बाम्बे हाइकोर्ट की पणजी पीठ ने गत 23 अगस्त को कसीनो वाले जहाज एमवी लकी सेवन के डूबने के कारण गोवा के मशहूर समुद्र तट मिरामार पर आए संकट से जुड़ी एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कहा, ''कसीनो आएंगे और जाएंगे. इन्हें बदला जा सकता है. लेकिन हमारे समुद्री तट नहीं बदले जा सकते.''
विवाद गत जुलाई में तब शुरू हुआ जब अदालत ने 35 वर्ष पुराने जहाज को गोवा के समुद्र में प्रवेश की इजाजत दे दी. 5,000 टन वजनी और 75 मीटर लंबे जहाज को पहले मारमुगाओ पोर्ट ट्रस्ट लाया गया था और फिर अनिवार्य फिटनेस प्रमाण पत्र के बगैर मंडोवी नदी की तरफ लाया जा रहा है, जहां यह राज्य के छठे ऑफशोर कसीनो के रूप में काम करेगा. हालांकि, जहाज कैबो राज भवन के पास फंस गया लेकिन अंततः 16 जुलाई को पणजी के मिरामार बीच की तरफ बढ़ चला. हालांकि जहाज में दरार आ गई और यह धीरे-धीरे डूब रहा है.
जहाज की मालिक कंपनी गोल्डन ग्लोब होटल्स ने गोवा की कंपनी मडगावकर साल्वेज को जहाज बचाने का काम सौंपा है. लेकिन काम के 15 सितंबर से पहले शुरू होने की संभावना नहीं है. जहाज में अधिक दरारें आ चुकी हैं, खासकर डेक और निचले फर्श में पानी बढ़ता जा रहा है.
जैसे-जैसे संकट गहराता जा रहा है, गोवा सरकार की मुसीबत बढ़ती जा रही है. हरियाणा के विवादास्पद पूर्व मंत्री और गोल्डन ग्लोब होटल्स के मालिक गोपाल कांडा ने अभी तक सरकार के उस नोटिस का जवाब नहीं दिया है जिसमें समुद्रतल को हो रहे नुक्सान को रोकने के लिए कंपनी की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी मांगी गई है. पर्यावरणविदों की इस चेतावनी से दबाव और बढ़ रहा है कि मिरामार तटरेखा पर मिट्टी का कटाव बढ़ा रहा है.
गोवा के महासागर विज्ञान राष्ट्रीय संस्थान (एनआइओ) के पूर्व वैज्ञानिक एंटोनियो मस्केरनहास कहते हैं, ''मॉनसून के सीजन के दौरान मिट्टी का कटाव सामान्य बात है, लेकिन जहाज ने इसे सामान्य से दो मीटर तक बढ़ा दिया है.'' उन्होंने बताया कि कारानजालेम-मिरामार समुद्र तट के उत्तरी किनारे पर रेत का जमाव देखा जा रहा है. मस्केरनहास कहते हैं, ''ऐसा जहाज के डूबने के कारण हो रहा है.''
अब, गोवा सरकार ने गोल्डन ग्लोब होटल्स से कहा है कि वह जहाज को दूर ले जाने से पहले पर्यावरण को हो रहे नुक्सान के खामियाजे के तौर पर एक करोड़ रु. की बैंक गारंटी जमा करे. जहाज के स्थानांतरित होने के बाद राज्य का पर्यावरण विभाग और एनआइओ संयुक्त रूप से समुद्र तट को हुए नुक्सान का आकलन करेंगे.
उधर, गोपाल कांडा ने इन आरोपों का खंडन किया है कि एमवी लकी सेवन ने तटरेखा को नुक्सान पहुंचाया है. उन्होंने कहा कि पोत को जल्द ही दूर हटा लिया जाएगा. हालांकि गोवा में उपचुनाव होने से पहले मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर ने कहा था कि आचार संहिता हटने के बाद इसे हटाया जाएगा.
अभी हटाने पर सब इसे चुनाव से जोड़कर देखने लगेंगे. बहरहाल, अतीत में दुर्घटनाओं को देखते हुए जहाज का यह हाल गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है. 2000 में एमवी रिवर प्रिंसेस जहाज को सिम्वेरियम तट पर खड़ा किया गया था जिससे लोकप्रिय कैंडोलिम बीच की तटरेखा को नुक्सान पहुंचा था.
जहाज मालिक गोपाल कांडा ने अभी तक सरकार के नोटिस का जवाब नहीं दिया है. सरकार ने कंपनी के कदमों के बारे में पूछा था.

