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दिल्ली की EV सब्सिडी का फायदा लेकर दूसरे राज्य नहीं जा सकेंगे खरीदार

दिल्ली सरकार के नए नियम के मुताबिक EV खरीद प्रोत्साहन योजना का लाभ लेने वाले किसी भी वाहन को तीन साल तक दिल्ली से बाहर ट्रांसफर कराने के लिए NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) नहीं मिलेगा

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
अपडेटेड 3 जुलाई , 2026

दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति ने उस खामी को दूर कर दिया है, जिसके जरिए खरीदार दिल्ली की EV सब्सिडी लेने के बाद अपने वाहन को दूसरे राज्यों में ले जाकर रजिस्टर करा लेते थे.

साथ ही, दिल्ली सरकार की इस नई नीति के तहत अगले दो वर्षों में कई श्रेणियों में नए पेट्रोल, डीजल और CNG (कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस) वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने की योजना भी बरकरार रखी गई है.

1 जुलाई को आधिकारिक तौर पर जारी की गई दिल्ली EV नीति 2026 में एक नया महत्वपूर्ण नियम जोड़ा गया है जो पहले के नियमों में शामिल नहीं था. नई नीति के तहत खरीद प्रोत्साहन योजना का लाभ पाने वाले किसी भी EV को तीन साल तक दिल्ली से बाहर ट्रांसफर या दोबारा रजिस्ट्रेशन के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) नहीं मिलेगा.

यह प्रावधान इस उद्देश्य से किया गया है कि सब्सिडी वाले वाहन कुछ समय तक दिल्ली में ही रहें ताकि शहर को बेहतर वायु गुणवत्ता का लाभ मिल सके. अधिसूचना में नीति का सबसे बड़ा ढांचागत बदलाव भी बरकरार रखा गया है. 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और N1 श्रेणी के हल्के मालवाहक वाहनों का ही नया रजिस्ट्रेशन होगा.

1 अप्रैल 2028 से यही नियम सभी नए दोपहिया वाहनों पर भी लागू होगा. पहले से रजिस्टर्ड वाहनों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. नए नियम दिखाते हैं कि 2020 में शुरू होने के बाद से दिल्ली की EV नीति में कितना बदलाव आया है. पहले की नीति मुख्य रूप से खरीद प्रोत्साहन, रोड टैक्स में छूट और चार्जिंग स्टेशन बनाने पर आधारित थी ताकि EV को बढ़ावा दिया जा सके.

2026 की नीति इन प्रोत्साहनों को जारी रखते हुए नई शर्तें जोड़ती है, पात्रता को सीमित करती है और अब बदलाव लाने के लिए रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों पर भी ज्यादा जोर देती है. दो दशक पहले दिल्ली में हुए CNG बदलाव से इसकी पूरी तुलना नहीं की जा सकती लेकिन उससे कुछ सीख जरूर मिलती है.

CNG वाहनों की ओर बदलाव सुप्रीम कोर्ट के एम.सी. मेहता बेंच के जरिए वायु प्रदूषण मामले में दिए गए आदेशों के बाद शुरू हुआ था. दिल्ली के बाद देश के अलग-अलग सरकारों ने इसे लागू किया था. नई EV नीति को दिल्ली सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए अधिसूचित किया है.

साथ ही अधिसूचना में EV नीति की समीक्षा और संशोधन की जरूरत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट की एम.सी. मेहता मामले में की गई टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया है. इसकी प्रक्रिया भी पहले जैसी ही है. रजिस्ट्रेशन से जुड़े शुरुआती नियम निजी कारों पर लागू नहीं होंगे. इसके बजाय उन वाहन श्रेणियों पर ध्यान दिया गया है, जिनका रोजाना ज्यादा इस्तेमाल होता है, जैसे थ्री-व्हीलर, हल्के मालवाहक वाहन और बाद में दोपहिया वाहन.

इस तरीके को अपनाने के लिए अधिसूचना में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के ताजा एनालिसिस रिपोर्ट का हवाला दिया गया है. इसके मुताबिक दिल्ली में सर्दियों के दौरान होने वाले वायु प्रदूषण का लगभग 23 फीसद हिस्सा वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन के कारण होता है जो प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है.

इसमें यह भी कहा गया है कि राजधानी में कुल वाहनों का करीब 67 फीसद हिस्सा दोपहिया वाहनों का है जबकि थ्री-व्हीलर और N1 मालवाहक वाहनों का रोजाना ज्यादा इस्तेमाल होता है. थ्री-व्हीलर और N1 मालवाहक वाहन शहरी प्रदूषण में अपेक्षाकृत ज्यादा योगदान देते हैं.

फिलहाल निजी कारों को इन अनिवार्य नियमों से बाहर रखा गया है. हालांकि नई नीति को लेकर जारी अधिसूचना में कहा गया है कि भविष्य में चारपहिया वाहनों के लिए भी इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के नियम लाए जाएंगे और कम दक्षता वाले प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन वाले वाहनों को हतोत्साहित करने का ढांचा तैयार किया जाएगा. इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई है.

वित्तीय प्रोत्साहन जारी रहेंगे लेकिन नीति के दौरान इनमें धीरे-धीरे कमी आएगी. इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर पहले वर्ष में बैटरी क्षमता के प्रति किलोवाट-घंटे पर 10,000 रुपए तक की खरीद प्रोत्साहन राशि मिलेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 30,000 रुपए होगी. दूसरे वर्ष में यह 6,600 रुपए प्रति किलोवाट-घंटा और तीसरे वर्ष में 3,300 रुपए प्रति किलोवाट-घंटा रह जाएगी. इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा और N1 मालवाहक वाहनों पर मिलने वाला प्रोत्साहन भी हर साल कम होगा.

सरकार ने इन प्रोत्साहनों का दायरा भी सीमित कर दिया है. पहले 30 लाख रुपए तक की कीमत वाले स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों को रोड टैक्स में छूट देने का प्रस्ताव था. अंतिम अधिसूचना में इसे हटा दिया गया है. अब यह छूट केवल पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित रहेगी. इससे साफ है कि दिल्ली ने स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों को संक्रमणकालीन तकनीक (ट्रांजिशनल टेक्नोलॉजी) के रूप में स्वीकार नहीं किया है. ट्रांजिशनल टेक्नोलॉजी उस तकनीक को कहते हैं जो एक पुरानी या मौजूदा प्रणाली से नई, उन्नत प्रणाली में बदलाव को आसान बनाती है.

अधिसूचना में नए EV खरीदने पर स्क्रैपेज प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया गया है. इसका मतलब यह हुआ कि पुराना वाहन किसी अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर पर जमा करने पर, आपको वाहन की रीसेल वैल्यू पर कई तरह की छूट मिलती है.

नई नीति के तहत BS-IV या उससे पुराने वाहन की जगह 30 लाख रुपए तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली निजी इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर 1 लाख रुपए मिलेंगे. वहीं, N1 मालवाहक वाहन के लिए 50,000 रुपए, इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा के लिए 25,000 रुपए, दोपहिया वाहन के लिए 10,000 रुपए और ग्रामीण सेवा वाहन के लिए 15,000 रुपए दिए जाएंगे. यह सब नीति में तय शर्तों के अनुसार होगा.

अंतिम अधिसूचना अप्रैल में जारी 11 पन्नों के मसौदे की तुलना में कहीं अधिक विस्तृत है. अब यह 18 पन्नों की हो गई है. इसमें यह तय करने के लिए मॉडल अप्रूवल कमेटी बनाई गई है कि कौन से EV मॉडल प्रोत्साहन के पात्र होंगे. साथ ही, सब्सिडी के लिए आवेदन करने की 30 दिन की समयसीमा, जांच के बाद 60 दिन में भुगतान, तीन साल की NOC रोक, चार्जिंग ढांचे के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश और नीति लागू करने के लिए व्यापक संस्थागत व्यवस्था भी शामिल की गई है.

रजिस्ट्रेशन की ये समय सीमाएं पहले इसी साल जारी मसौदा नीति में भी प्रस्तावित थीं. सरकार ने अंतिम अधिसूचना जारी करने से पहले नागरिकों, वाहन निर्माताओं, फ्लीट ऑपरेटरों और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे थे. परामर्श के दौरान उद्योग जगत ने चार्जिंग ढांचा, बैटरी रीसाइक्लिंग, वित्तपोषण और लागू करने की समयसीमा जैसे मुद्दे उठाए थे. हालांकि, मसौदे में प्रस्तावित मुख्य रजिस्ट्रेशन नियम लगभग वैसे ही रखे गए हैं.

अंतिम अधिसूचना में नीति को लागू करने पर मसौदे की तुलना में कहीं अधिक जोर दिया गया है. इसके तहत परिवहन विभाग में एक EV सेल, मॉडल अप्रूवल कमेटी, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड कमेटी और दिल्ली EV एपेक्स कमेटी बनाई जाएगी. सार्वजनिक चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग ढांचे की योजना और विस्तार के लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड को नोडल एजेंसी बनाया गया है.

यह नीति केवल निजी वाहन खरीदारों तक सीमित नहीं है. दिल्ली परिवहन निगम और परिवहन विभाग की ओर से खरीदी जाने वाली सभी नई बसें इलेक्ट्रिक होंगी. स्कूलों को भी अपने बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ानी होगी.

सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थाओं को तय श्रेणियों में EV खरीदने होंगे, जबकि फ्लीट एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं के लिए कुछ श्रेणियों में नए पेट्रोल और डीजल वाहनों को अपने बेड़े में शामिल करने पर रोक रहेगी.

मौजूदा वाहन मालिकों पर फिलहाल इसका कोई तत्काल असर नहीं होगा. सबसे पहले इसका असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो उन श्रेणियों में नए वाहन खरीदेंगे जिन पर रजिस्ट्रेशन संबंधी नियम लागू होंगे.

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