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एशियन गेम्स में भारत की किस्मत पलटते वक्त क्या सोच रही थीं देश की बेटियां?

एशियन गेम्स 2026 में भारत के 21 स्वर्ण पदकों में से 14 महिला खिलाड़ियों ने जीते. इन्हीं खिलाड़ियों में शामिल किरण पहल, प्राची चौधरी और नवनीत कौर ने ‘इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई’ में बताया कि इन यादगार जीतों के दौरान उनके मन में क्या चल रहा था

'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई' का सत्र
अपडेटेड 12 अक्टूबर , 2026

एशियन गेम्स-2026 में भारत का सफर दो हिस्सों में बंटा रहा. पहला हिस्सा निराशाजनक था. खिलाड़ियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और पदक भी बहुत कम मिले. लेकिन दूसरे हिस्से में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया और पदकों की झड़ी लगा दी. एक बार फिर महिला खिलाड़ियों ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली. उनके प्रदर्शन की बदौलत भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा.

स्वर्ण पदक जीतने वाली तीन खिलाड़ियों- महिला 4x400 मीटर रिले टीम की सदस्य किरण पहल और प्राची चौधरी तथा भारतीय महिला हॉकी टीम की उपकप्तान नवनीत कौर ने 9 अक्टूबर को ‘इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई’ में हिस्सा लिया. उन्होंने एक हफ्ते पहले मिली जीत के यादगार पलों को साझा किया.

एशियन गेम्स के अलग-अलग संस्करणों में अब तक सात स्वर्ण पदक जीत चुकी महिला 4x400 मीटर रिले टीम भारत की पसंदीदा स्पर्धाओं में से एक रही है. ऐसे में क्या जापान में पदक जीतने का दबाव था? किरण पहल ने कहा, "डर तो हमेशा रहता है. हमसे उम्मीद थी कि हमें स्वर्ण पदक जीतना है और स्टेडियम में राष्ट्रगान गूंजना चाहिए."

उन्होंने कहा, "शुरुआत में हमारी बढ़त बहुत ज्यादा नहीं थी लेकिन हम अच्छा कर रहे थे. हमें एक-दूसरे पर पूरा भरोसा है. जब विथ्या (रामराज) आखिरी चरण में दौड़ रही थीं तो ऐसा लग रहा था कि हम सब उनके साथ दौड़ रहे हैं. उस पल के बारे में सोचकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं."

इस रिले टीम की बनावट भारत की विविधता की भी मिसाल है. किरण पहल हरियाणा से हैं जबकि प्राची चौधरी उत्तर प्रदेश, पूवम्मा राजू मचेत्तिरा कर्नाटक और विथ्या रामराज तमिलनाडु से हैं.

जब प्राची चौधरी से पूछा गया कि भाषा और संस्कृति के अंतर को पीछे छोड़कर वे एक टीम के रूप में कैसे प्रतिस्पर्धा करती हैं तो उन्होंने बताया, "हम एक ही शिविर में अभ्यास करते हैं. जब हम ट्रैक पर उतरते हैं तो एकजुट होते हैं. हम किसी एक राज्य से नहीं भारत से हैं. (प्रतिस्पर्धा के दौरान) हम युद्ध के मैदान में होते हैं. हमें बाकी सभी को हराकर वहां अपना तिरंगा फहराना होता है."

एशियन गेम्स में इस चौकड़ी का प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स दल के लिए बड़ी राहत भी था. इसकी वजह यह थी कि टीम ने सुनिश्चित किया कि भारत को कम से कम एक स्वर्ण पदक जरूर मिले.

प्राची चौधरी के लिए यह जीत 2023 की निराशा के बाद खुद से किया गया वादा पूरा करने जैसी थी. उस साल हांगझोऊ एशियन गेम्स में भारतीय टीम को इसी स्पर्धा में रजत पदक मिला था. प्राची ने बताया, "मैंने अपने मन में ठान लिया था कि अगले गेम्स में स्वर्ण पदक लेकर आना है."

उनके वॉट्सऐप स्टेटस से भी उनका दृढ़ संकल्प झलकता है. इसमें लिखा है, "मैं तुरंत पदक नहीं जीतूंगी. लेकिन आखिरकार जीतकर रहूंगी."

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रदर्शन भी शानदार रहा. टीम ने ओलंपिक 2024 की रजत पदक विजेता और विश्व रैंकिंग में उससे ऊपर मौजूद चीन को हराया. इस जीत के साथ टीम ने स्वर्ण पदक जीता और 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक में जगह पक्की कर ली.

नवनीत कौर ने कहा, "हमने स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य रखा था, खासकर इसलिए क्योंकि हम पेरिस ओलंपिक (2024) के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाए थे." उन्होंने बताया कि टीम चीन का सामना करने के लिए अच्छी तरह तैयार थी. एक महीने पहले विश्व कप के मुकाबले में दोनों टीमें बराबरी पर रही थीं. नवनीत ने कहा, "हमने चीन के मैचों के वीडियो देखे थे. मीटिंग की थीं, जिनमें हमने अपने-अपने लक्ष्य साझा किए थे."

तैयारी का फायदा खास तौर पर फाइनल में मिला जब गोलकीपर सविता पूनिया ने पेनल्टी स्ट्रोक बचाया. यह मैच का निर्णायक मोड़ साबित हुआ और इससे टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ा. नवनीत ने बताया, "हमें पता था कि अब हम यह मैच जीत सकते हैं."

'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई' के सत्र 'इंडिया’स स्पोर्ट्स क्वीन ऑफ 2026' का समापन नवनीत की एक अहम अपील के साथ हुआ. उन्होंने महिला हॉकी लीग दोबारा शुरू करने की मांग की. इसके लिए प्रायोजकों को महिला खेलों पर भरोसा जताते हुए आर्थिक मदद देनी होगी.

नवनीत ने कहा, "लीग से युवा खिलाड़ियों को अनुभव मिलता है. उन्हें बड़े स्तर पर खेलने का मौका मिलता है और वहां होने वाली प्रतिस्पर्धा से भारतीय टीम को काफी फायदा होता है. इससे हमें और बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलेगी."

अहम बात

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने आगे बढ़कर नेतृत्व किया. भारत ने जो 21 स्वर्ण पदक जीते, उनमें से 14 महिला खिलाड़ियों के नाम रहे. प्राची चौधरी ने इसे 'नारी शक्ति' की सटीक मिसाल बताया.

सत्र की खास बातें

प्राची चौधरी:

  • "लड़कों को छूट मिलती है. उन्हें घर के काम नहीं करने पड़ते. अगर वे काम नहीं करते, तो उन्हें डांट भी नहीं पड़ती. अगर लड़कियों को भी इतनी आजादी और सहयोग मिले, तो ज्यादा लड़कियां आगे आकर अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं. मैं मांओं से कहूंगी कि वे अपनी बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें, ताकि वे मजबूत बन सकें."

किरण पहल:

  • "मेरे माता-पिता मुझे अभ्यास करने की अनुमति नहीं देते थे. मैंने उनसे कहा कि अगर मुझे खेलने नहीं दिया गया, तो मैं न पढ़ाई करूंगी और न खाना खाऊंगी."

नवनीत कौर: 

  • "जब हम भारतीय जर्सी पहनते हैं, तो हमारे भीतर तुरंत ताकत आ जाती है. मन में पहले से यही रहता है कि आज हमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है."
  • "महिला खिलाड़ियों के लिए अच्छा माहौल है. अगर हमें सुरक्षित महसूस नहीं होता या कोई समस्या होती है, तो हम खुलकर बात कर सकते हैं और अपनी शिकायत उठा सकते हैं."
     
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