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डार्क मोड

AI के दौर में कैसे बदलेगी भारतीय कंपनियों के मैनेजरों की भूमिका?

एजेंटिक AI के बढ़ते इस्तेमाल से मैनेजरों की भूमिका निगरानी से आगे बढ़कर रणनीतिक फैसलों और इंसान-AI तालमेल पर केंद्रित होगी जबकि मिडिल मैनेजमेंट की कई भूमिकाएं कम हो सकती हैं

AI की वजह से भारत में 2030 तक करीब एक करोड़ नौकरियों की भूमिकाएं बदल जाएंगी (सांकेतिक तस्वीर)
अपडेटेड 25 अगस्त , 2026

भारतीय कंपनियों में मैनेजरों की एक बड़ी मध्य-स्तरीय परत हमेशा से रही है. इसकी वजह यह है कि यहां कामकाज का ढांचा निगरानी, रिपोर्टिंग, समस्याओं को ऊपर तक पहुंचाने और आपसी तालमेल पर आधारित रहा है. 

इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि लोग साथ मिलकर बेहतर तरीके से काम करें और लक्ष्य हासिल कर सकें. अब इसमें AI एजेंट भी शामिल हो गए हैं.

टैलेंट सॉल्यूशंस कंपनी सीआईईएल-एचआर के प्रबंध निदेशक और सीईओ आदित्य नारायण मिश्रा के मुताबिक, अब मैनेजर तेजी से ऐसी टीमों का नेतृत्व करेंगे, जिनमें इंसान और AI साथ मिलकर काम करेंगे. 

मिश्रा कहते हैं कि उनकी भूमिका सिर्फ रोजमर्रा के काम की निगरानी करने तक सीमित नहीं रहेगी. उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि AI का जिम्मेदारी से इस्तेमाल हो, रणनीतिक फैसले लिए जाएं और इंसान और AI के साथ मिलकर काम करने से बेहतर नतीजे हासिल हों.

हालांकि, यह बदलाव धीरे-धीरे होगा. मौजूदा भूमिकाओं में काम कर रहे मैनेजर कुछ और समय तक बने रहेंगे, जब तक कंपनियां AI को लागू करने के एक-दो चरण पूरे नहीं कर लेतीं. 

विशेषज्ञ स्टाफिंग कंपनी एक्सफेनो के सीईओ फ्रांसिस पाडामादन के मुताबिक, समय के साथ नई तकनीकी-व्यावसायिक भूमिकाएं सामने आएंगी. ये भूमिकाएं कारोबारी जरूरतों और तकनीकी समाधानों के बीच पुल का काम करेंगी. पाडामादन कहते हैं, "इनकी मुख्य जिम्मेदारी सिर्फ लोगों को मैनेज करना नहीं रह जाएगी. उन्हें AI से जुड़े कामों और ऐसे वर्कफ्लो को भी संचालित करना होगा, जिसमें इंसान की भूमिका बनी रहती है."

कंपनियों में AI की समझ रखने वाले मैनेजरों की मांग बढ़ेगी
कंपनियों में AI की समझ रखने वाले मैनेजरों की मांग बढ़ेगी

इसका एक असर यह भी होगा कि निकट भविष्य में मिड-लेवल प्रोजेक्ट मैनेजरों और डिलीवरी लीड की संख्या कम होगी. खासकर उन भूमिकाओं में, जिनमें तालमेल से जुड़े काम ज्यादा होते हैं. ऐसा इसलिए होगा क्योंकि AI शुरुआती और निचले-मध्य स्तर पर होने वाले कई दोहराव वाले कामों को अपने हाथ में ले लेगा.

जो लोग इस बदलाव के साथ खुद को ढाल पाएंगे, उनके लिए रोजगार के अवसर काफी बेहतर होंगे. टैलेंट कंपनी रैंडस्टैड में प्रोफेशनल टैलेंट सॉल्यूशंस के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी शिव नाथ घोष के मुताबिक, AI की समझ रखने वाले मैनेजरों की मांग बढ़ेगी.

इसकी वजह यह है कि उनके क्षेत्र से जुड़ा ज्ञान, कारोबारी समझ, स्टेक होल्डर्स को समझने की क्षमता और जवाबदेही ऐसी चीजें हैं, जिन्हें AI दोहरा नहीं सकता.

ऐसा इसलिए होगा क्योंकि धीरे-धीरे AI सिर्फ इंसान के काम में मदद करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खुद भी ज्यादा से ज्यादा काम करने लगेगा. 

इससे इंसान की उत्पादकता बढ़ेगी और वह बेहतर तरीके से काम कर सकेगा. कॉग्निजेंट के मुख्य लर्निंग अधिकारी थिरुमाला (थिरु) आरोही कहते हैं, "इससे मैनेजर और सीधे काम करने वाले कर्मचारियों के बीच का फर्क धीरे-धीरे कम होगा और मैनेजर भी काम में सीधे योगदान देने लगेंगे."

टेक महिंद्रा के मुख्य पीपल अधिकारी रिचर्ड लोबो के मुताबिक, इसकी एक बड़ी वजह यह है कि AI को लागू करने की भी लागत आती है. इसलिए यह सुनिश्चित करना मैनेजरों की अहम जिम्मेदारी होगी कि AI का इस्तेमाल सही जगह पर हो. AI का इस्तेमाल वहां होना चाहिए, जहां उससे काम की क्षमता बढ़ती है, लेकिन वहां नहीं जहां उसका कोई फायदा नहीं है. इस बारे में फैसला नए मैनेजर की जिम्मेदारी होगी. 

लोबो कहते हैं, "मैनेजर की असली भूमिका यही होगी कि मेरी टीम के कितने लोगों को AI का इस्तेमाल करना चाहिए, कितने लोगों को अपनी मानवीय क्षमताओं का इस्तेमाल करते रहना चाहिए और इन दोनों का इस्तेमाल करके मैं अपनी टीम को कितनी कुशलता से चला सकता हूं."

इसके चलते कंपनियों को अपने टैलेंट पिरामिड में बदलाव करना होगा. आरोही के मुताबिक, कॉग्निजेंट में मिडिल मैनेजरों को नई क्षमताएं सिखाई जा रही हैं, ताकि वे सिर्फ निगरानी करने वाली भूमिका से आगे बढ़कर ऐसे मैनेजर बन सकें, जो खुद काम भी करें और टीम का नेतृत्व भी करें. 

आरोही कहते हैं, "प्लेयर-कोच कोई नया पद नहीं है बल्कि काम करने का नया तरीका है. मैनेजर खुद भी काम में सक्रिय रहता है, AI की मदद से चलने वाले कामों को संभालता है और साथ ही अपनी टीम की क्षमताओं को विकसित करता है."

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस ने पहले ही अपने सभी कर्मचारियों को AI के साथ काम करने की ट्रेनिंग देने की योजना का ऐलान किया है. सर्विस नाउ की AI स्किल्स रिसर्च 2025 के मुताबिक, एजेंटिक AI  की अगुवाई में भारत में 2030 तक सबसे बड़ा वर्कफोर्स बदलाव देखने को मिलेगा और 1.035 करोड़ नौकरियों की भूमिकाएं बदल जाएंगी.

एजेंटिक AI को आसान भाषा में समझें तो यह ऐसा AI है जो सिर्फ आपके सवाल का जवाब नहीं देता, बल्कि किसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए खुद कई कदम उठाकर काम कर सकता है.

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