नितिन गडकरी अब चुप नहीं रहना चाहते. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने आखिरकार अदालत का दरवाजा खटखटाया है. पिछले कई महीनों से उन्हें और उनके परिवार को सरकार के एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को लेकर लगातार आरोपों, मीम्स और सोशल मीडिया अभियानों का सामना करना पड़ रहा था.
यह कदम E20 ईंधन (20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल) को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ माना जा रहा है. यह विवाद अब राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर सोशल मीडिया पर गडकरी को निशाना बनाने वाले अभियान का रूप ले चुका है.
27 जुलाई को बॉम्बे हाई कोर्ट ने गडकरी को मेटा, एक्स, गूगल और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ कथित मानहानिकारक, छेड़छाड़ किए गए और AI से तैयार किए गए कंटेंट को लेकर दीवानी मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी. इस मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी.
गडकरी का कहना है कि उन्हें गलत तरीके से E20 नीति का निर्माता और सबसे बड़ा लाभार्थी बताया जा रहा है. जबकि एथेनॉल ब्लेंडेड प्रोग्राम पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत आता है. याचिका में कहा गया है कि AI और डीपफेक वीडियो के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई कि E20 नीति से उन्हें और उनके परिवार को फायदा हुआ है. इससे उनकी व्यक्तिगत और राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचा है.
मौजूदा मानसून सत्र के दौरान संसद में भी यह मुद्दा लगातार उठ रहा है. अब तक पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय EBP कार्यक्रम से जुड़े लगभग 15 सवालों के जवाब दे चुका है. वहीं सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केवल तीन सवालों के जवाब दिए हैं. इनमें भी अधिकतर सवाल E20 ईंधन पर चलने वाले वाहनों की अनुकूलता और सुरक्षा से जुड़े थे. मंत्रालय ने एक जवाब में स्पष्ट कहा कि एथेनॉल ब्लेंडेड प्रोग्राम का संचालन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय करता है.
इस पूरे घटनाक्रम से वाकिफ और नजर रख रहे एक अधिकारी ने इंडिया टुडे को बताया कि गडकरी का मकसद आम सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं है बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट के लिए जिम्मेदार ठहराना है. उन्होंने कहा, "हर व्यक्ति के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराना संभव नहीं है लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ऐसे मानहानिकारक और अपमानजनक कंटेंट को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठा सकते हैं. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में इसके प्रावधान हैं."
यह मुकदमा लगभग एक साल से चल रहे राजनीतिक हमलों और ऑनलाइन अभियानों के बाद सामने आया है. अप्रैल 2026 से पूरे देश में E20 को डिफॉल्ट पेट्रोल के रूप में बेचा जाने लगा था. इसके बाद विपक्ष, खासकर कांग्रेस, लगातार यह आरोप लगाती रही कि गडकरी के बेटों का एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों से संबंध है. कांग्रेस नेताओं ने इन कंपनियों के तेजी से विस्तार पर सवाल उठाए और कहा कि एथेनॉल के पक्ष में गडकरी की खुली वकालत, सरकार के तेजी से बढ़ रहे एथेनॉल ब्लेंडेड प्रोग्राम के बीच हितों के टकराव की आशंका पैदा करती है.
गडकरी लगातार इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं. पिछले एक साल में कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में उन्होंने कहा कि एथेनॉल की खरीद, उसकी कीमत तय करना और मिश्रण से जुड़ी बातें तय करना पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा केंद्रीय मंत्रिमंडल के अधिकार क्षेत्र में आता है. उन्होंने कहा कि एथेनॉल के ठेके देने या EBP नीति तय करने में उनकी कोई भूमिका नहीं है.
उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार का एथेनॉल उत्पादन देश के कुल उत्पादन की तुलना में 'समुद्र में बूंद' के बराबर है. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ 'पैसे देकर अभियान' चलाया जा रहा है.
सोशल मीडिया पर यह विवाद अब 'E20 हटाओ' अभियान के रूप में तेजी से फैल रहा है. इसी के तहत 'E20 जनता पार्टी' नाम से एक नया ऑनलाइन अभियान भी शुरू हुआ है. माना जा रहा है कि इसका नाम हाल में चर्चा में रही 'कॉकरोच जनता पार्टी' से प्रेरित है.
इस अभियान की मांग है कि लोगों को E20 के साथ-साथ 100 प्रतिशत पेट्रोल खरीदने का विकल्प भी मिले. साथ ही ईंधन की स्पष्ट लेबलिंग और EBP नीति की स्वतंत्र समीक्षा की भी मांग की जा रही है. हालांकि समय के साथ यह अभियान गडकरी को ही E20 कार्यक्रम का चेहरा बताकर व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाने लगा है.
अपनी याचिका में गडकरी ने कहा है कि उनके खिलाफ प्रसारित की जा रही सामग्री मनगढ़ंत और मानहानिकारक है. इसका उद्देश्य लोगों को यह विश्वास दिलाना है कि वह निजी आर्थिक लाभ के लिए इस नीति का समर्थन कर रहे हैं.
यह ऑनलाइन अभियान अब सड़कों तक पहुंचता दिख रहा है. नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के सफल प्रदर्शन के बाद दिल्ली टैक्सी एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने भी बिना एथेनॉल वाले पेट्रोल की उपलब्धता बहाल करने, ईंधन की पारदर्शी लेबलिंग और E20 की स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा की मांग की है और साथ ही संसद तक मार्च निकालने का भी आह्वान किया है. हालांकि, दिल्ली में ज्यादातर टैक्सियां सीएनजी पर चलती हैं लेकिन इस संगठन में शामिल अधिकांश टूरिस्ट टैक्सियां इंटरस्टेट हाइवे पर पेट्रोल और डीजल का ही इस्तेमाल करती हैं.
गडकरी की इस कानूनी कार्रवाई का उद्देश्य बड़ी टेक कंपनियों की जवाबदेही भी तय करना है. मेटा, एक्स और गूगल को पक्षकार बनाकर उन्होंने अदालत से यह देखने का आग्रह किया है कि AI से तैयार किए गए फर्जी और मानहानिकारक कंटेंट को रोकने में इन प्लेटफॉर्म्स की क्या भूमिका है. याचिका में कहा गया है कि कच्चे तेल के आयात को कम करने, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने और एथेनॉल के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने वाला एथेनॉल ब्लेंडेड प्रोग्राम पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी है. हालांकि, गडकरी लंबे समय से एथेनॉल और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के समर्थक रहे हैं.
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने संसद में अपने ताजा जवाब में दोहराया है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के अध्ययनों के अनुसार E20 के लिए वाहनों के इंजन में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है. मंत्रालय के मुताबिक पुराने वाहनों के प्रदर्शन में भी कोई बड़ा अंतर नहीं पाया गया है. केवल कुछ पुराने BS-III वाहनों में नियमित सर्विस के दौरान रबर के कुछ पुर्जे बदलने की जरूरत हो सकती है.
गडकरी का अदालत जाना इस बात का संकेत है कि अब वे सोशल मीडिया पर हो रहे इन हमलों को सामान्य राजनीतिक आलोचना मानकर नजरअंदाज करने के मूड में नहीं हैं.

