हाल ही में तुकाराम मुंढे जब 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई' पहुंचे तो उनसे पहले आए नेताओं के मुकाबले उन्हें ज्यादा तालियां मिलीं. 2005 बैच के IAS अधिकारी मुंढे मई से महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर हैं. इस दौरान उन्होंने कई लाइसेंस रद्द किए, दूध में मिलावट पर नजर रखी और यहां तक कि बॉलीवुड सुपरस्टार्स को भी नोटिस भेजे. हाल ही में 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने उन पर एक खबर छापी, जिसकी हेडलाइन थी, 'In India, a food inspector is a rock star'.
21 साल की सर्विस में करीब 25 बार तबादले झेल चुके मुंढे ने कॉन्क्लेव में मिली तालियों को तारीफ के बजाय एक जिम्मेदारी के तौर पर लिया. उन्होंने सत्र के होस्ट राजदीप सरदेसाई से कहा कि इस तरह की तवज्जो मिलने के साथ “जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है.” उन्होंने कहा कि किसी नेता ने उन्हें फोन करके काम की रफ्तार धीमी करने के लिए नहीं कहा. “यकीन मानिए, राजदीप, इस पोस्टिंग के दौरान किसी ने भी मुझे एक बार फोन करके ढील देने के लिए नहीं कहा.”
मुंढे ने जोर देकर कहा कि मीडिया की दिलचस्पी उनमें नहीं है. उनके मुताबिक, "मीडिया का ध्यान खाद्य सुरक्षा (फूड सेफ्टी) के मुद्दे पर है. यह दवाओं के असर और लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है.” उन्होंने आगे कहा कि अखबारों में जो छपता है, वह “आईना तो है पर पूरी तस्वीर का छोटा हिस्सा भी नहीं है.”
सरदेसाई ने ध्यान दिलाया कि जहां कॉन्क्लेव हो रही है वहां के किचन में काम करने वालों को जब पता चला कि मुंढे आने वाले हैं तो वे घबराए हुए थे. मुंढे ने इस बात को स्वीकार किया. उन्होंने कहा, “फिलहाल डर एक वजह है और यही खुद को प्रेरित करने का तरीका भी है.” हालांकि भय एक अस्थाई उपाय था. यह काम तभी लंबे समय तक असरदार रहेगा, जब ग्राहक सुरक्षित खाने की मांग करेंगे और मैन्युफैक्चरर्स के लिए नियमों का पालन न करना, पालन करने से ज्यादा महंगा हो. उन्होंने कहा, “यह एक व्यवस्था बननी चाहिए, न कि किसी एक अधिकारी की ओर से की गई कोई तात्कालिक कार्रवाई."
मुंढे ने कहा कि खाद्य सुरक्षा को लेकर लोगों के वास्तविक आंदोलन में मांग, सप्लाई और नियमों के बीच तालमेल की शर्त होना जरूरी है. तब तक FDA अपने अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई करता रहेगा. उन्होंने कहा कि कोई रेस्तरां बाहर की गंदी सड़क का हवाला देकर अपनी रसोई की गंदगी को सही नहीं ठहरा सकता.
महाराष्ट्र में दूध की बात करते हुए उन्होंने एक ऐसी व्यवस्था के बारे में बताया, जिसमें दूध जमा करने वाले केंद्रों के आंकड़ों का मिलान कान में टैग लगे मवेशियों से जुड़े पशुपालन के आंकड़ों से किया जाएगा. टीमें पहले ही सैकड़ों दूध जमा करने और ठंडा करने वाले केंद्रों की जांच शुरू कर चुकी हैं. उन्होंने बताया, "अगर हम इन आंकड़ों का मिलान दूध के उत्पादन से करते हैं तो मुझे लगता है कि मिलावट या असुरक्षित दूध की मात्रा कम हो जाएगी."
मुंढे के मुताबिक यही बात पूरी सप्लाई चेन पर लागू होती है. खाद्य सुरक्षा के बिना खाद्य उपलब्धता का कोई मतलब नहीं है. संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) लंबे समय से कहते आए हैं कि "खाद्य सुरक्षा के बिना खाद्य उपलब्धता नहीं हो सकती". उनके मुताबिक, भारत ने इस बात का सिर्फ पहला हिस्सा याद रखा है और दूसरे को नजरअंदाज कर दिया है.
दवाओं के मामले में भी इसी तरह कार्रवाई की गई है. जून से अगस्त के बीच FDA ने 11.41 करोड़ रुपए का सामान जब्त किया, जबकि पिछले पूरे वित्तीय वर्ष में 13.64 करोड़ रुपए का सामान जब्त किया गया था. दवाएं बनाने और बेचने वाले सैकड़ों संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की गई. किसी भी फार्मेसी में कोई गड़बड़ी मिलने पर जांच करते हुए उसके स्रोत तक पहुंचा गया. मुंढे ने माना कि रेस्तरां के मुकाबले दवाओं पर लोगों का ध्यान अब भी कम जाता है लेकिन विभाग अब सिर्फ फार्मेसियों तक ही अपनी कार्रवाई सीमित नहीं रख रहा.
सवाल उठा कि मुंढे का तबादला होने पर क्या होगा? उनके अब तक के रिकॉर्ड को देखते हुए ऐसा होना काफी संभव है. इस सवाल के जवाब में उन्होंने व्यवस्था को लेकर सबसे अहम बात कही. उन्होंने कहा, "संस्थाएं सबसे ज्यादा अहम हैं. उन्हें चलाने वाले लोग अस्थाई होते हैं. मेरे जैसे लोग आते-जाते रहेंगे.” किसी व्यवस्था की स्थिरता के लिए समय, सुनियोजित व्यवस्था और सबसे बढ़कर, जनता के निरंतर दबाव की जरूरत होती है.
कॉन्क्लेव के दौरान जब दर्शकों ने सुरक्षित भोजन की मांग की बात पर अपने हाथ उठाए तो मुंढे ने उनसे ऐसा ही करने को कहा. उन्होंने कहा, “यहां हाथ उठाना बहुत आसान है लेकिन जब जरूरत हो तो इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठानी होगी. अपने फायदे के लिए और मेरे फायदे के लिए भी.”
मुंढे ने महाराष्ट्र के लिए 'ईट राइट मूवमेंट' शुरू करने का ऐलान किया. इसका मकसद स्कूलों, काम की जगहों और पूजा स्थलों तक पहुंचना है. साथ ही, रोजमर्रा की आदतों पर भी ध्यान देना है, जैसे घर में फ्रिज का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है. यह अभियान सरकार के किसी आम नारे की तरह नहीं होगा. उन्होंने कहा, “इसका मकसद आपको और व्यवस्था को जागरूक करना है.”
उन्होंने कहा कि सेरोगेट तंबाकू प्रचार (छद्म प्रचार) के लिए सेलिब्रिटीज को भेजे गए नोटिस पर अलग से सुर्खियां बनाने की जरूरत नहीं थी. अगर अदालत को लगता है कि विभाग ने अपने अधिकारों से आगे बढ़कर कार्रवाई की है तो विभाग अपनी गलती सुधारेगा. अगर तथ्य कार्रवाई का समर्थन करते हैं तो विभाग उसका बचाव करेगा.
मुंढे पहले भी अपने साथ की जाने वाली 'सिंघम' की तुलना को खारिज कर चुके हैं. शायद इसकी वजह यह है कि फिल्म का किरदार अपने कर्तव्य से आगे बढ़कर काम करता था, जबकि मुंढे सिर्फ अपना काम कर रहे थे. उन्हें मिली तालियों से लगा कि फिलहाल वहां मौजूद ज्यादातर लोग फिल्मी हीरो के बजाय अपना कर्तव्य निभाने वाले अधिकारी को पसंद कर रहे थे. हालांकि अगले तबादले के बाद भी लोगों की यह पसंद बनी रहती है या नहीं, यह सवाल सत्र के अंत में अनुत्तरित रह गया.
सत्र की मुख्य बातें
तुकाराम मुंढे
- "किसी ने मुझसे कार्रवाई में ढील देने के लिनहीं कहा है. मीडिया का ध्यान मुझ पर नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर है."
- "खाद्य सुरक्षा के बिना खाद्य उपलब्धता का कोई मतलब नहीं."
- "यहां हाथ उठाना बहुत आसान है लेकिन जब जरूरत हो तो इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठानी होगी."

