पूर्व BJP अध्यक्ष और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने 22 जुलाई को भरोसा दिलाया कि सरकार छात्रों के विरोध प्रदर्शन और NEET पेपर लीक मामले पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है. इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधा और उनसे व अन्य राजनीतिक दलों से इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करने और गतिरोध का समाधान खोजने के लिए सरकार के साथ काम करने को कहा.
नड्डा ने कहा, "छात्रों की मांगों और पेपर लीक से जुड़े मुद्दों के संबंध में मेरी पहली अपील है कि हमें इस मामले का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए. इससे राजनीतिक लाभ हासिल करना उचित नहीं है. यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर गहन चर्चा की जरूरत है." केंद्रीय मंत्री ने कहा, "हम चर्चा के लिए तैयार हैं और चर्चा के लिए सबसे अच्छी जगह संसद है." उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि विपक्ष इस मुद्दे पर अगर 12 घंटे चर्चा चाहे या 18 घंटे, सरकार इस पर तैयार है.
नड्डा ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर केंद्र को निशाना बनाने के लिए परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे को चुनिंदा तरीके से उठाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कांग्रेस और विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों में हुई ऐसी ही घटनाओं को नजरअंदाज किया.
"विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों में पेपर लीक के मामले"
NEET विवाद को लेकर केंद्र पर विपक्ष के हमले का जवाब देते हुए नड्डा ने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल (TMC के शासन वाला), पंजाब, केरल और कर्नाटक में कथित पेपर लीक की घटनाओं का जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से कई घटनाएं कांग्रेस या विपक्षी दलों की सरकारों के कार्यकाल में हुईं.
उन्होंने कहा, "मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि आप इतने चुनिंदा क्यों हैं. आपने कांग्रेस और कांग्रेस समर्थित सरकारों पर चर्चा क्यों नहीं की? इससे साफ पता चलता है कि आपका उद्देश्य छात्रों का भला या शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना नहीं है. आप केवल छात्रों के मुद्दों और मांगों से राजनीतिक लाभ हासिल करना चाहते हैं."
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के साथ अपनी मुलाकातों के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि चर्चा सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगें लिखित रूप में सौंप दी हैं. उन्होंने कहा, "हमने उनकी बातें बहुत शांति से सुनीं. मैंने सुझाव दिया था कि वे अपनी बातें लिखित रूप में दें और उन्होंने ऐसा किया है. मैंने उनसे यह भी कहा कि जब भी वे चाहें, हम चर्चा के लिए तैयार हैं."
राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा था
राहुल गांधी ने 22 जुलाई को दिल्ली के इंदिरा भवन में करीब 40 मिनट तक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और NEET पेपर लीक का मुद्दा उठाया. इन घटनाओं के विरोध में काली पट्टी पहने राहुल गांधी ने शुरुआत में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'संसद मार्च' में शामिल छात्रों के वीडियो भी दिखाए. कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सुरक्षाबलों ने बेरहमी से लाठीचार्ज किया. उन्होंने दावा किया कि NEET पेपर लीक से करीब 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं.
भारत की शिक्षा व्यवस्था को 'फिक्स सिस्टम' बताते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सरकार पर हमला बोला. उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए, लेकिन एक भी मामले में सजा नहीं हुई. कांग्रेस नेता ने कहा, "हमारे छात्रों ने क्या गलत किया है? सुरक्षा बल उन पर हथियार क्यों तान रहे हैं? उन्हें क्यों पीट रहे हैं? उनके साथ मारपीट और अपमान क्यों किया जा रहा है? धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटा देना चाहिए. वे इस पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं."
इसके साथ ही राहुल गांधी ने सरकार के सामने तीन मांगें रखीं. पहली मांग थी कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें. दूसरी मांग थी कि प्रदर्शनकारियों की पिटाई करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. तीसरी मांग यह थी कि प्रधानमंत्री पूरे मामले पर छात्रों से माफी मांगें.
सरकार पर व्यापक हमला बोलते हुए गांधी ने आरोप लगाया कि भारत की शिक्षा व्यवस्था आम परिवारों की पहुंच से बाहर हो गई है, जबकि पेपर लीक लगातार बिना रोक-टोक जारी हैं.
उन्होंने कहा, "शिक्षा व्यवस्था में केवल गड़बड़ी ही नहीं है, बल्कि यह गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बहुत महंगी भी है."
गांधी ने दावा किया कि पिछले एक दशक में 152 पेपर लीक हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 7.5 करोड़ छात्रों के प्रभावित होने के बावजूद किसी मामले में दोषसिद्धि नहीं हुई.
उन्होंने कहा, "हर महीने लाखों छात्रों से कहा जाता है कि जिस तनाव से वे गुजरे, वह बेकार था क्योंकि पेपर लीक हो गया."
उन्होंने आगे दावा किया कि भारतीय परिवार हर साल परीक्षाओं पर 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं, जो लगभग केंद्रीय शिक्षा बजट के बराबर है. उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक छात्रों और अभिभावकों के साथ विश्वासघात के समान हैं.

