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डार्क मोड

दो मौसमी घटनाएं कैसे बना रहीं भारत में मानसून को ताकतवर?

सैटेलाइट तस्वीरों में तिब्बत के पठार के ऊपर विशाल मानसूनी सर्कुलेशन दिखाई दिया. वहीं बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव से विकसित हुआ डीप डिप्रेशन, पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तट को पार करते हुए देश के भीतर आगे बढ़ रहा है

मानसून बारिश की चेतावनी
इन दोनों क्षेत्रों में मौसमी सक्रियता दक्षिण-पश्चिम मानसून को और मजबूत बना रही है. (फोटो: विंडी)
अपडेटेड 29 जुलाई , 2026

भारत में मानसून सबसे सक्रिय चरण में प्रवेश कर रहा है. इस हफ्ते दो मौसमी घटनाएं एक-दूसरे के साथ टकराना शुरू कर रही हैं जिसके चलते देश के बड़े हिस्से में गरज-चमक के साथ भारी बारिश होने की संभावना बनी रहेगी.

सोमवार को जारी सैटेलाइट तस्वीरों में तिब्बत के पठार के ऊपर एक विशाल मानसूनी सर्कुलेशन दिखाई दिया. वहीं बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव से विकसित हुआ गहरा अवदाब यानी डीप डिप्रेशन, पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तट को पार करते हुए देश के भीतर आगे बढ़ रहा है.

आसान भाषा में ऐसे समझिए

बंगाल की खाड़ी का डिप डिप्रेशन (गहरा अवदाब)

समुद्र के गर्म पानी से एक कम दबाव का क्षेत्र बना जो धीरे-धीरे मजबूत होकर ‘डीप डिप्रेशन’ बन गया (चक्रवात से एक कदम पहले की स्थिति). यह पहले पश्चिम बंगाल के पास तट से टकराया और उत्तरी ओडिशा और पश्चिम बंगाल के इलाकों में पहुंच गया. इसे एक बड़े ‘पानी से भरे स्पंज’ की तरह समझिए जो अब जमीन पर निचोड़ा जा रहा है. यह उत्तरी ओडिशा, दक्षिणी झारखंड और उत्तरी छत्तीसगढ़ की तरफ आगे बढ़ता रहेगा. 

 तिब्बत के पठार पर बना विशाल हवा का चक्र

यह आसमान में तिब्बत के ऊपर बना एक बड़ा हवा का घेरा है. यह सीधे बारिश नहीं करवाता बल्कि एक ‘पंखे’ की तरह काम करता है. यह मानसूनी हवाओं को उत्तर की ओर खींचता है जिससे हवा तेजी से ऊपर उठती है और बादल जल्दी बनते हैं.


दोनों साथ आने से क्यों असर बढ़ जाता है?

बंगाल की खाड़ी वाला सिस्टम नीचे से नमी ‘पंप’ कर रहा है और तिब्बत वाला सिस्टम ऊपर से हवा ‘खींच’ रहा है. जब पंप और खिंचाव दोनों एक साथ मिलते हैं तो नमी वाली हवा बहुत तेजी से ऊपर उठती है और इसी वजह से हल्की-फुल्की बारिश की जगह भारी बारिश होती है और तूफान बनते हैं.

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इन दोनों बड़े मौसमी परिघटनाओं के आपस में टकराने की वजह से दक्षिण-पश्चिम मानसून और मजबूत हो रहा है. इसकी वजह से पूर्वी, मध्य, उत्तरी और दक्षिणी भारत के बड़े हिस्सों में बारिश तेज हो रही है.

भारत मौसम विज्ञान विभाग(IMD) के अनुसार, यह गहरा अवदाब उत्तर और उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ता रहेगा और बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी लेकर देश के अंदरूनी इलाकों तक पहुंचेगा.

जैसे-जैसे यह आगे बढ़ेगा इसका असर उत्तरी भारत में सक्रिय मानसूनी ट्रफ के साथ मिलकर और बढ़ेगा. इससे घने बादल बनने और व्यापक स्तर पर गरज-चमक के साथ बारिश होने की अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी.

पूर्वी भारत में बारिश पहले ही तेजी से हो रही है और आने वाले दिनों में इसका दायरा धीरे-धीरे पश्चिम और उत्तर भारत तक फैलने की संभावना है.

IMD के अनुसार, मंगल और बुधवार को मानसून पूरे जोर पर रहेगा. ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है.

 

मजबूत होती इस मानसूनी प्रणाली का असर दक्षिण भारत में भी देखने को मिलेगा. महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है. वहीं पश्चिमी तट पर भी बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है.

इसी वजह से पूर्वी, उत्तरी, मध्य और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में पहले से ही बादल देखे जा रहे हैं और पूरे हफ्ते बारिश का दौर जारी रहने की उम्मीद है.

दिलचस्प बात यह है कि इतनी सक्रियता और कई राज्यों में रेड और ऑरेंज अलर्ट के बावजूद इस बार का मानसून सामान्य से करीब 15% कम बारिश (1 जून से 26 जुलाई के बीच) लेकर चल रहा है. यानी इस हफ्ता जो बारिश होने की संभावना है, वह कुछ हद तक उस कमी की भरपाई भी कर सकती है.

मौसम विभाग ने बाढ़ संभावित और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. लगातार बारिश की वजह से जलभराव, स्थानीय स्तर पर बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है. खासकर, हिमालयी राज्यों और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है.

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