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शेख हसीना विवाद के बावजूद आगे बढ़ पाएगी भारत-बांग्लादेश की बातचीत?

भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान और प्रमुख मंत्रियों से मुलाकात के बाद दोनों देशों ने बातचीत जारी रखने के संकेत दिए हैं

भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान के साथ
अपडेटेड 12 अगस्त , 2026

भारत और बांग्लादेश एक और राजनयिक टकराव के कगार से अपने संबंधों को वापस लाने की कोशिश करते दिख रहे हैं. भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने 10 अगस्त को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की. 

यह मुलाकात पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नई दिल्ली में एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए उनकी सरकार की तीखी आलोचना करने के कुछ दिनों बाद हुई.

जून में ढाका में भारत के उच्चायुक्त का पद संभालने के बाद रहमान के साथ त्रिवेदी की यह पहली मुलाकात थी. यह ऐसे संवेदनशील समय में हुई है जब रहमान के सितंबर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आने की संभावना है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल) के अध्यक्ष के तौर पर रहमान को आमंत्रित किया है.

नई दिल्ली की ओर से सुलह का संदेश दिया गया. भारतीय उच्चायोग ने कहा कि त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री मोदी की ओर से रहमान को शुभकामनाएं दीं और बांग्लादेश के साथ ‘सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्य की ओर देखने वाले तरीके’ से काम करने की भारत की मंशा जताई.  दोनों पक्षों ने आपसी हित के मुद्दों और ‘जन-केंद्रित दृष्टिकोण’ के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की.

हाल ही में शेख हसीना की एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बांग्लादेश-भारत के बीच तनातनी बढ़ गई थी
हाल ही में शेख हसीना की एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बांग्लादेश-भारत के बीच तनातनी बढ़ गई थी

भारत के लिए इस मुलाकात ने बांग्लादेश की नई सरकार के साथ अपने संबंधों को शेख हसीना के बढ़ते विवाद से अलग रखने का अवसर दिया. हसीना 5 अगस्त 2024 को अपनी अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं और तब से भारत में रह रही हैं.

हालांकि ढाका ने साफ कर दिया कि शेख हसीना उसकी चिंताओं के केंद्र में बनी हुई हैं. बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, मुलाकात के दौरान हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी उठाया गया. 

बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने पत्रकारों से कहा कि ढाका ने भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया है. बांग्लादेश में उन्हें ‘मानवता के खिलाफ अपराधों’ के लिए मौत की सजा सुनाई गई है.

ढाका ने इंकलाब मंच के संयोजक शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के संदिग्ध आरोपियों के प्रत्यर्पण की भी मांग की. खलीलुर रहमान ने कहा, "हमने उनके द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज उन्हें उपलब्ध करा दिए हैं. यह (हादी मामला) हमारे लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा है. हमने उनसे हत्यारों को जल्द से जल्द प्रत्यर्पित करने के लिए कहा है."

वहीं भारत ने यह कोशिश की है कि हसीना का विवाद व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर हावी न हो. नई दिल्ली ने 7 अगस्त को साफ किया था कि 5 अगस्त को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान हसीना की ओर से की गई टिप्पणियों का वह समर्थन नहीं करता.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "सरकार की उस कार्यक्रम में कोई भूमिका नहीं थी. वह एक निजी मीडिया संस्था का आयोजन था. सरकार उस मंच पर कही गई किसी भी बात का समर्थन नहीं करती, खासकर बांग्लादेश की विधिवत गठित सरकार के खिलाफ कही गई बातों का."

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सफाई दी थी हसीन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की कोई भूमिका नहीं थी
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सफाई दी थी हसीन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की कोई भूमिका नहीं थी

इस स्पष्टीकरण से राजनयिक बातचीत के लिए जगह बनाने में मदद मिली लगती है. ढाका में दो दिन की बातचीत के दौरान खलीलुर रहमान और बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद से मुलाकात करने वाले त्रिवेदी ने बार-बार आगे बढ़ने के रास्ते के रूप में बातचीत पर जोर दिया.

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा, "हमने अच्छी चर्चा की. हमारे पास मुद्दे हैं और बांग्लादेश के पास भी मुद्दे हैं. लेकिन लोगों से जुड़ा केवल एक मुद्दा है: अच्छे संबंध. ऐसा कोई मुद्दा नहीं है जिस पर हम बैठकर समाधान न निकाल सकें."

त्रिवेदी ने रहमान को ‘जनता से जुड़ा व्यक्ति’ बताते हुए कहा कि वे विनम्र और जमीन से जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं लगा कि मैं उनसे पहली बार मिल रहा हूं. वे बहुत अच्छे व्यक्ति हैं, बहुत विनम्र हैं और जमीन से जुड़े हुए हैं. हमारी बहुत अच्छी बातचीत हुई. हम भविष्य की ओर देख रहे हैं."

त्रिवेदी ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर एक खास बात भी कही: "हम सीमाएं साझा नहीं करते. हम सपने साझा करते हैं. मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में सब ठीक हो जाएगा और दोनों पक्षों को मुद्दों का समाधान करना होगा."

बांग्लादेश के गृह मंत्री अहमद से मुलाकात के बाद भी भारतीय दूत ने इसी तरह का रुख अपनाया. त्रिवेदी ने कहा, "मुद्दे होंगे और उनके समाधान भी होंगे. लेकिन दोनों देशों के लोगों के लिए केवल एक मुद्दा है- अच्छे संबंध." उन्होंने कहा, "जब हम एक-दूसरे से बात करते हैं तो समस्याओं का समाधान होता है. मुझे पूरा विश्वास है कि लोग एक हैं. इसका समाधान होगा. सब कुछ सकारात्मक है."

उनकी टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भारत के पास ढाका के साथ संबंधों को संतुलित बनाए रखने के कई कारण हैं. दोनों देशों के बीच व्यापार, संपर्क, सुरक्षा और जल बंटवारे से जुड़े कई मुद्दे अभी लंबित हैं. 1996 में हुई गंगा जल संधि तीन दशक पूरे होने के बाद 31 दिसंबर को समाप्त होने वाली है.

इसलिए नई दिल्ली के सामने चुनौती यह है कि हसीना, सीमा विवाद या अन्य द्विपक्षीय विवादों को व्यापक संबंधों को पटरी से उतारने दिए बिना रहमान की निर्वाचित सरकार के साथ संबंध बनाए रखे.

दूसरी ओर, ढाका चाहता है कि भारत संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए उसके शब्दों में एक ‘अनुकूल माहौल’ तैयार करे. खलीलुर रहमान ने कहा कि 5 अगस्त को हसीना की उपस्थिति को लेकर बांग्लादेश की पहले की आपत्तियां स्पष्ट रूप से बता दी गई थीं और भारत ने इन चिंताओं को गंभीरता से लिया है.

जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत ने हसीना को नई दिल्ली से मीडिया को संबोधित करने की अनुमति देने पर खेद जताया है, तो खलीलुर रहमान ने कहा कि इस मामले को केवल माफी तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए. 

उन्होंने तर्क दिया कि बांग्लादेश की अदालत से दोषी ठहराई जा चुकीं हसीना देश की न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में आती हैं और उन्होंने भारत पर बांग्लादेश की न्यायपालिका पर हमला करने की अनुमति देने का आरोप लगाया.

हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि भारतीय अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत से कुछ आश्वासन मिला है. खलीलुर रहमान ने कहा, "अपनी बातचीत के आधार पर मैं कुछ हद तक आश्वस्त हूं और उम्मीद करता हूं कि इस तरह की घटना दोबारा नहीं होगी."

रहमान की भारत यात्रा अभी तय नहीं हुई है. खलीलुर रहमान ने कहा कि ढाका ने अभी कोई फैसला नहीं किया है. उन्होंने कहा, "सबसे पहले, मैं भविष्य बताने वाला नहीं हूं. दूसरी बात, प्रधानमंत्री को ब्रिक्स के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था. उन्हें बिम्सटेक के अध्यक्ष के तौर पर आमंत्रित किया गया था. आपको इस अंतर को समझने की कोशिश करनी चाहिए."

राजनयिक रूप से यह अंतर मायने रख सकता है लेकिन इन मुलाकातों से व्यापक संकेत यही मिला कि दोनों पक्ष मौजूदा विवाद को एक और लंबे गतिरोध में बदलने के इच्छुक नहीं दिखते. 

त्रिवेदी की मुलाकातों से संकेत मिलता है कि नई दिल्ली रहमान सरकार के साथ सीधे राजनीतिक संपर्क बढ़ा रही है. इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय को जानकारी देने के लिए उनका नई दिल्ली लौटना बताता है कि ये बातचीत भारत के रुख को तय करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा थीं.

नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग ने त्रिवेदी और रहमान के बीच आधे घंटे चली मुलाकात को ऐसा बताया जो ‘भारत-बांग्लादेश संबंधों और आपसी संपर्क को मजबूत करने और आगे बढ़ाने में काफी दूर तक मदद कर सकती है.’

भारत का फिलहाल जोर सभी विवादों को सुलझाने के बजाय बातचीत जारी रखने और ढाका की नई सरकार के साथ कामकाजी संबंध बनाने पर है. भारत की कोशिश हसीना के मुद्दे को वह एकमात्र नजरिया बनने से रोकना भी है जिसके जरिए द्विपक्षीय संबंधों को देखा जाए.

त्रिवेदी ने इस रुख को सीधे शब्दों में कहा: "देश के भीतर भी मुद्दे हैं. ऐसा कोई मुद्दा नहीं है जिसका समाधान नहीं किया जा सकता."

आने वाले हफ्ते, खासकर रहमान की संभावित भारत यात्रा से पहले का समय, यह तय करेगा कि क्या प्रत्यर्पण, सीमा प्रबंधन, सुरक्षा सहयोग और गंगा जल बंटवारे की व्यवस्था के भविष्य जैसे कठिन सवालों के बीच यह आशावाद कायम रह सकता है. 

हालांकि फिलहाल ऐसा लगता है कि दिल्ली और ढाका ने टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता चुना है.

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