बजट में कृषि क्षेत्र की बेहतरी और किसानों की आमदनी दोगुनी करने के प्रधानमंत्री के वादे से खेती-किसानी का आधुनिकीकरण चर्चा में है. इस दिशा में हो रहे कामों के बारे में केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह से विशेष संवाददाता मंजीत ठाकुर ने बातचीत की. पेश हैं प्रमुख अंशः
किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में सरकार ने क्या किया है?
सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है. इसके लिए हमने दो समितियां बनाई हैं, जो कृषि नीति को ''उत्पादन केंद्रित" की बजाए ''आय केंद्रित" बनाने के लिए ज्यादा निवेश की जरूरत वाले संभावनाशील क्षेत्रों की पहचान कर रही हैं.
इसके लिए सरकार बहु-आयामी रणनीति अपना रही है. प्रधानमंत्री ने इसके लिए सा सूत्रीय रणनीति दी है, जिनमें प्रति बूंद अधिक फसल, हर खेत की गुणवत्ता के अनुसार अच्छे बीज और पोषक तत्व उपलब्ध कराना, कटाई के बाद फसल नुक्सान को रोकने के लिए गोदाम और कोल्डचेन में बड़ा निवेश, फसल बीमा योजना और पशुपालन और मछलीपालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना शामिल है.
पिछले कुछ साल में खेती और किसानों की बेहतरी के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं. यूपीए-2 सरकार के पांच साल में कृषि आवंटन के मुकाबले हमने 74.5 फीसदी अधिक रकम आवंटित की है.
खेती लागत कैसे कम करेंगे?
सरकार ने सिंचाई पर ध्यान दिया है. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अलावा 2017-20 के दौरान लघु सिंचाई कोष के लिए 5,000 करोड़ रु. के कॉर्पस फंड की घोषणा की गई है. वर्षों से रुकी सिंचाई योजनाओं को पूरा किया जा रहा है.
सॉयल हेल्थ कार्ड के इस्तेमाल से संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग के कारण लागत में कमी हो रही है और पैदावार भी बढ़ी है. स्पेस टेक्नोलॉजी राष्ट्रीय कार्यक्रम से सूखे का पूर्वानुमान, धान के खाली क्षेत्र के रबी मौसम में बेहतर उपयोग से पैदावार बढ़ाने में मदद मिल रही है.
किसानों को उपज की वाजिब कीमत दिलवाना कैसे तय करेंगे?
हमारा जोर कृषि बाजार में सुधार पर है. ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना में 469 मंडियों को जोड़ा जा चुका हैं. कई मंडियों में ऑनलाइन ट्रेंडिग भी शुरू हो चुकी है. कृषि में बाजार सुधार के लिए मॉडल पीएमसी एक्ट, 2017 राज्यों को जारी किया गया है.
बजट में 2000 करोड़ रु. का एग्रीमार्केट डेवलपमेंट फंड घोषित किया गया है जिससे 22,000 ग्रामीण हाट और 585 एपीएमसी मंडियों का विकास हो सकेगा. कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार एक मॉडल एक्ट बना रही है.
इस बजट में मॉडल लैंड लाइसेंस कल्टीवेटर एक्ट की भी घोषणा की गई है जिससे बंटाईदार और जमीन किराए पर लेकर खेती करने वाले छोटे किसानों को भी संस्थागत ऋण व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा.
बाजार में कृषि उपज के दाम अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आते हैं तो कुल उपज के 25 प्रतिशत की खरीद की सीमा को बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया गया है. बजट में 500 करोड़ रु. से ऑपरेशन ग्रीन शुरू की गई है जिससे किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिलेगा और उपभोक्ताओं को ये उत्पाद वाजिब दामों में उपलब्ध हो सकेंगे.
खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए क्या योजना है?
सरकार खाद्य प्रसंस्करण के जरिए कृषि में गुणवत्ता को बढ़ावा दे रही है. 6,000 करोड़ रु. के आवंटन से प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना की शुरुआत की गई है. एग्रोप्रोसेसिंग क्लस्टरों के फार्वर्ड एवं बैकवर्ड लिंकेज पर कार्य करके फूड प्रौसेसिंग के विकास के लिए इस साल आवंटन पिछले वर्ष से लगभग दोगुना करके 1,400 करोड़ किया गया है.
पशुपालन में क्या कर रहे हैं, जिससे किसानों की आय बढऩे की उम्मीद है?
आजादी के बाद यह पहली सरकार है जो कृषि विकास के साथ किसानों के आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है. देसी गाय की उत्पादकता को दोगुना करने हेतु राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 1335.24 करोड़ रु. की परियोजनाएं मंजूर की गई हैं, जिसमें देसी गाय की 41 और 13 महिषवंशी नस्लें सुधारी जा रही हैं.
शहद, मछली, अंडा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार क्या कर रही है?
प्रधानमंत्री ने मात्स्यिकी क्षेत्र में ''नीली क्रांति" घोषित की है. नीली क्रांति की छतरी के नीचे डीप सी फिसिंग नाम से एक नई योजना भी प्रारंभ की गई है, जिसके तहत 2019-20 तक मछली उत्पादन को डेढ़ गुना बढ़ाकर 1.5 करोड़ टन किया जाएगा.
रूरल बैकयार्ड पोल्ट्री डेवलपमेंट के तहत गरीब मुर्गीपालकों की आमदनी बढ़ाई जा रही है. राष्ट्रीय पशुपालन विकास मिशन के तहत भेड़, बकरी, सूअर और बतख पालकों की आय बढ़ाई जा रही है. सरकार मधुमक्खीपालन विकास के लिए मधुक्रांति पर विशेष ध्यान दे रही है.
एकीकृत फार्मिंग को सरकार कैसे बढ़ावा दे रही है?
हमारी सरकार समेकित कृषि प्रणाली (आइएफएस) का इस्तेमाल कर रही है, जो किसानों पर सूखा, बाढ़ या अन्य मौसमी घटनाओं के असर को भी कम करता है. समेकित कृषि प्रणाली से कृषकों की वार्षिक आय में 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है.
सरकार कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में क्या कर रही है?
इस दिशा में पिछले तीन साल में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने प्रतिकूल वातावरण में अधिक उपज देने वाली कुल 571 नई फसल किस्मों, 11 नई पशु नस्लों एवं बेहतर कृषि तरीकों का विकास किया है. दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाने के लिए देशभर में 150 सीड हब स्थापित किए गए.
42 एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल विकसित किए हैं, जिसमें खेती के लिए पशुधन, पोल्ट्री और बागवानी पर खास ध्यान दिया गया है. कृषि शिक्षा को प्रोफेशनल डिग्री घोषित किया गया है.
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