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पायलटों की मौत के बाद ड्यूटी और थकान पर उठे सवाल

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने DGCA से पायलटों की थकान और ड्यूटी नियमों को लेकर 6 बदलाव सुझाए हैं

पायलटों को थकान से बचाने के लिए एक प्रोटोकॉल तय होता है (सांकेतिक तस्वीर)
अपडेटेड 17 सितंबर , 2026

ड्यूटी, ट्रेनिंग और अन्य परिचालन गतिविधियों के दौरान एयरलाइन पायलटों की लगातार हो रही मौतों ने फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) को विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) का ध्यान एक बड़े सवाल की ओर खींचने के लिए प्रेरित किया है: क्या पायलटों को थकान से बचाने के मौजूदा उपाय वाकई कारगर हैं?

FIP ने 15 सितंबर को DGCA को भेजे पत्र में छह उपाय सुझाए हैं. इनमें उड़ान ड्यूटी समय सीमा (FDTL) नियमों में एयरलाइन-विशेष छूट वापस लेना, एयरलाइनों के लिए हर तिमाही थकान संबंधी रिपोर्ट और थकान जोखिम प्रबंधन प्रणाली (FRMS) के प्रदर्शन का अनिवार्य खुलासा, पायलटों के स्वास्थ्य से जुड़े रुझानों का वैज्ञानिक अध्ययन और DGCA की अगुवाई में राष्ट्रीय FRMS निगरानी कार्यक्रम बनाना शामिल है.

पायलट संगठन ने कहा कि हाल में हुई पायलटों की मौतें "ऑपरेशनल ड्यूटी साइकल (परिचालन ड्यूटी चक्र), ट्रेनिंग एक्टिविटी और क्रू सदस्यों के आराम की अवधि के दौरान" हुई हैं. संगठन ने "लगातार जमा होती थकान, शरीर की जैविक घड़ी में बदलाव, पर्याप्त आराम के लिए उपलब्ध मौके और मौजूदा परिचालन प्रक्रियाओं से जुड़े दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों" को लेकर चिंता जताई है.

हालांकि FIP ने इनमें से किसी भी मौत के लिए थकान को जिम्मेदार नहीं ठहराया है. संगठन ने कहा, "FIP यह स्पष्ट करना चाहता है कि इन व्यक्तिगत मौतों और थकान के बीच कोई सीधा कारणात्मक संबंध किसी आधिकारिक जांच में स्थापित नहीं हुआ है."

इसके बावजूद संगठन ने कहा कि ये घटनाएं "भारतीय विमानन क्षेत्र में थकान के संपर्क, ड्यूटी तय करने की प्रक्रियाओं, आराम के अवसरों, चिकित्सकीय निगरानी और FRMS की प्रभावशीलता की तत्काल और व्यापक समीक्षा की मांग करती हैं."

FIP की मांग है कि पायलटों की थकान का डेटा DGCA को देना अनिवार्य किया जाए (सांकेतिक तस्वीर)

FIP के पत्र में हाल में हुई कुछ पायलट की मौतों का भी उल्लेख किया गया है. इनमें एयर इंडिया के कैप्टन तरुणदीप सिंह शामिल हैं. FIP के मुताबिक 29 अप्रैल को दिल्ली से देनपसार की उड़ान के बाद बाली में तय ठहराव और आराम की अवधि के दौरान दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई थी. 

संगठन के अनुसार, अकासा एयर के कैप्टन अर्जुन नायडू की 30 अप्रैल को बेंगलुरु में ग्राउंड ट्रेनिंग सेशन के दौरान दिल का दौरा पड़ने के बाद मौत हो गई.

एयर इंडिया के कैप्टन सनी असलादेकर का भी FIP ने जिक्र किया है. वे 11 सितंबर को बोइंग 787 के कन्वर्जन ट्रेनिंग के दौरान दिल्ली में ठहरे हुए थे. इसी दौरान वे एक होटल में मृत पाए गए. पत्र के मुताबिक ऐसा लगता है कि उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई लेकिन इसकी जांच अभी जारी थी.

हालांकि संगठन की मांगें इन व्यक्तिगत मौतों की जांच से कहीं आगे की हैं. पहली मांग के तौर पर FIP ने सभी स्वीकृत FDTL प्रावधानों को तत्काल और समान रूप से लागू करने की मांग की है. साथ ही एयरलाइन को दी गई विशेष छूट वापस लेने की मांग की है. संगठन का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से जरूरी होने पर ही ऐसी छूट अस्थायी तौर पर दी जानी चाहिए.

FIP का कहना है कि अलग-अलग एयरलाइनों को दिए गए बदलावों और कुछ नियमों को लागू करने में हुई देरी से थकान कम करने की व्यवस्था प्रभावित हुई है. संगठन के मुताबिक, अस्थायी छूट लंबे समय तक जारी रहने पर रोजमर्रा की परिचालन प्रक्रिया का हिस्सा बन सकती है और थकान प्रबंधन के मकसद को कमजोर कर सकती है.

दूसरी मांग के तहत FIP चाहता है कि नियामक, एयरलाइंस, पायलट संगठन, चिकित्सा विशेषज्ञ, स्लीप साइंटिस्ट और मानव व्यवहार के विशेषज्ञ मिलकर एक राष्ट्रीय FRMS निगरानी कार्यक्रम में काम करें. संगठन चाहता है कि यह कार्यक्रम DGCA बनाए.

तीसरी मांग यह है कि एयरलाइनों के लिए हर तिमाही DGCA को थकान से जुड़ा डेटा देना अनिवार्य किया जाए. इसमें प्राप्त और खारिज की गई थकान संबंधी रिपोर्ट, उठाए गए सुधारात्मक कदम, FRMS के प्रदर्शन के इंडिकेटर और थकान से जुड़ी घटनाएं  शामिल हों. 

FIP यह भी चाहता है कि DGCA हर साल पूरे विमानन उद्योग के ऐसे थकान संबंधी आंकड़े जारी करे, जिनसे किसी व्यक्ति या एयरलाइन की पहचान न हो सके. इससे भारतीय विमानन उद्योग में थकान के रुझानों को समझने और उन पर नजर रखने में मदद मिलेगी. अभी यह जानकारी मुख्य रूप से अलग-अलग एयरलाइनों तक ही सीमित रहती है.

चौथी मांग हाल में हुई मौतों से उठी चिंताओं से सीधे जुड़ी है. FIP 2023 से 2026 तक पायलटों के स्वास्थ्य से जुड़े रुझानों की स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा चाहता है. इसमें कार्डियोवैस्कुलर इवेंट्स, अचानक काम करने में असमर्थ होने के मामले और ड्यूटी साइकल से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी घटनाएं शामिल हैं. संगठन ने ड्यूटी रोस्टर तैयार करने, स्टैंडबाय के इस्तेमाल, रिजर्व ड्यूटी के आवंटन, अत्यधिक लंबी दूरी की उड़ानों और शरीर की जैविक घड़ी में बदलाव से जुड़े जोखिमों की भी समीक्षा की मांग की है.

पांचवीं मांग के तहत FIP चाहता है कि उसके समेत मान्यता प्राप्त पायलट प्रतिनिधि संगठनों को भविष्य में FDTL, FRMS, पायलटों की थकान और विमानन सुरक्षा नीति से जुड़े विचार-विमर्श में औपचारिक रूप से शामिल किया जाए. संगठन ने चिकित्सा संस्थानों और विमानन विश्वविद्यालयों के सहयोग से राष्ट्रीय विमानन-थकान अनुसंधान कार्यक्रम शुरू करने की भी सिफारिश की है.

इनमें से कई मांगों के साथ एक और सवाल जुड़ा है, जो सभी के मन में है: क्या पायलट शुरुआत से ही अपनी थकान की रिपोर्ट कर रहे हैं? FIP के पत्र में कहा गया है, "रोस्टर में बदलाव, परिचालन दबाव और करियर पर संभावित असर की चिंता के कारण पायलटों की थकान की रिपोर्टिंग अभी भी काफी कम है."

संगठन ने कहा कि मौजूदा रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता और थकान की रिपोर्ट करने वाले पायलटों के लिए बेहतर सुरक्षा की जरूरत है. उसके मुताबिक, मौजूदा निगरानी व्यवस्था "थकान से जुड़े जोखिम के वास्तविक नतीजों" के बजाय नियमों के पालन पर अधिक केंद्रित रहती है.

सितंबर का यह पत्र FIP की ओर से भेजे गए कई ज्ञापनों की श्रृंखला में सबसे नया है. 9 जुलाई को FIP ने DGCA से FDTL लागू करने में दी गई अस्थाई बढ़ोतरी या बदलावों को हटाने का अनुरोध किया था. उस पत्र में कहा गया था कि दिसंबर 2025 में एयर इंडिया और इंडिगो को ‘विशेष छूट’ दी गई थी और इन्हें वापस लेने की मांग की गई थी.

इसके बाद अगस्त में संगठन ने FRMS पर एक विस्तृत प्रस्तुति DGCA को भेजी. इसमें जनवरी 2024 की बाटिक एयर घटना का हवाला दिया गया था. इस घटना में केंदारी से जकार्ता जा रही उड़ान के दौरान दोनों पायलट अनजाने में करीब 28 मिनट तक सो गए थे. बाद में चालक दल ने विमान पर नियंत्रण फिर हासिल कर लिया था.

संगठन का संदेश स्पष्ट था: "चालक दल ने निर्धारित ड्यूटी समय की सीमाओं का पालन किया था, फिर भी दोनों पायलट सो गए. थकान प्रबंधन का ध्यान केवल रोस्टर में दर्ज घंटों पर नहीं बल्कि इंसान के वास्तविक प्रदर्शन पर होना चाहिए."

यही अंतर FIP के नए अभियान के केंद्र में है. FDTL नियम काम और आराम के समय की सीमाएं तय करते हैं. संगठन का मानना है कि केवल ये सीमाएं ही लगातार होने वाली ड्यूटी, रात में उड़ान, सुबह के शुरुआती घंटों में उड़ान, सोने के मौके और काम के बोझ या शरीर की जैविक घड़ी में बदलाव जैसे दूसरे कारकों को पूरी तरह नहीं समेटतीं.

FIP ने कहा, "थकान शायद ही कभी किसी एक स्पष्ट घटना के रूप में सामने आती है. इसके बजाय यह ऑपरेशनल प्रेशर, शरीर की जैविक घड़ी में बदलाव, पर्याप्त आराम न मिलने और संगठनात्मक दबावों के लगातार संपर्क में आने से धीरे-धीरे बढ़ती है."

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