
तेजी से बदलते कामकाजी माहौल में कंपनियां बाजार में अपनी हिस्सेदारी और प्रतिस्पर्धी बढ़त बनाए रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश कर रही हैं. लेकिन इसकी कीमत कर्मचारियों को चुकानी पड़ रही है. कंपनियों के कुल खर्च में कर्मचारियों पर होने वाला खर्च लगातार दबाव में आ रहा है.
ऐसा इसलिए है क्योंकि तकनीक और कर्मचारियों पर होने वाला खर्च एक ही बजट से आता है. रैंडस्टैड डिजिटल इंडिया के प्रबंध निदेशक मिलिंद शाह कहते हैं कि इस वजह से एम्प्लॉयर सैलरी को अब एक समान खर्च की तरह नहीं, बल्कि रणनीतिक निवेश की तरह देख रहे हैं.
नतीजतन, इन्क्रीमेंट और रिवॉर्ड देने के तरीके में बदलाव हो रहा है. कंपनियां कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के बजाय ऐसे खास स्किल वाले लोगों को नियुक्त करने पर ध्यान दे रही हैं जिनकी मदद से उत्पादकता बढ़े और AI से कारोबार को असल फायदा मिल सके.
टीमलीज डिजिटल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नीति शर्मा के मुताबिक, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, टेस्टिंग और L1 सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता पहले ही 20-25 फीसदी बढ़ चुकी है. ऐसे में कंपनियों को ऐसे लोगों की जरूरत है जो AI को लागू कर सकें, उसे कारोबारी प्रक्रियाओं से जोड़ सकें और उसके नतीजों को संभाल सकें.
शर्मा कहती हैं, "इसलिए कंपनियां अब वर्कफोर्स प्लानिंग करते समय इस बात पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं कि नियुक्त किए गए लोगों के पास सही स्किल हो और वे ज्यादा से ज्यादा उत्पादकता दे सकते हों." एप्लाइड AI, जेनरेटिव AI (GenAI), मशीन लर्निंग ऑपरेशंस और AI ऑर्केस्ट्रेशन जैसे कौशल की मांग तेजी से बढ़ रही है. एप्लाइड AI से जुड़ी भूमिकाओं में सैलरी सालाना 16 लाख से 35 लाख रुपए तक हो सकता है. यह पद और अनुभव पर निर्भर करता है.

CIEL के एक अध्ययन में भी पाया गया कि सितंबर 2026 में AI और मशीन लर्निंग से जुड़ी पोस्टों में सालाना आधार पर 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं, इसी जॉब मार्केट इंडेक्स में सभी व्हाइट-कॉलर नौकरियों में यह बढ़ोतरी सिर्फ 6 फीसदी रही.
CIEL में HR के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO आदित्य नारायण मिश्रा कहते हैं, "कंपनियां अब कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के मामले में ज्यादा चुनिंदा रुख अपना रही हैं. वे दोहराए जाने वाले कामों से जुड़े पद कम कर रही हैं जबकि प्रोडक्ट इंजीनियरिंग, AI गवर्नेंस, डेटा क्वालिटी और ग्राहकों के लिए तकनीक लागू करने वाली टीमों का विस्तार कर रही हैं."
चुनिंदा कर्मचारियों को फायदा
मामला सिर्फ नई भर्तियां घटाने तक सीमित नहीं है. कंपनियां सैलरी बढ़ोतरी के बजट का बंटवारा भी सोच-समझकर कर रही हैं. मिश्रा के मुताबिक अगले सैलरी रिव्यू साइकल में कंपनियां अलग-अलग कर्मचारियों के परफॉर्मेंस और स्किल के आधार पर बढ़ोतरी को प्राथमिकता दे रही हैं.
वे कहते हैं, "इंजीनियरिंग, डेटा, सिक्योरिटी और AI को लागू करने की क्षमता रखने वाले अहम कर्मचारियों को ज्यादा इन्क्रीमेंट दिया जाएगा. वहीं, जिन स्किल का विकल्प आसानी से मिल सकता है, उनसे जुड़े कर्मचारियों के सैलरी में सीमित बढ़ोतरी होगी."
कंपनियां अब सभी विभागों के कर्मचारियों को एक समान प्रतिशत से सैलरी बढ़ोतरी देने के बजाय यह देख रही हैं कि किसी कर्मचारी की भूमिका कारोबार में कितनी वैल्यू जोड़ती है और उसके नौकरी छोड़ने की कितनी आशंका है. भारत में 2026 में औसत सैलरी बढ़ोतरी करीब 9 फीसदी रही.
शाह कहते हैं, "इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि अब अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियां AI के शुरुआती प्रयोग से आगे बढ़कर इसे बड़े पैमाने पर लागू कर रही हैं. इस मांग के मुकाबले अनुभवी विशेषज्ञों की उपलब्धता बहुत कम है. इसलिए कंपनियां AI इंजीनियरिंग, डेटा, गवर्नेंस और सुरक्षा से जुड़े पदों का विस्तार कर रही हैं. साथ ही, इन कामों को सहयोग देने वाली दूसरी क्षमताओं पर भी ज्यादा सोच-समझकर खर्च कर रही हैं. बड़े पैमाने पर भर्ती का दौर खत्म हो चुका है. अब कंपनियों का जोर ऐसे कर्मचारियों पर है, जिनके कौशल से काम के नतीजों में सीधा सुधार हो."
हालांकि, शर्मा का कहना है कि कंपनियों के पास नए कर्मचारियों की भर्ती के अलावा मौजूदा कर्मचारियों को नई स्किल सिखाने का भी विकल्प है. वे कहती हैं, "जो कंपनियां AI को अपनाने के साथ कर्मचारियों के स्किल को बेहतर बनाने की सही रणनीति अपनाएंगी, उनके आगे बढ़ने की संभावना ज्यादा होगी."
AI विशेषज्ञों की मांग बढ़ी
AI को अपनाने से कंपनियों में कर्मचारियों की मांग और जरूरी कौशल, दोनों बदल रहे हैं. इसका असर खास तौर पर भारत के टेक्नोलॉजी और IT सर्विसेज क्षेत्र में दिख रहा है. यहां कुशल तकनीकी पेशेवरों की कमी पहले से ही एक बड़ी चुनौती है.
एक्सपेरिस टेक टैलेंट आउटलुक रिपोर्ट की चौथी तिमाही 2026 के मुताबिक, भारत के टेक्नोलॉजी और IT सर्विसेज क्षेत्र में 84 फीसदी एम्प्लॉयर को अपनी जरूरत के मुताबिक स्किल्ड कर्मचारी ढूंढने में मुश्किल हो रही है. AI मॉडलिंग और एप्लिकेशन डेवलपमेंट (52 फीसदी) के साथ AI की समझ (49 फीसदी) सबसे ज्यादा मांग वाले तकनीकी कौशल हैं. इससे पता चलता है कि कंपनियों में AI से जुड़ी क्षमताओं का महत्व लगातार बढ़ रहा है.
तकनीकी विशेषज्ञता के साथ कंपनियां संवाद, मिलकर काम करने, आलोचनात्मक सोच और बदलती परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढालने जैसे मानवीय कौशलों को भी महत्व दे रही हैं. एक्सपेरिस इंडिया के अध्यक्ष संजू बल्लूरकर कहते हैं, "AI के कारण नौकरियों की भूमिकाएं और जरूरी स्किल बदल रही हैं. ऐसे में वे प्रोफेशनल बेहतर स्थिति में होंगे जिनके पास AI की क्षमता के साथ मजबूत मानवीय स्किल भी होंगी. वे नए विचारों को बढ़ावा देने, उत्पादकता बढ़ाने और कारोबारी लक्ष्य हासिल करने में ज्यादा मदद कर सकेंगे."
हालांकि शाह चेतावनी देते हैं कि जो कंपनियां सैलरी बढ़ोतरी को सिर्फ एक खर्च मानेंगी, उन्हें लंबे समय में अपने बेहतरीन कर्मचारी गंवाने पड़ सकते हैं. रैंडस्टैड के वर्कमॉनिटर 2026 के अध्ययन से भी पता चलता है कि सैलरी बढ़ोतरी को रणनीतिक नजरिए से देखना क्यों जरूरी है. अच्छा सैलरी कर्मचारियों को किसी कंपनी की ओर आकर्षित करता है लेकिन वे वहां तभी टिकते हैं, जब उन्हें काम का अच्छा माहौल, आगे बढ़ने के मौके और अपने काम में सार्थकता भी मिले.

