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कूडियाट्टम: 2,000 साल पुरानी कला को नई पीढ़ी दे पाएगी नया जीवन?

'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ' में कूडियाट्टम कला को आज के दौर में जीवित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर बात हुई. कूडियाट्टम कलाकार कपिला वेणु ने कहा कि परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए नए प्रयोग और नए दर्शकों से जुड़ना जरूरी है

कूडियाट्टम कलाकार कपिला वेणु
अपडेटेड 1 अक्टूबर , 2026

क्या 2,000 साल पुरानी कोई कला वक्त के साथ बदले बिना जिंदा रह सकती है? 29 सितंबर 2026 को कोच्चि में आयोजित 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ' में कपिला वेणु की बातचीत इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूमती रही. कूडियाट्टम कलाकार वेणु ने परंपरा, उसमें नए बदलाव और इस प्राचीन रंगमंच को नई पीढ़ी के बीच प्रासंगिक बनाए रखने की जरूरत पर खुलकर बात की.

'कूडियाट्टम: द डांस ऑफ कंटिन्युटी' सत्र में वेणु ने कलाकारों, मंच प्रस्तुतियों और केरल की पारंपरिक कलाओं के माहौल में बड़े होने के अपने अनुभव साझा किए. मशहूर नृत्यांगलना जी. वेणु और निर्मला पणिकर की बेटी कपिला ने अपने माता-पिता को कूडियाट्टम, मोहिनीअट्टम और कठपुतली जैसी कलाओं का डॉक्यूमेंटेशन करते, उन्हें नया जीवन देते और उनमें नए प्रयोग करते देखा है.

वेणु के लिए कूडियाट्टम को अपनाना किसी करियर के फैसले से ज्यादा जीने का एक ढंग था. उन्होंने कलाकारों के अपेक्षाकृत छोटे समूह के साथ एक प्राचीन प्रदर्शन परंपरा को बनाए रखने की चुनौतियों के बारे में बात की. इसके बावजूद उन्होंने ध्यान दिलाया कि इस कला को सीखने, इसका अभ्यास करने और इसे आगे ले जाने वाले युवाओं की कोई कमी नहीं है.

इस बातचीत का एक खास हिस्सा 'नवरस साधना' रहा जो उनके पिता द्वारा तैयार किया गया अभिनय सिखाने का एक तरीका है. कूडियाट्टम और अन्य पारंपरिक कलाओं से जुड़ी यह साधना सांस, भावनाओं पर नियंत्रण और प्रस्तुति के शारीरिक पहलुओं पर ध्यान देती है. वेणु ने बताया कि इसका आकर्षण पारंपरिक रंगमंच से आगे निकलकर नर्तकों, अभिनेताओं और यहां तक कि सिनेमा जगत के लोगों तक पहुंच चुका है.

वेणु ने कूडियाट्टम में महिला कलाकारों पर भी बात की और रेखांकित किया कि इस कला में पेशेवर महिला कलाकारों का एक लंबा इतिहास रहा है. अपने पिता के साथ उनके काम का बड़ा उद्देश्य मजबूत महिला किरदारों के लिए जगह बनाना और रंगमंच में पारंपरिक पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देना रहा है.

इसके बाद उनकी जिंदगी में सिनेमा का एक अनपेक्षित मोड़ आया. कोविड महामारी के दौरान, एक श्रीलंकाई फिल्म निर्माता ने वेणु को इंस्टाग्राम पर देखा और उन्हें 'नीलीरा' में कास्ट कर लिया, जो श्रीलंकाई गृहयुद्ध की यादों पर बनी एक तमिल फिल्म थी. इसके बाद वे एक अन्य व्यावसायिक फिल्म में भी नजर आईं, जिसमें उन्होंने एक विलेन का किरदार निभाया.

हालांकि वेणु ने साफ किया कि सिनेमा उनके लिए महज एक उत्सुकता है, कोई भटकाव नहीं. उनकी जड़ें आज भी मजबूती से कूडियाट्टम में ही हैं. उनका बड़ा सपना 'नटन कैराली' को एक जीवंत जगह बनाए रखना है, जो उनके पिता द्वारा स्थापित एक संस्थान है ताकि पारंपरिक कलाकार, नर्तक और कठपुतली कलाकार वहां लगातार सीखते रहें, प्रयोग करते रहें और नई रचनाएं गढ़ते रहें. वेणु का मानना है कि निरंतरता का मतलब एक जगह ठहर जाना नहीं है. इसका असली मतलब परंपरा को सांस लेने देना है.

सत्र की मुख्य बातें

कपिला वेणु :

  • "अगर परंपरा समय के साथ जड़ हो जाएगी तो वह जीवित नहीं रह सकेगी."
  • "कूडियाट्टम केवल वह नहीं है जिसे मैं मंच पर करती हूं; यह मेरे जीने का एक ढंग है."
  • "नवरस साधना आपको सांस, भावना और शरीर पर नियंत्रण करना सिखाती है और इसका महत्व पारंपरिक रंगमंच से कहीं आगे तक है."
  • "सिनेमा मेरे पास उत्सुकतावश आया लेकिन मैं जो कुछ भी करती हूं, उसके केंद्र में कूडियाट्टम ही रहता है."
  • "निरंतरता का मतलब परंपरा को सांस लेने, आगे बढ़ने और अपने नए दर्शक तलाशने की जगह देना है."
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