कश्मीर को लेकर पिछले हफ्तों में चीन ने बड़ी-बड़ी नैतिक बातें कहीं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चिंता जताई. विडंबना कि चीन जब कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के साथ साझा मकसद साधने में जुटा था, उन्हीं दिनों वह एक प्रत्यर्पण विधेयक के जरिए हांगकांग को अपने आधिपत्य के आगे घुटने टेकने को मजबूर करने की कोशिश और एक अंतरराष्ट्रीय समझौते का उल्लंघन कर रहा था.
1984 के चीनी-ब्रिटिश घोषणापत्र के अंतरराष्ट्रीय समझौते पर चीन और ब्रिटेन ने दस्तखत किए थे. इसके जरिए हांगकांग की संप्रभुता 1997 से बीजिंग को सौंप दी गई थी. पर इसके साथ ये चेतावनियां भी जुड़ी थीं कि 'एक देश, दो प्रणालियों' के सिद्धांत का पालन होगा और हांगकांग की पूंजीवादी व्यवस्था 50 साल यानी 2047 तक कायम रखी जाएगी. अब चीन 30 साल पहले इस बंदरगाह शहर पर पूरा कब्जा करने की कोशिश में है. पर हांगकांग भी जोरदार प्रतिरोध कर रहा है.
हांगकांग की सड़कों पर 10 अगस्त को संगीत प्रधान फिल्म लेस मिजरेबल्स के एक मशहूर गाने के बोल गूंज रहे थे, ''डू यू हियर दि पीपल सिंग? सिंगिंग दि सॉन्ग ऑफ ऐंग्री मेन?'' इसे गाते हुए करीब 20 लाख लोग प्रदर्शन कर रहे थे. बारिश भी उन्हें डिगा नहीं सकी. वे एक प्रत्यर्पण विधेयक लाने के प्रशासन के प्रस्ताव का विरोध कर रहे थे, जो चीन में वांछित लोगों के प्रत्यर्पण की इजाजत दे देगा. लोगों को डर है कि यह विधेयक हांगकांग को चीन के अधिकार क्षेत्र में ले आएगा, जिससे उसकी स्वायत्तता और नागरिक अधिकार कमजोर होंगे. उन्होंने हांगकांग के चीफ एक्जीक्यूटिव कैरी लैम के इस्तीफे की भी मांग की.
प्रदर्शनों के बाद 15 जून को लैम ने ऐलान किया कि विधेयक को टाल दिया गया है. हांगकांग के लोग इसे पूरी तरह वापस लेने से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं. वे यह भी मांग कर रहे हैं कि 12 जून के विरोध-प्रदर्शनों को 'दंगा' कहना वापस लें, गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को बिना शर्त रिहा करें, पुलिस के बर्ताव की जांच के लिए स्वतंत्र आयोग बनाएं और सार्वभौम मताधिकार दें.
हांगकांग में 2014 में भी ऐसे ही नजारे थे. उस वक्त सार्वभौम मताधिकार की मांग पर असर डालने वाले चुनाव सुधारों के खिलाफ 'छाता आंदोलन' हुआ था. उसको कुचल दिया गया और फैसले को बदला नहीं जा सका था. इस साल भी मॉनसून का मौसम होने की वजह से एक बार फिर छाते लोगों के प्रतिरोध का प्रतीक बन गए हैं. फिलहाल चीन ऊहापोह में है. प्रोपगेंडा की लड़ाई का पहला दौर वह हार चुका है. अपुष्ट खबरों के मुताबिक, 700 से ज्यादा प्रदर्शनकारी गिरफ्तार या हिरासत में हैं. पर प्रशासन आंदोलन के किसी नेता की शिनाख्त नहीं कर पाया है.
दुनिया इसे उत्सुकता से देख रही है, वहीं चीन के सामने कई चुनौतियां हैं. पीपल्स लिबरेशन आर्मी हांगकांग की सरहद पर तैयार खड़ी है पर अभी दाखिल नहीं हुई है. बीजिंग को पता है कि हांगकांग में सेना भेजने को दुनिया में किस तरह लिया जाएगा, वह भी तब जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग संयुक्त राष्ट्र आम सभा में भाग लेने सितंबर में न्यूयॉर्क जाने वाले हैं. चीन अपनी बेल्ट ऐंड रोड पहल के जरिए खुद को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के स्तंभ के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है, जो इस कदम से उलटा पड़ जाएगा.
जनवादी गणराज्य चीन की स्थापना की 70वीं सालगिरह 1 अक्तूबर को पड़ रही है. तब तक किसी कार्रवाई की संभावना नहीं है क्योंकि जश्न का माहौल कहीं खराब न हो जाए.
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