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राम मंदिर ट्रस्ट में CEO जितेंद्र मिश्र के साथ बनी नई टीम कितनी कारगर?

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की पहली पूर्णकालिक CEO के रूप में नियुक्ति के साथ राम मंदिर ट्रस्ट ने अपने प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव किए हैं

Ram MandirTrust CEO Jeetendra Mishra
राम मंदिर ट्रस्ट की 2 सितंबर की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए; रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (इनसेट)
अपडेटेड 2 सितंबर , 2026

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के निर्माण के बाद उसके संचालन और प्रशासन को अधिक पेशेवर और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यपालक अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया है. 

2 सितंबर को अयोध्या में हुई ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम पर सहमति बनी. करीब चार दशक तक भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट से लेकर शीर्ष कमांड पदों तक जिम्मेदारियां संभाल चुके मिश्र अब उस संस्थान की प्रशासनिक कमान संभालेंगे, जो करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और जहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. 

पिछले कुछ समय में ट्रस्ट के कामकाज और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति को संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है. 

उनके साथ ही गोविंददेव को ट्रस्ट का नया महामंत्री बनाया गया है. अभी तक वे कोषाध्यक्ष की भूमिका में थे. ट्रस्ट की इसी महत्वपूर्ण बैठक में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति, पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव और वित्त वर्ष 2025-26 के खातों को मंजूरी देने जैसे अहम फैसले भी किए गए.

वायु सेना का करियर

जितेंद्र मिश्र मूल रूप से देवरिया जिले के भाटपाररानी क्षेत्र स्थित भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं. 6 दिसंबर 1986 को उन्होंने भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त किया. करीब 39 वर्ष के सैन्य करियर में उनका सफर एक लड़ाकू विमान के कॉकपिट से निकलकर वायुसेना की शीर्ष ऑपरेशनल कमान तक पहुंचा.

जितेंद्र मिश्र युद्ध के मोर्चे के साथ वायु सेना में कई दूसरी जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं (फाइल फोटो)
जितेंद्र मिश्र युद्ध के मोर्चे के साथ वायु सेना में कई दूसरी जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं (फाइल फोटो)

मिश्र फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे और 18 से अधिक प्रकार के विमानों पर उड़ान भरने का अनुभव हासिल किया. उनके खाते में 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव है. मिश्र ने अपने करियर में केवल ऑपरेशनल उड़ान और युद्धक जिम्मेदारियां ही नहीं संभालीं, बल्कि प्रशिक्षण, तकनीकी परीक्षण, योजना और संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर भी काम किया.

फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के साथ वे एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट यानी ASTE में चीफ टेस्ट पायलट रहे. बाद में ASTE के कमांडेंट की जिम्मेदारी भी संभाली. दो फ्रंटलाइन एयरबेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग के रूप में भी उन्होंने काम किया. एयर हेडक्वार्टर में उन्होंने डायरेक्टर, ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप, प्रिंसिपल डायरेक्टर और असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ यानी प्रोजेक्ट्स जैसे पदों पर जिम्मेदारियां निभाईं. 

एकीकृत रक्षा स्टाफ में भी मिश्र का लंबा अनुभव रहा. वहां उन्होंने डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइजेशन एंड ट्रेनिंग से जुड़े डिप्टी चीफ और बाद में ऑपरेशंस से जुड़े डिप्टी चीफ की जिम्मेदारी संभाली. इस पूरे सफर में रणनीतिक योजना, संगठन संचालन, विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वय और जटिल परिस्थितियों में निर्णय लेने का अनुभव उनके करियर का अहम हिस्सा रहा. 

उनके पेशेवर प्रशिक्षण का दायरा भी व्यापक रहा है. उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी, एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल के साथ अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से प्रशिक्षण हासिल किया. 

जितेंद्र मिश्र को अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है. उन्होंने जनवरी 2025 में पश्चिमी वायु कमान की कमान संभाली. भारतीय वायु सेना की महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमानों में शामिल पश्चिमी वायु कमान में एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में उनकी जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण रही. 

30 अप्रैल 2026 को वे एयर मार्शल के पद से सेवानिवृत्त हुए. अब सेवानिवृत्ति के कुछ ही महीनों बाद उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट में एक नई और पूरी तरह अलग भूमिका मिली है. 

सैन्य अनुभव कैसे आएगा काम 

जितेंद्र मिश्र के सैन्य करियर में ऑपरेशन सिंदूर एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की सैन्य कार्रवाई के दौरान पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी उनके पास थी. ऑपरेशन के बाद दिए गए साक्षात्कारों में उन्होंने अभियान से जुड़े अपने अनुभव और भारतीय वायु सेना की तैयारियों के बारे में जानकारी साझा की थी. 

ऑपरेशन सिंदूर के बाद आदमपुर बेस पर पीएम मोदी के साथ जितेंद्र मिश्र
ऑपरेशन सिंदूर के बाद आदमपुर बेस पर पीएम मोदी के साथ जितेंद्र मिश्र

इसी दौरान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़ा उनका एक बयान भी चर्चा में आया था. उन्होंने बताया था कि ऑपरेशन के दौरान एस-400 से जुड़े एक अधिकारी ने उनसे लक्ष्य पर कार्रवाई के लिए अनुमति मांगी और उनकी अनुमति के बाद 314 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को निशाना बनाया गया. 

उन्होंने यह दावा भी किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके बाद पाकिस्तान ने एस-400 की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की और इसके लिए जासूसों तथा स्लीपर सेल तक का इस्तेमाल किया. 

मिश्र के पूरे सैन्य करियर की खासियत बड़े और जटिल संगठनों का नेतृत्व रही है. जानकार बताते हैं कि यही अनुभव अब राम मंदिर ट्रस्ट में उनके सामने नए रूप में आएगा. मंदिर प्रशासन में चुनौती किसी सैन्य अभियान से अलग है लेकिन यहां भी बड़े पैमाने पर मानव संसाधन, सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी प्रणालियों, संचालन, आपात स्थितियों और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल की जरूरत है. 

अयोध्या में साकेत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य वी. एन. अरोड़ा कहते हैं, “राम मंदिर अब केवल निर्माणाधीन परियोजना नहीं है. इसके साथ एक विशाल तीर्थ क्षेत्र, श्रद्धालु सुविधाएं और धार्मिक पर्यटन का विस्तार जुड़ा है. रोजाना आने वाले श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की सुचारु व्यवस्था से लेकर सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, साफ-सफाई, कर्मचारियों की जिम्मेदारियों और अलग-अलग सरकारी विभागों के साथ समन्वय तक CEOके सामने कई स्तरों की जिम्मेदारी होगी.” 

अरोड़ा के मुताबिक मिश्र के लिए सबसे अहम परीक्षा सैन्य अनुशासन को मंदिर की धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलताओं के साथ संतुलित करने की होगी. सेना में स्पष्ट कमांड स्ट्रक्चर के भीतर काम करने का अनुभव उनके पास है, जबकि ट्रस्ट के संचालन में धार्मिक परंपराओं, संत समाज, ट्रस्टियों, प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच समन्वय की जरूरत होगी. 

पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति का फैसला ट्रस्ट के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल के महीनों में उसके कामकाज और वित्तीय व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं. ट्रस्ट की बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के बैलेंस शीट भी प्रस्तुत की गई. 

स्वामी गोविंददेव गिरि अब ट्रस्ट के महामंत्री होंगे (फाइल फोटो)
स्वामी गोविंददेव गिरि अब ट्रस्ट के महामंत्री होंगे (फाइल फोटो)

इसके अनुसार वर्ष के दौरान ट्रस्ट की कुल आय 237 करोड़ रुपए रही, जबकि कुल व्यय 91 करोड़ रुपए रहा. निर्माण आदि कार्यों पर 425 करोड़ रुपए का पूंजीगत व्यय किया गया. 31 मार्च 2026 को वित्त वर्ष के अंत में ट्रस्ट के पास कुल उपलब्ध राशि 1,882 करोड़ रुपए थी. 

न्यासी मंडल ने इन वार्षिक लेखों को मंजूरी दे दी. यानी नए CEO की जिम्मेदारी ऐसे ट्रस्ट की है जिसके पास बड़ी वित्तीय संपत्ति है और जिसका कामकाज आने वाले समय में और विस्तार लेने वाला है. 

तीन नए न्यासी

2 सितंबर की बैठक में ट्रस्ट ने तीन रिक्त न्यासी पदों को भी भर दिया. महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडे और डॉ. निर्मला यादव को नए न्यासी के रूप में नियुक्त किया गया. इसके साथ ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे में भी महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है. 

महेश भागचंदका 68 वर्ष के हैं. वे व्यवसायी और समाजसेवी हैं तथा नई दिल्ली में रहते हैं. उन्होंने 'हिन्दुत्व के पुरोधा' पुस्तक लिखी है. राम मंदिर के भूमि-पूजन और प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रमों में वे यजमान के रूप में अनुष्ठानों में शामिल रहे हैं. 

श्रीराम वन गमन यात्रा से जुड़े 292 पवित्र तीर्थस्थलों पर श्रीराम स्तंभ की स्थापना के काम से भी भागचंदका का जुड़ाव रहा है. वे वर्ल्ड हिंदू इकनॉमिक फोरम की कार्यकारिणी के सदस्य हैं. ट्रस्ट की नई व्यवस्था में उन्हें कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. 

पेशे से वकील मदन मोहन पांडे 74 वर्ष के हैं और अयोध्या छावनी के रहने वाले हैं. उन्होंने 1990 से 2019 तक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर मामले में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में श्रीरामलला विराजमान तथा महंत रामचंद्र परमहंस दास की ओर से पैरवी की थी. 

उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में भी उन्होंने छह वर्ष जिम्मेदारी संभाली. वे श्री हरि सत्संग समिति के उपाध्यक्ष हैं और अयोध्या में कथाकार योजना प्रशिक्षण केंद्र के पालक भी हैं. उनका अनुभव ट्रस्ट के कानूनी और धार्मिक मामलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है. 

डॉ. निर्मला यादव 66 वर्ष की हैं और शिकोहाबाद की रहने वाली हैं. उन्होंने हिंदी और संस्कृत में पोस्ट ग्रेजुएशन तथा पीएचडी की है. करीब 19 वर्षों तक महाविद्यालय की प्रिंसिपल रहीं और अब सेवानिवृत्त हैं. वे 15 वर्षों तक विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की सदस्य भी रही हैं. शिक्षा और अकादमिक प्रशासन का उनका अनुभव ट्रस्ट में एक अलग विशेषज्ञता जोड़ता है. 

पदाधिकारियों के स्तर पर भी बैठक में बदलाव किया गया. स्वामी गोविंददेव गिरि अब ट्रस्ट के महामंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे. पिछले दो महीनों की कठिन और चुनौतीपूर्ण अवधि में महामंत्री पद का कार्यभार सफलतापूर्वक संभालने के लिए कृष्ण मोहन जी के प्रति ट्रस्ट ने आभार जताया और उनकी सराहना की. 

चंपत राय के इस्तीफा देने के बाद कृष्ण मोहन को अंतरिम महामंत्री बनाया गया था. वहीं महेश भागचंदका कोषाध्यक्ष का दायित्व संभालेंगे. इस तरह 2 सितंबर की बैठक केवल नए CEO की नियुक्ति तक सीमित नहीं रही. 

तीन नए न्यासियों को शामिल करने, महामंत्री और कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारियां तय करने और वार्षिक खातों को मंजूरी देने के फैसलों ने ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव किया है. यानी 2 सितंबर के फैसलों के बाद ट्रस्ट में सिर्फ चेहरे नहीं बदले हैं बल्कि राम मंदिर को एक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और दीर्घकालिक संस्थान के रूप में विकसित करने की जिम्मेदारी भी अब नई टीम के सामने है.

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