
दिल्ली में तीन हफ्ते बाद विधानसभा चुनाव होना है. इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ED को शराब घोटाला केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस चलाने की इजाजत दे दी है.
गृह मंत्रालय ने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके.सक्सेना की सिफारिश के बाद यह मंजूरी दी. उपराज्यपाल ने भारत सरकार से मांग की थी कि शराब घोटाले में केजरीवाल के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए ED को इजाजत दी जाए.
इस खबर के सामने आते ही इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या ED दिल्ली चुनाव से पहले केजरीवाल पर कार्रवाई कर सकती है और अब आगे शराब घोटाला केस में क्या होगा? एक-एक कर इन सवालों के जवाब जानते हैं…
सवाल- 1: अभी अचानक गृह मंत्रालय ने केजरीवाल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में एक्शन क्यों लिया?
जवाब: ED कानूनी बाध्यताओं की वजह से भारत सरकार से इजाजत लिए बिना केजरीवाल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में केस दर्ज नहीं कर पा रही थी.
इसी वजह से ED ने 5 दिसंबर 2024 को एलजी से केजरीवाल के खिलाफ ट्रायल चलाने की अनुमति मांगी. दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना ने 11 जनवरी 2025 को ED को शराब नीति मामले में केजरीवाल के खिलाफ केस चलाने की इजाजत दे दी.
ED को केंद्रीय गृह मंत्रालय की इजाजत मिलने का इंतजार था. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक दिल्ली एलजी की सिफारिश पर अब गृह मंत्रालय ने भी इजाजत दी है.
सवाल- 2: अरविंद केजरीवाल के खिलाफ ED ने अभी तक केस दर्ज नहीं किया है, फिर वो गिरफ्तार क्यों हुए थे?
जवाब: दिल्ली शराब घोटाला केस में 9 समन देने के बाद भी अरविंद केजरीवाल ED के सामने पेश नहीं हुए थे. ऐसे में जांच में सहयोग नहीं करने का तर्क देकर 21 मार्च 2024 को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था.
सुप्रीम कोर्ट के वकील कपिल सांखला बताते हैं कि ED जब किसी को PMLA एक्ट की धारा 41(A) के तहत नोटिस देती है तो सामने वाले को नोटिस पर जवाब देने के लिए तीन मौके दिए जाते हैं. कानूनी तौर पर अगर कोई नोटिस का जवाब देता है तो उसकी गिरफ्तारी नहीं होगी या स्पेशल ऑर्डर पर ही होगी. केजरीवाल ने 8 से 9 नोटिस को ठुकरा दिया था.
ऐसे में ED के पास ये अधिकार है कि अगर कोई आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है तो केस चलाने से पहले भी उसे गिरफ्तार किया जा सकता है. केजरीवाल अगर जांच में मदद करते तो संभव है कि उनकी गिरफ्तारी उस समय नहीं होती. आमतौर पर मजबूत सबूत मिलने पर केस दर्ज होने के बाद ही ऐसे मामले में गिरफ्तारी होती है.
सवाल- 3: दिल्ली में शराब घोटाला सामने आने के करीब 2 साल बाद अब ED ने केस चलाने की इजाजत क्यों मांगी है?
जवाब: 9 जुलाई 2024 को ED ने ट्रायल कोर्ट में केजरीवाल के खिलाफ चार्जशीट पेश करते हुए कहा था कि केजरीवाल के खिलाफ केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं. केजरीवाल ने नवंबर में दिल्ली हाईकोर्ट में ED के इस चार्जशीट को रद्द करने की मांग की थी.
केजरीवाल ने इस चार्जशीट को रद्द करने के पीछ जो तर्क दिए वो कुछ इस तरह से था- ED ने जो आरोप लगाए हैं, उन आरोपों के समय वे पब्लिक सर्वेंट थे. वे दिल्ली के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. ऐसे में केस चलाने की इजाजत उन्हें दिल्ली के एलजी और गृह मंत्रालय से लेनी होगी.
हाईकोर्ट ने केजरीवाल की मांग खारिज कर दी. इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. जहां कोर्ट ने केजरीवाल के हक में फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने 6 नवंबर को फैसला सुनाते हुए कहा था कि पब्लिक सर्वेंट पर केंद्र सरकार की अनुमति के बिना मनी लॉन्ड्रिंग यानी PMLA की धाराओं के तहत केस नहीं चलाया जा सकता है.
यह नियम CBI और स्टेट पुलिस पर भी लागू होगी. इसके बाद ही ED को राज्यपाल से इजाजत मांगनी पड़ी.
सवाल- 4: शराब घोटाले में केस चलाने की इजाजत मिलने के बाद अब ED आगे क्या कार्रवाई कर सकती है?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट के वकील कपिल सांखला के मुताबिक ED किसी मामले में तभी कार्रवाई कर सकती है, जब उस मामले में FIR दर्ज हो.
केजरीवाल के खिलाफ जिस मामले में केस दर्ज हुआ है वो शेड्यूल ऑफेंसेस कहलाता है. इसका मतलब है, PMLA एक्ट 2002 के तहत सूचीबद्ध अपराध. एक बार केस दर्ज हो जाए तो इसके बाद ED के पास वो सारी ताकत है जो CrPC में होती है.
केस दर्ज होने के बाद आमतौर पर ED काफी तेजी से कार्रवाई करती है, जब तक की आरोपी गिरफ्तार नहीं हो जाए. एक बार गिरफ्तार हो जाए तो फिर जांच प्रक्रिया स्लो हो जाती है. इसकी मुख्य वजह यह है कि फाइनेंसियल क्राइम में कई लेयर होती है. इसकी जांच बेहद पेचीदा होती है.
अब ED तीन चरणों में आगे की कार्रवाई कर सकती है. पहला- ED इस मामले में जांच शुरू करेगी. दूसरा- जांच के दौरान पूछताछ के लिए गवाहों को बुलाया जाएगा. इस तरह के केस में गवाहों के बयान के मजबूत सबूत माना जाता है.
तीसरा- ED पूछताछ के लिए अरविंद केजरीवाल को नोटिस भेज सकती है. अगर केजरीवाल जांच में सहयोग नहीं करते हैं तो उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है और यहां तक की उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है.
चूंकि जांच प्रक्रिया लंबी चलती है और उसके बाद PMLA कोर्ट अपना फैसला सुनाती है. हालांकि, इस कोर्ट के फैसले को ऊपरी अदालत में भी चुनौती दी सकती है.
सवाल- 5: क्या चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हो सकते हैं?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट के वकील कपिल सांखला के मुताबिक कानूनी तौर पर देखें तो केस दर्ज होने के बाद पूछताछ के लिए ED नोटिस जारी कर सकती है. अगर ED को गिरफ्तारी की जरूरत महसूस होती है तो गिरफ्तार भी कर सकती है. उसे अब किसी की इजाजत लेने की भी जरूरत नहीं होगी. हालांकि, अभी चुनाव है, ऐसे में अगर गिरफ्तारी होती है तो ये पूरी तरह से पॉलिटिकल मामला होगा.
सवाल- 6: क्या ED को कार्रवाई करने से पहले दिल्ली सरकार से भी इजाजत लेनी की जरूरत होगी?
जवाब: नहीं, सुप्रीम कोर्ट के वकील कपिल सांखला बताते हैं कि ED को सिर्फ केस चलाने के लिए अनुमति लेने की जरूरत थी. अब किसी से भी कोई इजाजत लेने की जरूरत नहीं है.
इस बात को समझना हो तो 2020 के इस उदाहरण से समझ सकते हैं कि जब एक के बाद एक 8 राज्यों ने CBI को अपने यहां बिना परमिशन घुसने से रोक दिया था. इनमें पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, केरल और मिजोरम जैसे राज्य शामिल थे.
मतलब साफ है कि दिल्ली पुलिस स्पेशल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 1946 के तहत बनी CBI को किसी भी राज्य में घुसने के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी है. लेकिन, अगर जांच किसी अदालत के आदेश पर हो रही है तब CBI कहीं भी जा सकती है. पूछताछ और गिरफ्तारी भी कर सकती है. करप्शन के मामलों में अफसरों पर मुकदमा चलाने के लिए CBI को उनके डिपार्टमेंट से भी अनुमति लेनी होती है.
इसी तरह नेशनल इनवेस्टिगेटिंग एजेंसी यानी NIA को कानूनी ताकत NIA Act 2008 से मिलती है. NIA पूरे देश में काम कर सकती है, लेकिन उसका दायरा केवल आतंक से जुड़े मामलों तक सीमित है.
इन दोनों से उलट ED केंद्र सरकार की इकलौती जांच एजेंसी है, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में नेताओं और अफसरों को तलब करने या उन पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार की अनुमति की जरूरत नहीं है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अब अपने फैसले में कहा है कि ED को भी पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ केस चलाने के लिए राज्यपाल और सरकार से इजाजत लेनी होगी.
इसके अलावा ED छापा भी मार सकती है और प्रॉपर्टी भी जब्त कर सकती है. मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट में ED जिसे गिरफ्तार करती है, उसे जमानत मिलना भी बेहद मुश्किल होता है. इस कानून के तहत जांच करने वाले अफसर के सामने दिए गए बयान को कोर्ट सबूत मानता है, जबकि बाकी कानूनों के तहत ऐसे बयान की अदालत में कोई वैल्यू नहीं होती.
सवाल- 7: क्या CBI और ED दोनों एक ही मामले में केजरीवाल के खिलाफ कार्रवाई कर रही है?
जवाब: नहीं, CBI शराब नीति को लागू करने में हुई गड़बड़ी और अनियमितताओं की जांच कर रही है. CBI का कहना है कि शराब के लाइसेंस बांटने में भ्रष्टाचार हुआ है. CBI शराब नीति के लागू होने के समय उसके लाइसेंस बांटने में हुए कथित पक्षपात, लाइसेंस फीस कम करने की वजहों की जांच कर रही है.
वहीं, ED शराब नीति में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही है. ED का कहना है कि इस नई शराब नीति में होलसेल बिजनेस ने 12% का कमीशन बुक किया, जिसमें से 6 प्रतिशत आम आदमी पार्टी को दिया गया. ED ने ये भी आरोप लगाया है कि जानबूझकर शराब नीति में ऐसे लूपहोल्स छोड़े गए हैं, ताकि आम आदमी पार्टी को बैक एंड से पैसा मिलता रहे. इस तरह एक ही मामले से जुड़े दो अलग-अलग केस को दोनों एजेंसी देख रही है.
सवाल- 8: क्या ED को मनी लॉन्ड्रिंग केस चलाने की इजाजत मिलने से CBI के पास चल रहे केस पर भी कोई असर पड़ेगा?
जवाब: नहीं, फिलहाल CBI के केस पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि CBI शराब के लाइसेंस बांटने में भ्रष्टाचार के मामले को देख रही है. जबकि ED इससे जुड़े पैसों के हेरफेर का मामला देख रही है.
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