दिल्ली में एक एग्रीकल्चर एक्सपो से लौटे युवा इंजीनियर किसान हरीश धनदेव जैसलमेर के अपने गांव धायसर लौटे तो अपनी नौकरी छोड़कर खेती करने का मन बना चुके थे. उन्होंने ऐलोविरा की खेती शुरू की. हरीश ने शुरुआत में करीब एलोविरा के 80,000 पौधे लगाए थे जो अब बढ़कर 7 लाख हो चुके हैं.
हरीश बाबा रामदेव के पतंजलि फूड प्रोडक्ट लि. को हर महीने 150 टन से अधिक प्रोसेस की हुई एलोविरा की पत्तियों का पल्प धायसर से भेजते हैं. अपने रेतीले खेतों में हरीश बार्बी डेन्सिस नामक ऐलोविरा की प्रजाति की खेती करते हैं. इसकी उम्दा क्वालिटी को नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन (एनपीओपी) ने तारीफ की है.
अब हरीश के पास ब्राजील, अमेरिका और हांगकांग से मांग आने लगी है. वे कहते हैं, ''पतंजलि के बाद भी प्रति दिन 5,000 लीटर जूस, 2 से 3 टन जेल, करीब 5 टन पल्प, फ्लॉवर पाउडर एलो स्प्रेट्राईड पावर जैसे अन्य कई प्रकार की एलोएविरा उत्पादन तैयार कर सकते हैं."
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