कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बाद हुए लाकडाउन में सारे कामकाज ठप हैं. इससे प्रदेश के खजाने पर प्रभाव पड़ा है. वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है. ऐसी स्थितियों में प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के सामने अर्थव्यवस्था को खड़ा करने की बेहद कठिन चुनौती है. लाकडाउन लागू होने के बाद पहली बार सुरेश खन्ना ने लखनऊ के 10 कालीदास मार्ग पर स्थित अपने सरकारी आवास में ‘इंडिया टुडे’ के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत कर सरकार की रणनीति का खुलासा किया.
-लाकडाउन का प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव देखते हैं?
लाकडाउन का प्रभाव तो प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा. वर्ष 2019-20 में 31 मार्च तक 73 हजार करोड़ रुपए वैट और जीएसटी से प्राप्त हुआ था. सरकार को स्टांप और निबंधन से करीब 16 हजार करोड़ का राजस्व मिलता था. आबकारी से 100 करोड़ रुपए का राजस्व रोज मिलता था. काम धंधा बंद होने से राजस्व में काफी गिरावट होगी.
-प्रदेश सरकार इससे कैसे निबटेगी?
जब से प्रदेश में योगी जी की सरकार आई है तब से कड़ा वित्तीय अनुशासन लागू हुआ है. मोटे तौर पर सरकार का जो घाटा है वह आगे चलकर पूरा हो जाएगा जैसे मिसाल के तौर पर अगर रजिस्ट्री नहीं होती है, स्टांप नहीं बिकता है तो यह कुछ समय बाद पूरा हो जाएगा. इसमें नुकसान नहीं होगा. नुकसान होगा आबकारी में, वैट में. क्योंकि सारी गतिविधियां रुकी है. अगर हम एक-एक चीज का मूल्यांकन करें तो वैट, परिवहन और खनन में प्रभाव पड़ेगा.
-राजस्व में होने वाले घाटे की भरपाई कैसे होगी?
विधायकों की विधायक निधि को एक साल के स्थगित किया गया है. इससे करीब १५ सौ करोड़ रुपए का फर्क आएगा. हमने हर विभाग से कहा कि वे अपने कामकाज का मूल्यांकन करें और जहां पर भी परिस्थिति के अनुकूल खर्चे नही हो रहा हो उन्हें तत्काल बंद कर दिया जाए. सरकार कुछ चीजों में कठोर निर्णय भी ले सकती है.
-क्या सरकार पेट्रोल-डीजल पर वैट बढ़ाने की सोच रही है?
काम धंधा रुकने पर आमदनी प्रभावित हुई है. यूपी में पेट्रोल डीजल तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र से सस्ता है. पेट्रोल-डीजल पर वैट बढ़ाना एक विकल्प है. जब हम जनता को ज्यादा सुविधा देने की बात करेगे तो कहीं न कहीं जेब पर बोझ पड़ेगा इससे इंकार नहीं किया जा सकता. कोशिश यह रहेगी कि आम नागरिक की जरूरी सुविधाएं प्रभावित न हो लेकिन जो परिस्थिति है उससे निबटने के लिए कठोर निर्णय लेना पड़ सकता है. प्रदेश में जितनी भी जमीनें सरकार की निष्प्रयोज्य पड़ी हैं. अलग-अलग इंडस्ट्रियल स्टेट में हैं. इनको भी फ्री होल्ड करने पर सरकार विचार कर रही है. सिगरेट, एल्कोहल, पान मसाला के ऊपर टैक्स बढ़ाने पर सरकार विचार करेगी.
-क्या इसका असर विकास योजनाओं पर भी दिखाई देगा?
सरकार की कोशिश यह रहेगी कि विकास के कार्य, जरूरी योजनाएं हैं वे कोरोना संकट से प्रभावित न हों.
-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2022 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन इकानमी बनाने की घोषणा कर रखी है?
प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन इकानमी का लक्ष्य अपनी जगह है इसे पूरा करने में थोड़ा समय और लग सकता है.
-गांव में बड़ी संख्या में शहरों से मजदूर पहुंचे हैं. इनके सामने रोजगार का संकट है?
हमारी कोशिश रहेगी 3 मई के बाद सोशल डिस्टेंसिंग को बनाते हुए केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप ज्यादा से ज्यादा विकास का पहिया चला दें. बीमारी के फैलाव को रोकना सरकार का पहला लक्ष्य है.
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