सुर्खियों के पार
किरण डी. तारे/ अनुवादः मनीष दीक्षित
अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक गोवा के सभी सात कोविड मरीज ठीक हो गए थे और कोई नया मरीज सामने नहीं आया था. लगने लगा था कि राज्य तेजी से सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहा है. आयुर्वेदिक डॉक्टर और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने 30 अप्रैल को ऐलान किया कि गोवा कोविड से पूरी तरह उबर गया है और राज्य ग्रीन जोन में है. उन्होंने दुकानें और प्रतिष्ठान खोलने की अनुमति देने के साथ महीने के अंत तक उद्योगों को खोलने की बात कही.
लेकिन 13 मई जब निजामुद्दीन-मडगांव राजधानी एक्सप्रेस राज्य में पहुंची तो सब कुछ बदल गया. इसके सात मुसाफिर कोरोना वायरस के संदिग्ध निकले. ये यात्री दिल्ली औऱ मुंबई से वहां पहुचे थे जिनकी वजह से राज्य में घबराहट फैल गई.
और ट्रेनों के राज्य में पहुंचने के साथ ही यहां कोविड मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी.
24 मई तक 50 लोगों के जांच में पॉजिटिव निकलने से राज्य में अफरातफरी मच गई. मरीजों में 90 प्रतिशत गोवा के वे प्रवासी थे जो दिल्ली, मुंबई, पुणे और कोलकाता से लौटे थे और इस तरह राज्य के कुल मरीजों की संख्या 66 पहुंच गई. हालांकि 24 मई तक 16 मरीज ठीक हो चुके थे और संक्रमितों की संख्या 50 थी.
केंद्र सरकार का देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों के लिए विशेष ट्रेनें चलाने का फैसला गोवा पर उल्टा पड़ गया.
21 मई तक राज्य में 597 लोगों के नमूने जांच के लिए भेजे गए और इनमें 52 लोगों की रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है जबकि 322 यात्री मडगांव में सामुदायिक क्वारंटीन सेंटर में भर्ती हैं जबकि 286 को घरों में क्वारंटीन किया गया है. पांच संदिग्धों को गोवा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (जीएमसीएच) के कोविड वार्ड में आइसोलेट किया गया है.
गोवा सरकार ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर)की रैपिड टेस्ट की सलाह को खारिज कर दिया है. इसकी जगह आइसीएमआर से ही स्वीकृत बीटा सीओवी टेस्ट किया जा रहा है.
सरकार मडगांव स्टेशन पर पर हर यात्री से इस टेस्ट के लिए 2,000 रुपए वसूल रही है. यात्रियों को जांच नतीजों का इंतजार करना पड़ता है जो कि आमतौर पर 24 घंटे में आते हैं. इसलिए उन्हें स्टेशन के पास स्थित होटलों में रुकना पड़ता है.
अगर पॉजिटिव निकले तो जीएमसीएच में भर्ती कराए जाते हैं यात्री जबकि बाकी को संस्थागत या घरेलू क्वारंटीन में रखा जाता है. मुंबई के मीरा रोड निवासी जेम्स डिसूजा मडगांव में अपने बुजुर्ग माता-पिता की देररेख करने के लिए पनवेल से राजधानी एक्सप्रेस से 18 मई को राजधानी एक्सप्रेस में चढ़े. उन्होंने इंडिया टुडे को बताया कि मुझे सिर्फ जांच की रकम की रसीद दी गई. रिपोर्ट नेगेटिव आने के कारण अधिकारियों ने मुझे होम क्वारंटीन में रहने को कहा लेकिन जांच रिपोर्ट मुझे नहीं दी.
राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, उनके हाथ में अमिट स्याही से क्वारंटीन में रहने वाला निशान जांच के पहले लगाया गया न किया जांच के बाद. वे बताते हैं, “पसीने के कारण स्याही उनकी त्वचा से मिट गई. अब अगर कोई मुझसे ये पूछे कि मेरे पास कोरोना नेगेटिव होने का क्या सुबूत है तो मैं उसे रसीद के अलावा कुछ नहीं दिखा पाऊंगा.”
सरकार को इस बात का भरोसा है कि जिन लोगों को रेलवे स्टेशन से बाहर जाने दिया गया है वे जांच में नेगेटिव पाए गए हैं और जो पॉजिटिव हैं उन्हें जीएमसीएच में भर्ती करा दिया गया है.
स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे कहते हैं कि यहां अभी तक कम्युनिटी ट्रांसमिशन (सामुदायिक संक्रमण) नहीं फैला है लेकिन सरकार चिंतित है और महसूस कर रही है कि अचानक ही हालात बदतर न हो जाएं. सरकार ने रेल मंत्रालय से कहा है कि किसी भी ट्रेन को राज्य में रोका न जाए. मडगांव राजधानी की सेवाएं भी फिलहाल निरस्त कर दी गई हैं.
सावंत ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार की अनुमति के बावजूद महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच अंतरराज्यीय बस सेवा शुरू नहीं की जाएगी. गोवा सरकार अपनी प्रतिष्ठा कायम रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है. राणे और केरल की स्वास्थ्य मंत्री के.के. शैलजा के बीच हाल में वाक् युद्ध हुआ था जिसमें शैलजा ने गलती से कह दिया था कि 19 मई को केरल में में जिस मरीज की जान गई वह गोवा से यात्रा करके आया था.
इस पर राणे ने ट्विटर पर अपने राज्य का बचाव करते हुए कहा, “ऐसे वक्त में जब पूरी दुनिया एकजुट होकर खड़ी है और हर राज्य अपनी पूरी ताकत से लड़ रहा है, मेरी श्रीमती के.के. शैलजा जी से गुजारिश है वि वे ऐसे गलत बयान न दें जिनसे राज्य की छवि पर किसी भी तरह का असर पड़ता है. महामारी से जंग में हम सब एक हैं और मौजूदा हालात में ऐसा कोई भ्रामक बयान नहीं दिया जाना चाहिए जिससे लोगों में बेचैनी फैले. ” उनके ट्वीट के बाद शैलजा ने सफाई दी कि वह मरीज केंद्र शासित क्षेत्र पुडुचेरी के माहे का रहने वाला था जो कि उत्तरी केरल में है. उन्होंने गलती से इसे गोवा समझ लिया था.
करीब 12,000 गोवा के लोग विभिन्न देशों में फंसे हुए हैं.
20 मई को गोवा के 416 नाविक तीन उड़ानों से देश लाए गए. इन लोगों को 14 दिन के सशुल्क क्वारंटीन में होटलों में रखा गया है. उधर नाविकों के परिजनों ने बांबे हाईकोर्ट की पणजी पीठ में अर्जी लगाकर क्वारंटीन का वक्त घटाने की मांग की लेकिन राज्य के महाधिवक्ता देवीदास पंगम ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी मांग पूरी नहीं की जा सकती क्योंकि यह न केवल नाविकों, उनके परिजनों बल्कि व्यापक जनहित में होगा कि नाविक तय वक्त के लिए क्वारंटीन में रहें.
करीब 1,50,000 प्रवासी मजदूर, जो गोवा की आबादी का 10 फीसदी हैं और राज्य सरकार के साथ पंजीकृत हैं, अब अपने मूल राज्य को लौट गए हैं. अब तक करीब 50,000 मजदूर श्रमिक एक्सप्रेस से लौट चुके हैं.
इस बीच राज्य सरकार ने सीनियर सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी परीक्षाओं की अपनी योजना पर अमल का फैसला किया है. ये परीक्षाएं 21 मई से हो रही हैं.
कांग्रेस के छात्र विंग, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया ने इस फैसले का विरोध किया था लेकि बाद में हाईकोर्ट की हरी झंडी मिलने के बाद अपना विरोध वापस ले लिया.
सरकार ने कहा था कि सुरक्षा के सभी इंतजाम किए जाएंगे और कंटेनमेंट जोन में कोई परीक्षा केंद्र नहीं होगा. सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य होगा. परीक्षा केंद्रों पर सेनिटाइजर्स और थर्मल स्क्रीनिंग अनिवार्य होगी. करीब 33,000 विद्यार्थी परीक्षाओं में भाग ले रहे हैं. सावंत को उम्मीद है कि गोवा कोविड से जल्द ही उबर जाएगा. उन्होंने 23 मई को ऐलान किया कि 31 मई को लॉकडाउन का चौथा चरण खत्म होने के बाद गोवा में पर्यटन का सीजन फिर शुरू होगा.
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