एक रॉकेट वैज्ञानिक, 'आधार' के आर्किटेक्ट, एक आईआईटी निदेशक. पहली नजर में ये भारत की परीक्षा प्रणाली को सुधारने के लिए अप्रत्याशित विकल्प लग सकते हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस टास्क फोर्स की घोषणा की है, वह सरकार की सोच में बदलाव का संकेत देती है.
सरकार अब पेपर लीक को अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं देख रही. उसका मानना है कि पटरी से उतरी भारत की परीक्षा व्यवस्था ठीक करने के लिए तकनीक, सुरक्षित डिजिटल ढांचा और मिशन-क्रिटिकल एक्सपर्ट्स जरूरी हैं.
टास्क फोर्स की संरचना ही इस बात का संकेत है कि सरकार इस संकट को कैसे देख रही है. कई वर्षों से पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियों, लॉजिस्टिक समस्याओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों के बाद अब इसे सिर्फ शिक्षा से जुड़ी समस्या नहीं माना जा रहा. इसे ऐसी सिस्टम की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है जिसके समाधान के लिए तकनीक, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, प्रशासन और भरोसेमंद संचालन का अनुभव जरूरी है.
इस पैनल को इस तरह बनाया गया है कि परीक्षा प्रणाली की कई कमजोरियां एक साथ दूर की जा सकें.
तकनीक विशेषज्ञ ः सुधार की नींव
'आधार' जैसी दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणाली के वास्तुकार के रूप में नंदन नीलेकणी ने एक अरब से ज्यादा लोगों के लिए पहचान सत्यापन (ऑथेंटिकेशन), बड़े स्तर पर संचालन (स्केलेबिलिटी) और डिजिटल विश्वास जैसी चुनौतियों का समाधान किया है. आधुनिक परीक्षा प्रणाली को भी ठीक इन्हीं बातों की जरूरत है.
हालांकि, उनकी भूमिका सिर्फ 'आधार' तक सीमित नहीं है. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का नेतृत्व करने से लेकर भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने तक उन्होंने हमेशा सुरक्षित और बड़े स्तर पर काम करने वाले प्लेटफॉर्म बनाने का काम किया है.
यही अनुभव उन्हें इस बात पर विचार करने के लिए उपयुक्त बनाता है कि करोड़ों उम्मीदवारों की पहचान सुरक्षित तरीके से कैसे सत्यापित की जाए, परीक्षाएं सुरक्षित तरीके से कैसे कराई जाएं और परिणाम पारदर्शी तरीके से कैसे जारी किए जाएं.
उनकी मौजूदगी संकेत देती है कि सरकार केवल सख्त पुलिस कार्रवाई जैसे तात्कालिक उपायों से आगे बढ़कर पूरी परीक्षा व्यवस्था को नए सिरे से तैयार करना चाहती है.
रॉकेट वैज्ञानिक ः सटीकता की गारंटी
अगर नीलेकणी डिजिटल ढांचे का प्रतिनिधित्व करते हैं तो इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ संचालन में सटीकता का प्रतिनिधित्व करते हैं. अंतरिक्ष मिशनों में गलती की लगभग कोई गुंजाइश नहीं होती. एक लॉन्च में हजारों सिस्टम जुड़े होते हैं जहां एक छोटी सी चूक भी वर्षों की तैयारी मिट्टी में मिला सकती है.
सोमनाथ की विशेषज्ञता सिर्फ रॉकेट तक सीमित नहीं है. इसरो में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई जटिल तकनीकी कार्यक्रमों का नेतृत्व किया, जिनमें सटीक योजना, जोखिम का आकलन और कई टीमों व एजेंसियों के बीच तालमेल जरूरी था.
यही गुण उन राष्ट्रीय परीक्षाओं के संचालन में भी जरूरी है जिनमें लाखों उम्मीदवार, हजारों परीक्षा केंद्र और एक साथ होने वाली जटिल व्यवस्थाएं शामिल होती हैं.
पूर्व इसरो प्रमुख को शामिल करना इस बात का संकेत है कि सरकार उन संस्थाओं से सीख लेना चाहती है जो बेहद जटिल राष्ट्रीय अभियानों को बहुत अधिक विश्वसनीयता के साथ सफलतापूर्वक पूरा करती हैं. संदेश साफ है कि अब परीक्षा संचालन को सिर्फ प्रशासनिक काम नहीं, बल्कि एक इंजीनियरिंग चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.
IIT निदेशक ः पारदर्शी मूल्यांकन
अगर परीक्षा का मॉडल ही कमजोर रहेगा तो सिर्फ तकनीक भरोसा वापस नहीं ला सकती. इसी वजह से IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी को शामिल किया गया है. वे कंप्यूटर आर्किटेक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञ हैं. डिजिटल तकनीक के अलावा उनके पास इंजीनियरिंग एजुकेशन, अकादमिक प्रशासन और सेक्योर कंप्यूटिंग का भी लंबा अनुभव है.
उनकी भूमिका सिर्फ परीक्षाओं को पेपर लीक से सुरक्षित बनाने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि परीक्षा प्रणाली को कैसे डिजाइन किया जाए, कैसे संचालित किया जाए और उसका मूल्यांकन कैसे किया जाए, ये सब भी उनके जिम्मे होगा.
इस साल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल में आई तकनीकी गड़बड़ियों की जांच और उसे अधिक मजबूत बनाने के लिए IIT मद्रास के विशेषज्ञों की मदद ली थी.
कामकोटी पहले ही सुधारों की दिशा का संकेत दे चुके हैं. उनका कहना है कि तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ पेपर लीक रोकने के लिए नहीं बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए भी होना चाहिए.
उन्होंने कहा, "अगर किसी छात्र को 90 अंक मिले हैं तो NTA को बताना चाहिए कि अंक कैसे दिए गए. यहीं पर तकनीक की जरूरत है." उनका मानना है कि छात्रों को मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता मिलनी चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा है कि जवाबदेही के बिना तकनीक सफल नहीं हो सकती. उनके अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार करने वालों से लेकर परीक्षा कराने वालों, मूल्यांकन करने वालों और परिणाम जारी करने वालों तक, सभी की जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए ताकि पूरी व्यवस्था का रिकॉर्ड रहे. जवाबदेही तय हो और गड़बड़ियों की संभावना कम हो.
इसलिए उनकी मौजूदगी इस बात का संकेत देती है कि टास्क फोर्स का ध्यान सिर्फ परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने पर नहीं बल्कि छात्रों के लिए पारदर्शिता और संस्थानों के लिए जवाबदेही, इन दो सिद्धांतों के आधार पर नए सिरे से तैयार करने पर होगा.
नकल नेटवर्क के लिए सुरक्षा विशेषज्ञ
आज परीक्षा में धोखाधड़ी पहले जैसी नहीं रही, जहां सिर्फ पर्चियां इस्तेमाल होती थीं. अब पेपर लीक में संगठित गिरोह, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन, फर्जी उम्मीदवार और कई राज्यों में फैले नेटवर्क शामिल होते हैं.
इसी वजह से इंटेलिजेंस ब्यूरो (आइबी) के निदेशक तपन डेका को शामिल किया गया है. उनकी मौजूदगी संकेत देती है कि सरकार अब पेपर लीक को सिर्फ नकल की घटना नहीं बल्कि संगठित चुनौती मान रही है, जिसके लिए खुफिया जानकारी जुटाने, खतरे का आकलन करने और पहले से रोकथाम करने की जरूरत है.
किसी खुफिया अधिकारी को इस पैनल में शामिल करके केंद्र सरकार यह मानती दिख रही है कि परीक्षा व्यवस्था में भरोसा लौटाने के लिए तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ संगठित नकल गिरोहों पर कड़ी निगरानी भी जरूरी होगी.
एजुकेशन एक्सपर्ट
तकनीक परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बना सकती है लेकिन अच्छी शैक्षणिक व्यवस्था की जगह नहीं ले सकती. पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल के पास स्कूल शिक्षा, परीक्षा संचालन और शिक्षा नीति लागू करने का लंबा अनुभव है.
शिक्षा क्षेत्र में कई बड़े सुधारों की निगरानी कर चुकीं करवाल यह सुनिश्चित करने में मदद करेंगी कि तकनीकी सुझाव भारत की व्यापक शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप हों.
उनकी मौजूदगी दिखाती है कि सरकार केवल तकनीकी कंपनियों के लिए सुधार नहीं चाहती बल्कि छात्रों, स्कूलों, परीक्षा संस्थाओं और विश्वविद्यालयों के लिए भी चाहती है.
लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट
देशभर में परीक्षा आयोजित करना भारत के सबसे बड़े लॉजिस्टिक अभियानों में से एक है. प्रश्नपत्रों को सुरक्षित पहुंचाना, राज्यों में परीक्षा केंद्रों का समन्वय करना, कर्मचारियों की तैनाती, सामग्री पहुंचाना और आपात स्थिति के लिए तैयारी करना. यह सब अक्सर लाखों उम्मीदवारों के लिए एक ही दिन करना पड़ता है.
इसी वजह से बड़े प्रशासनिक और बुनियादी ढांचों से जुड़ी परियोजनाओं का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ अधिकारी अमृत लाल मीणा को शामिल किया गया है. उनका अनुभव परीक्षा व्यवस्था में बेहतर समन्वय, बेहतर संचालन और अधिक दक्षता लाने में मदद कर सकता है ताकि कमजोर योजना के कारण होने वाली गड़बड़ियों को रोका जा सके.
सरकार संकट को कैसे देख रही?
टास्क फोर्स की संरचना खुद बताती है कि भारत की परीक्षा प्रणाली में आखिर क्या गलत हुआ है. सरकार सिर्फ शिक्षा अधिकारियों पर निर्भर रहने के बजाए तकनीक, विज्ञान, सुरक्षा, शिक्षा और प्रशासन के विशेषज्ञों को साथ लाई है ताकि हर कमजोरी का अलग-अलग समाधान निकाला जा सके.
| नाम | विशेषज्ञता / योगदान |
| नंदन नीलेकणी | बड़े स्तर पर परीक्षा प्रणाली के लिए सुरक्षित तकनीक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर |
| एस. सोमनाथ | सिस्टम इंजीनियरिंग और मिशन लेवल संचालन से विश्वसनीयता बढ़ाना |
| तपन डेका | संगठित नकल नेटवर्क और सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए खुफिया और सुरक्षा विशेषज्ञ |
| वी. कामकोटी | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा के जरिए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना |
| अनीता करवाल | शिक्षा नीति और परीक्षा प्रशासन को मजबूत बनाना |
| अमृत लाल मीणा | देशभर में परीक्षा संचालन का बेहतर समन्वय और लॉजिस्टिक्स |
टास्क फोर्स की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व भी बदला है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार ने नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति की है जो प्रस्तावित सुधारों को लागू करने की निगरानी करेंगे.
इस पैनल का उद्देश्य केवल पेपर लीक रोकना नहीं है. इसका लक्ष्य भारत की पूरी परीक्षा व्यवस्था में तकनीकी, संस्थागत और संरचनात्मक सुधारों की सिफारिश करना है ताकि लोगों का भरोसा दोबारा कायम हो सके.
इन सुधारों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उन्हें कैसे लागू किया जाता है. हालांकि, तकनीक, विज्ञान, सुरक्षा, शिक्षा और प्रशासन के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर सरकार ने यह संकेत जरूर दिया है कि भारत की परीक्षा प्रणाली में भरोसा लौटाने के लिए केवल बेहतर परीक्षा कराना काफी नहीं होगा बल्कि पूरी व्यवस्था को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाना होगा.

