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डार्क मोड

इस साल बजट से पहले पेश नहीं होगा इकोनॉमिक सर्वे! जानें क्या है इसकी अहमियत 

दरअसल संसदीय परंपरा के मुताबिक मौजूदा सरकार चुनावी साल में अंतरिम बजट के साथ इकोनॉमिक सर्वे पेश नहीं करती. इसे तैयार करने का काम उस सरकार को दिया जाता है जो चुनाव के बाद सत्ता संभालती है

संसद में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
संसद में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
अपडेटेड 17 जनवरी , 2024

साल 2024 का बजट जारी होने में अब महज कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं. 1 फरवरी की सुबह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करेंगी. इससे ठीक पहले संसद में एक और अहम दस्तावेज इकोनॉमिक सर्वे पेश किया जाता है. पिछले कुछ सालों से 31 जनवरी के दिन ही इकोनॉमिक सर्वे जारी किया जाता रहा है. हालांकि माना जा रहा है कि 2024 के बजट से पहले संसद में इसे पेश नहीं किया जाएगा. 

जिस साल देश में लोकसभा का चुनाव होता है उस साल सरकार अंतरिम बजट पेश करती है. चुनाव के बाद जब नई सरकार का गठन हो जाता है तो फिर से सालाना बजट पेश किया जाता है. 2024 भी चुनावी साल ही है. इस वजह से हो सकता है कि सरकार 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट से पहले इकोनॉमिक सर्वे को पेश ना करे. बल्कि इसे सरकार बनने के बाद जारी होने वाले बजट के साथ पेश किया जाए. 

लेकिन इस इकोनॉमिक सर्वे में ऐसा क्या होता है और इसकी अहमियत क्या है? इसका जवाब है कि यह खत्म होने वाले वित्तीय वर्ष और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर एक सालाना रिपोर्ट है. इसमें सरकार की तरफ से चलाई जा रही सभी योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में रिपोर्ट शामिल होती है. साथ ही इसमें पेश होने वाले बजट की पूरी तस्वीर भी छिपी होती है. यानी इकोनॉमिक सर्वे से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगामी बजट कैसा होने वाला है या हो सकता है. इसे भारत के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर की देख-रेख में डिपॉर्मेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर तैयार करता है. 

पहला इकोनॉमिक सर्वे 1950-51 में केंद्रीय बजट के साथ ही पेश किया गया था. हालांकि साल 1964 में इसे बजट से अलग पेश किया गया. तभी से बजट से ठीक एक दिन पहले इकोनॉमिक सर्वे पेश करने की परंपरा कायम है. इकोनॉमिक सर्वे में सरकारी पॉलिसी की जानकारी भी शामिल होती है. इसे दो पार्ट में बांटा जाता है. पार्ट A में अर्थव्यवस्था का पूरा लेखा जोखा और आने वाली चुनौतियां शामिल होती है, वहीं दूसरे भाग में सामाजिक सुरक्षा, गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, मानव विकास और जलवायु जैसे मुद्दों को शामिल किया जाता है. इसमें कुछ सिफारिशें भी दी जाती हैं. हालांकि ऐसा जरूरी नहीं है कि सरकार सिफारिशों को मान ही ले. 

अलग-अलग सेक्टर जैसे कि उद्योग, कृषि, रोजगार, कीमत और एक्सपोर्ट्स का डेटा भी इकोनॉमिक सर्वे में दिया जाता है. जिससे कि भारत के आर्थिक विकास की समीक्षा की जाती है. साथ ही इसमें अगले वित्तीय वर्ष में देश की प्राथमिकताएं क्या होंगी और किन सेक्टर्स पर ज्यादा जोर देने की जरूरत है इन सब बातों को केंद्रीय बजट में बेहतर तरीके से शामिल करने के लिए भी इकोनॉमिक सर्वे की सहायता ली जाती है. 

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