सकती है. इसके कारण वे छिद्र बंद हो गए हों जिनसे रिसकर पानी जमीन में जाता है.'

गांवों में यह स्थिति देख खुद प्रशासन भी हैरान है. कलेक्टर नीरज दुबे कहते हैं, 'सोचा भी नहीं था कि यहां जल संकट हो सकता है. भूजल सर्वेक्षण विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 5 साल में यहां भूजल स्तर लगातार गिरा है. आम तौर पर माना जाता है कि भरे हुए जलस्रोत के नजदीक भूजल स्तर स्वाभाविक रूप से अच्छा होता है. 'आंकड़े वाकई चौंकाने वाले हैं. जलस्रोत के अलावा अच्छी बरसात होने के बावजूद यहां अच्छे पानी की कमी है. जिला भूजल सर्वेक्षण इकाई, खंडवा के भूजलविद् संजय महाजन कहते हैं, '1985 की गर्मियों में हरसूद का भूजल स्तर 2.90 मीटर था. तब औसत बारिश 903 मिमी हुई थी. पिछले साल 1191 मिमी बारिश हुई लेकिन जल स्तर घटकर 8.36 मीटर रह गया. देखा जाए तो बारिश का आंकड़ा बढ़ा जरूर है लेकिन बरसात के दिन कम हुए हैं. तेज बारिश में पानी का रिसाव कम होता है क्योंकि ज्यादातर पानी बहकर निकल जाता है.'

2005 में जब से इंदिरा सागर बांध बना है तब से ही भूजल स्तर में बदलाव महसूस किया गया है. इसी साल इसके स्तर में 1 मीटर से ज्यादा की गिरावट आंकी गई है. आइआइटी-रुड़की के जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन विभाग के प्रमुख डॉ. दीपक खरे कहते हैं, 'यहां की स्थिति जानने के लिए विस्तृत अध्ययन की जरूरत है.'

यह जल संकट गांव के कुछ लोगों के लिए आजीविका का साधन बन गया है. बरूड़माल के 28 वर्षीय कैलाश रामप्रसाद ने तीन साल पहले अपने घर में नलकूप लगवाया था तब से उनकी तकदीर ही बदल गई. इस नलकूप से भरपूर पानी आता है. कैलाश दूसरे घरों में पानी की सप्लाई कर सालाना 40,000 रु. की कमाई कर रहे हैं. गांव के पंचायत सचिव भरतराम मुकाती कहते हैं, 'नदी में इतना पानी होने के बाद भी इतने जल संकट का सामना करना पड़ेगा, ऐसा कभी सोचा भी नहीं था. एक दिक्कत यह भी है डूबक्षेत्र में जल संकट की बात ही किसी को समझ नहीं आती इसलिए कोई इसे गंभीरता से नहीं लेता है.' लेकिन मजदूरी कर रोजी-रोटी कमाने वाले 45 वर्षीय भागीरथ तेजराम और उनकी पत्नी सुगनाबाई को यह जल संकट बहुत भारी पड़ रहा है. वे पूरे साल में औसत 20,000 रु. भी नहीं कमा पाते हैं. इसमें से भी हर साल उन्हें 2,000 रु. में पीने का पानी खरीदना पड़ता है. सुगनाबाई पूछती हैं, 'सरकार एक दिन की मजदूरी में एक माह का राशन देने की बात कर रही है लेकिन वह हमें पानी कब पिलाएगी? '

राधाकिशन पंवार फसल के लिए पानी है, पीने के लिए नहीं: पंवार कहते हैं कि गांव में खेतों के लिए तो भरपूर पानी मिल जाता है, लेकिन पीने के पानी के लिए तरसना पड़ता है.

औसत वर्षा
(मिमी)
1042.30  929.50 668.40 850.00 1252.00 1191.00
वर्ष 2007  2008 2009 2010 2011 2012
समुद्र सतह से बांध का जल स्तर
(मीटर)260.00 260.00 259.00 260.00 262.13
भूजल स्तर
डग वेल
(मीटर) 5.20 5.50  7.00  6.65  8.24  8.36
स्रोत भूजल सर्वेक्षण विभाग, खंडवा और एनएचडीसी
इंदिरा सागर बांध के अप स्ट्रीम में स्थित हरसूद क्षेत्र में
वर्ष 2007 से 2012 के बीच औसत वर्षा, बांध का
जल स्तर और भूजल स्तर की तुलनात्मक स्थिति

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