scorecardresearch
डार्क मोड

पवित्र गाय के साथ महात्मा की सेल्फी!

मोहनदास करमचंद गांधी को सफेद मूर्ति में गाय के साथ सेल्फी लेते दर्शाया गया है

फोटो सौजन्यः आकार-प्रकार
फोटो सौजन्यः आकार-प्रकार

मोहनदास करमचंद गांधी को सफेद मूर्ति में गाय के साथ सेल्फी लेते दर्शाया गया है. इसके बारे में संक्षिप्त टिप्पणी करनी हो तो इसे गुमराह करने वाली कलाकृति कहा जा सकता है. महात्मा गांधी को, अक्सर भारतीय नोट पर छपने वाली उनकी तस्वीर और सरकारी अभियानों पर प्रतीकात्मक रूप से दर्शाए जाने वाले उनके चश्मे की आकृति द्वारा प्रतीकात्मक रूप में दर्शाया जाता है. पर इंडिया आर्ट फेयर में देबाजन रॉय की कलाकृति इससे भटकती दिखती है.

देबांजन कहते हैं, ''गांधी की छवि पर संतत्व का भाव, त्याग और राष्ट्रवाद आज इतना हावी और इतना प्रचारित हो गया है कि गांधी, जो एक व्यक्ति से अधिक एक विचार हैं, को किसी विचार के साथ जोड़कर व्यक्त करने की कोशिश में किसी और परिप्रेक्ष्य में समझ लिए जाने की पूरी संभावना है."

वैश्विक और तकनीकी रूप से अपेक्षाकृत विकसित समाज से मिलकर बना आज का भारत किस प्रकार नैतिक और आर्थिक संकटों को निमंत्रण दे रहा है, रॉय की कृति इसी बात को लेकर लोगों को आगाह और जागरूक करने की एक कोशिश है. रॉय कहते हैं कि गांधीजी के जीवन और विरासत के इर्द-गिर्द खड़े किए जा रहे पाखंड को लेकर वे विशेष रूप से चिंतित हैं.

वे कहते हैं, ''समालोचनात्मक कला का उद्देश्य होता है कि वह खामियों को उजागर करे ताकि उसे दुरुस्त करके जीवन में जरूरी बदलाव लाया जा सके. यह एक राजनैतिक विकल्प ज्यादा है क्योंकि हम आज एक खंडित दुनिया में रहते हैं जहां कलाकार की जिम्मेदारी है कि वह अपनी रचनाशीलता से लोगों को मानवता की याद दिलाए, ताकि सब मिलकर इसे पूर्णता की ओर ले जा सकें."

रॉय की मूर्ति—''गांधी गाय के साथ एक सेल्फी लेते हुए" जो राष्ट्रीय कल्पना, चर्चित मुद्दों और आचरणों में महात्मा की दमदार मौजूदगी की झलक देता है और समकालीन भारत के फैशन, सनक, चारित्रिक दुर्बलता पर गांधी के माध्यम से टिप्पणी करके गांधी को नए तरीके से उकेरने की कोशिश है.

इस कलाकृति को 2019 में फ्रांस के नाइस के एशियाटिक म्यूजियम में प्रस्तुत किया जाएगा.

रॉय कहते हैं ''कला के लिए कला" का कोई अर्थ ही नहीं है. ''मैं वॉल्टर बेंजामिन के 1936 के लेख से सहमत हूं कि ''आर्ट फॉर ऑर्ट्स सेक" नारा सामाजिक पहलुओं को एक खांचे में बांधकर रख देने का एक हिस्सा है. लोगों को यह प्रश्न भी करना होगा कि कला का काम आखिर है क्या."

गांधी और गजटःदेबांजन रॉय के फाइबर ग्लास के इंस्टालेशन

***

ADVERTISEMENT
Advertisement