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आईपीसी-सीआरपीसी हटने के बाद अब पुलिस नई संहिताएं कैसे सीखने-समझने वाली है?

तीनों नए कानूनों को पुलिस के बीच लेकर जाने के लिए दिल्ली पुलिस ने उच्च रैंक वाले पदाधिकारियों की एक कमिटी बनाई है

दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस
अपडेटेड 15 जनवरी , 2024

भारत सरकार ने इंडियन पीनल कोड (आईपीसी), कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (सीआरपीसी), और इंडियन एविडेंस एक्ट को बदलकर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य संहिता कर दिया है. दिसंबर 2023 में ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस बिल पर दस्तखत कर दिए थे और इसके बाद ये कानून की शक्ल में आ चुके हैं.

ऐसी संभावना जताई जा रही है कि जनवरी 2024 में ही केंद्र सरकार इन तीन नए कानूनों को लेकर अधिसूचना जारी कर दे. अब सवाल ये है कि कानून व्यवस्था की जड़ों में बैठे पुराने कानूनों को निकलकर इन तीन नए कानूनों की जगह सरकार कैसे बनाएगी? तीनों नए कानूनों को पुलिस के बीच लेकर जाने के लिए दिल्ली पुलिस ने उच्च रैंक वाले पदाधिकारियों की एक कमिटी बनाई है.

यह कमिटी इन तीनों कानूनों का अध्ययन कर इन्हें सरल रूप में पुलिस के सामने लेकर जाएगी. 13 अफसरों की इस कमिटी की अध्यक्षता आईपीएस ऑफिसर छाया शर्मा करेंगी जो फिलहाल ट्रेनिंग यूनिट में स्पेशल कमिश्नर के तौर पर कार्यरत हैं. दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कमिटी पुलिसवालों के लिए आसान तरीके के 'स्टडी मैटेरियल' बनाने के लिए वकीलों और रिटायर्ड पुलिस अफसरों की भी मदद लेगी. 

'स्टडी मैटेरियल' उपलब्ध कराने के अलावा पुलिसकर्मियों को लॉ प्रोफेसर्स, वरिष्ठ लॉयर्स, और लीगल एक्सपर्ट्स की टीम ट्रेनिंग और वर्कशॉप्स भी कराएगी ताकि इन तीन कानूनों के क्रियान्वयन में किसी तरह की दिक्कत ना आए. भारतीय साक्ष्य संहिता में एविडेंस के फॉरेंसिक पक्ष को लेकर भी गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था कि विटनेस से एविडेंस तक सबकुछ डिजिटल तरीके से इवैल्यूएट किया जा सकेगा. इसके लिए भी फॉरेंसिक की एक टीम पुलिसकर्मियों को ये सिखाएगी कि कैसे डिजिटली वो सुबूत ज्यादा प्रामाणिक ढंग से इकठ्ठा कर अपने काम में ला सकते हैं. इसके अलावा देश के हर जिले में सरकार एक फॉरेंसिक वैन लगवाया जाएगा. देश के अलग-अलग राज्यों में तकरीबन 20 लाख पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग देने की योजना सरकार कर रही है. 

ट्रेनिंग का अप्रोच टॉप तो बॉटम होगा, मतलब सबसे पहले आईपीएस अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी. इसके बाद पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों की ट्रेनिंग और फिर थाना स्तर पर पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा. डिजिटल इंडिया के तहत सभी पुलिसकर्मियों को नई तकनीक के बारे में तो सिखाया ही जाएगा लेकिन साथ ही गृह मंत्रालय तीनों नए कानून को और आसान बनाने के लिए एक ख़ास सॉफ्टवेयर भी तैयार कर रही है.

यह सॉफ्टवेयर पुराने और नए कानून के बीच एक पुल का काम करेगा क्योंकि इसमें पुराने जुर्म की सजा डालते ही नए कानूनों के तहत क्या धाराएं होंगी, वो भी ये सॉफ्टवेयर बता देगा. आसान तरीके से कहें तो ये पुराने कानूनी धाराओं और प्रावधानों को भारतीय न्याय संहिता, भारतीय साक्ष्य संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों में अनुवाद कर देगा.

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