कंटीले तार, सड़क पर कील, आंसू गैस... तस्वीरों में देखें कि किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने क्या-क्या किया

MSP की गारंटी के लिए कानून समेत अपनी कई मांगों को लेकर किसान एक बार फिर सड़कों पर हैं. 13 फरवरी को 'दिल्ली चलो' के नारे के साथ सैकड़ो किसान संगठनों ने पंजाब से दिल्ली की तरफ कूच कर दिया. दिनभर जमकर कोहराम हुआ. पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए हरियाणा-पंजाब शंभू बॉर्डर पर कड़ी व्यवस्था की थी, लिहाजा यहीं किसान और पुलिस आमने-सामने आ गए.

पुलिस ने ड्रोन से आंसू गैस के गोले छोड़े तो दूसरी तरफ से किसानों ने भी पत्थर बरसाए. इस बीच एक पुल भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया. किसानों ने जबरदस्ती बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की. इसपर पुलिस भी सख्ती के मूड में नजर आई.

सोमवार, 12 फरवरी की देर रात किसान नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हई थी लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया. हालांकि, सरकार का कहना है कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन गई है और एक समिति बनाकर बाकी मुद्दों को हल करने का फॉर्मूला प्रस्तावित किया गया है.

अपनी मांगों को लेकर दिल्ली कूच करने का किसानों का कार्यक्रम पहले से तय था. इसे देखते हुए पुलिस ने भी अपनी तरफ से तैयारियां पूरी की हुई थीं. यहां तक कि सड़कों पर कील बिछा दी गईं और बॉर्ड्र पर कंटीले तार लगा दिए गए, ताकि कोई दिल्ली में घुसने की कोशिश न करे. इसके अलावा वॉटर कैनन से लेकर आंसू गैस के गोले तक, पुलिस अपने साजो सामान के साथ तैयार दिखी. बॉर्डर पर पुलिस के जवान भी भारी संख्या में मौजूद हैं.

किसानों की मांग है कि सरकार कानून बनाकर उन्हें MSP की गारंटी दे और लखीमपुर खीरी की घटना (जिसमें केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे पर आरोप हैं कि उन्होंने किसानों पर जीप चढ़ा दी थी) में कार्रवाई हो.

इसके अलावा किसानों की मांगों में पूरी कर्ज माफी, राष्ट्रीय स्तर पर भूमि अधिग्रहण कानून 2013 को बहाल करने, कलेक्टर रेट से चार गुना ज्यादा मुआवजा देने, पिछले आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा और नौकरी देने, विद्युत संशोधन विधेयक 2020 को रद्द करने और मनरेगा का भुगतान बढ़ाने जैसे मुद्दे शामिल हैं.