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बाजार को रास नहीं आया सरकार का राहत पैकेज

कोविड-19 के असर से अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए दिया गया राहत पैकेज भारतीय शेयर बाजार को रास नहीं आया. बुधवार की घोषणा के बाद गुरुवार को बाजार की चाल इसकी ताकीद करता है.

फोटोः इंडिया टुडे
फोटोः इंडिया टुडे
अपडेटेड 14 मई , 2020

कोविड-19 के असर से अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए दिया गया राहत पैकेज भारतीय शेयर बाजार को रास नहीं आया. बुधवार की घोषणा के बाद गुरुवार को बाजार की चाल इसकी ताकीद करता है. बाजार विशेषज्ञ कहते हैं पैकेज की राशि 20 लाख करोड़ निश्चित तौर पर प्रभावित करने वाली है. लेकिन यह जिस तरह दी जा रही शायद वह बाजार की अपेक्षाओं से कम हैं.

बुधवार को पहले चरण की घोषणाओं के बाद केडिया कमोडिटीज के प्रमुख अजय केडिया कहते हैं, ''सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने वाली राहतें चलते हुई अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ा सकती है, लेकिन बंद पड़ी अर्थव्यवस्था को शुरू करने के लिए जो राहतें चाहिए वो इसमें नहीं हैं.''

दरअसल सरकार की ओर से जिन राहतों की घोषणा की गई है उनमें ज्यादातर कर्ज से जुड़ी हैं. मसलन, छोटे मझौले उद्योगों के लिए 3 लाख करोड़ का कर्ज, पावर कंपनियों के लिए 90 हजार करोड़ का नया कर्ज, कमजोर एनबीएफसी के बॉण्ड के लिए पैसे की व्यवस्था आदि. इस पूरे राहत पैकेज के पीछे सरकार की मंशा दूसरे संस्थानों से कर्ज दिलवाने की है. इसका बजट पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा और न ही राजकोषीय घाटे पर इसका कोई बोझ आएगा.

केडिया आगे कहते हैं, ''बीस लाख करोड़ की घोषणा के बाद रुपए में कुछ मजबूती देखने को मिली थी. लेकिन जैसे ही इसकी पहली किस्त सामने आई रुपए में कमजोरी वापस लौटी. जून के अंत तक रुपया फिर से 77 के स्तर को छू सकता है.''

एस्कॉर्ट्स सिक्योरिटीज के हेड (रिसर्च) आसिफ इकबाल कहते हैं, ''20 लाख करोड़ के राहत पैकेज को सुनने के बाद बाजार में खरीदारी लौटी, लेकिन जैसे ही पहली किस्त सामने आई तो यह पता चला कि यह प्रोत्साहन राजकोषीय नहीं बल्कि नकदी पर आधारित है. बाजार को उम्मीद कुछ और ही थी इसलिए आज के कारोबार में बाजार का उत्साह ठंडा हो गया''

इसका मतलब यह हुआ सरकार नकदी का प्रवाह बढ़ाने पर जोर दे रही है, लेकिन बजट से इसके लिए कोई राहत नहीं है. आसिफ आगे कहते हैं, ''इस समय बाजार को दरअसल ऐसे पैकेज की जरूरत है जो डिमांड को बढ़ावा दे. जहां सरकार लोगों के हाथ में सीधा पैसा छोड़े.'' कमजोर मांग से दबी और पहले से कर्ज में लदी कंपनियां नया लोन बाजार से क्यों उठाएंगी?

गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए लेकिन गुरुवार को दोनों की सूचकांक 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं. चुनिंदा पावर और एनबीएफसी कंपनियों में आज बढ़त देखने को मिल रही है.

क्या कहना है ब्रोकरेज फर्म का?

सीएलएसए-

-बुधवार को घोषित छह लाख करोड़ का पैकेज राजकोषीय घाटे को दो फीसदी बढ़ाएगा.

-दो तिहाई पैकेज गारंटी और बाकी सिस्टम में नकदी बढ़ाने बढ़ाने वाला है

-यह पैकेज निवेशकों का उत्साह बढ़ाने के लिए शायद काफी नहीं होगा.

-अब तक की घोषणाओं का राजकोषीय घाटे पर सिर्फ 0.56% का असर होगा.

-एनबीएफसी, बिजली कंपनियों और छोटे उद्योगों को लिए नकदी एक स्वागतयोग्य कदम है.

एचएसबीसी

-इस पैकेज का राजकोषीय प्रबंधन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा

-ज्यादातर स्कीमें क्रेडिट गारंटी के तौर पर आई हैं

-मौजूदा वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे पर ये स्कीमें 0.1 फीसदी का ही असर डालेंगी

-कुल राजकोषीय घाटा 10 फीसदी रहने का अनुमान. केंद्र और राज्यों का मिलाकर

क्रेडिट सुइस

-बुधवार की घोषणाओं का राजकोषीय घाटे पर 50 हजार करोड़ का बोझ पड़ेगा

-3 लाख करोड़ की स्कीम से लॉकडाउन के दौरान हुए नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी

-बिजली वितरण कंपनियों को मिली नकदी से कैशफ्लो बेहतर होंगे

-एमएसएमई के लिए इक्विटी स्कीम प्रोत्साहित करने वाली, हालांकि अभी विस्तृत जानकारी आना अभी बाकी है.

-बचे हुए 7 लाख करोड़ के पैकेज का राजकोषीय घाटे पर अपेक्षाकृत ज्यादा असर हो सकता है.

-बचे हुए पैकेज में खाद्य सुरक्षा और सीधे ट्रांस्फर जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं

-किसानों और भूमिरहित किसानों के लिए भी राहत की घोषणा हो सकती है.

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