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डार्क मोड

कार क्रैश के भारतीय रेटिंग स्टैंडर्ड कितने काम के?

इसी साल अक्तूबर से 'भारतएनकैप' सुरक्षा मानकों वाली कारें बाजार में आएंगी. ये वाहनों में सुरक्षा से जुड़े नए स्वदेशी मानक हैं

सड़क दुर्घटनाओं में मौत के आंकड़ों में भारत दुनिया में अव्वल है
सड़क दुर्घटनाओं में मौत के आंकड़ों में भारत दुनिया में अव्वल है
अपडेटेड 24 अगस्त , 2023

जुलाई के पहले पखवाड़े में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर गाजियाबाद के लालकुआं के पास उल्टी दिशा से आ रही एक स्कूली बस ने कार को टक्कर मारी और इस हादसे में पांच लोगों को जान चली गई थी. बस वाले की पूरी गलती होने के बावजूद अगर उस कार का क्रैश टेस्ट हुआ होता या उसके सेफ्टी फीचर्स कुछ ज्यादा होते तो कुछ जानें बच सकती थीं. 

यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है, देश में हर दिन ऐसी दर्जनों दुर्घटनाएं होती रहती हैं और जो बार-बार याद दिलाती हैं कि वाहनों में सुरक्षा के ज्यादा से ज्यादा और बेहतर फीचर कितने जरूरी हैं.  इसी बात को मद्देनजर रखते हुए 22 अगस्त को केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने वाहनों में सुरक्षा से जुड़े नए स्वदेशी मानक लॉन्च किए हैं. 

मानक को भारत एनकैप (BHARATNCAP—New Car Assessment Program)  नाम दिया गया है. हालांकि मानक लॉन्च करने और लागू करने के बावजूद देश में सड़क हादसों में हुई मौतों में कितनी कमी आ सकेगी, इस पर विशेषज्ञ पसोपेश में हैं.  

भारत एनकैप से पहले यानी अभी तक कारों का सिर्फ ग्लोबल एनकैप होता था. महंगी और आयातित कारों का क्रैश टेस्ट होता था और उसकी रिपोर्ट के साथ वाहन की खासियतों का प्रचार होता था. देश में ग्लोबल एनकैप के मानकों के अनुसार अब भारतएनकैप को अपनाया जाएगा. अलग-अलग रफ्तार पर फ्रंट क्रैश और साइड क्रैश की रिपोर्ट के आधार पर वाहन को रेटिंग दी जाएगी. इससे लोग जान सकेंगे कि जो वाहन वे खरीदने जा रहे हैं वह कितना सुरक्षित है. 

इस साल 1 अक्तूबर से इस तरह की सुरक्षा रेटिंग वाले वाहन भारत के बाजार में आने की संभावना है क्योंकि भारत एनकैप इसी तारीख से लागू हो रहा है.  इसमें बच्चों के लिए सुरक्षित और वयस्कों के लिए सुरक्षित कारों का भी वर्गीकरण किया जाएगा. भारत एनकैप की लॉन्चिंग के वक्त सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, “इसे 3.5 टन तक वजन वाले वाहनों पर लागू किया जाएगा. यह कदम उपभोक्ताओं को सुरक्षित कारें उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.” उन्होंने बताया कि यह खरीदारों और निर्माताओं दोनों के लिए फायदे का सौदा होगा.  

दरअसल, भारत में सालाना 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में मरते हैं जबकि हम दुनिया में सबसे ज्यादा सड़क हादसों वाले देश नहीं हैं. दुनिया में सबसे ज्यादा सड़क हादसे अमेरिका में होते हैं लेकिन सुरक्षित कारों की वजह से वहां हादसों में मरने वालों की संख्या भारत के मुकाबले एक तिहाई से भी कम है. भारत में अब लोग छोटी कार से एसयूवी की ओर बढ़ रहे हैं और सुरक्षित कारों की ओर भी देख रहे हैं. ऑटो एक्सपर्ट शैलेष सिन्हा का कहना है कि सुरक्षित कारें भारतीय बाजार में आएं यह बहुत अच्छी बात है. लेकिन वे इस बात पर संदेह जताते हैं कि सेफ्टी रेटिंग से हादसों की संख्या घटेगी. सिन्हा के मुताबिक, “वाहन एक हथियार की तरह है और वह सुरक्षित हाथों में ही रहना चाहिए. लोगों को सबसे पहले वाहन और ट्रैफिक के नियमों के बारे में सिखाया जाना चाहिए ताकि वे सही तरीके से वाहन चलाएं. इसे पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए.”  

देश में कारों की कीमत और प्रति किलोमीटर माइलेज भी खरीदारों की पसंद तय करता है. सिन्हा कहते हैं, “कारों को सुरक्षित बनाते ही उनका माइलेज घट जाता है और कीमत बढ़ जाती है. भारत में लोग सुरक्षा के मुकाबले सस्ते को तरजीह देते हैं. वे एक लीटर पेट्रोल में 8 किलोमीटर चलने वाली सुरक्षित कार नहीं खरीदते, उन्हें तो 1 लीटर में 20 किलोमीटर चलने वाली कार चाहिए. सरकार सुरक्षा मानक चाहे जैसे भी लागू कर दे, इस मानसिकता को बदलना बहुत मुश्किल है.” 

भारतएनकैप के सुरक्षा मानक कार की बॉडी व अन्य चीजों के लिए होंगे. सवारी की सुरक्षा के लिए सीट बेल्ट और एयरबैग पहले से मौजूद हैं. जानकार बताते हैं कि हादसों में कार सवारों की सबसे ज्यादा हिफाजत सीट बेल्ट से ही होती है.

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