राजस्थान में हुई कुछ घटनाओं से संकेत मिलता है कि प्रशासन पर से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पकड़ छूट रही है, जिसे वैसे भी वे ज्यादातर अफसरों के भरोसे चला रही हैं. हाल ही में कुछ वीडियो और तस्वीरें वायरल हो गईं. इनमें से एक वीडियो में स्थानीय शासन महकमे के प्रमुख सचिव मंजीत सिंह को कथित तौर पर उनके संपर्कों के पैसे से आयोजित एक पार्टी में शराब का मजा लेते हुए दिखाया गया. वह भी ऐसे वक्त में जब उनके महकमे के तहत आने वाली हिंगोनिया की गोशाला में गायों की बेहिसाब मौतों ने सारे देश को झकझोर रखा था. उनकी एक और तस्वीर सामने आई, जिसमें वे स्थानीय अशोक क्लब में अशोक सिंघवी के साथ देखे गए. सिंघवी भी आला अफसर हैं जो इन दिनों मुअत्तल हैं और खनिज घोटाले में अपनी भूमिका के लिए आठ महीने जेल में बिता चुके हैं.
सरकार अपनी सुविधा के मुताबिक चाहे तो दोनों ही मामलों को कदाचार मान सकती है या उनका निजी आचरण भी बता सकती है. मगर हकीकत यह है कि लोगों ने इस पर सवाल उठाए हैं और इसे पिछले एक महीने में सैकड़ों गायों की मौत के प्रति प्रशासन के लापरवाह रवैए से जोड़कर देखा है. इससे जनाक्रोश का पता चलता है. इन गायों को बारिश के बाद कीचड़ में फंसकर उस वक्त जान गंवानी पड़ी, जब गोशाला के रखवाले उन्हें उनके हाल पर छोड़कर अपनी बकाया रकम का भुगतान न होने की वजह से हड़ताल पर चले गए. वरिष्ठ अफसरों ने मंत्री राजपाल सिंह या मुख्यमंत्री को इस मामले की गंभीरता के बारे में बताने की भी परवाह नहीं की.
इससे पहले राजस्थान हाइकोर्ट सरकार और स्थानीय महकमे से बार-बार कह रहा था कि वे हिंगोनिया के हालात में सुधार लाएं और वहां फैले भ्रष्टाचार को रोकें. इस साल की शुरुआत में हाइकोर्ट ने ऐंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के महानिरीक्षक दिनेश एमएन को भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था. गायों की मौत के बाद नौकरशाही के मुंह पर तमाचा जड़ते हुए हाइकोर्ट ने दिनेश को एक बार फिर आदेश दिया कि वे जाएं और मौत की वजहों का पता लगाएं. दिनेश अफसरशाहों समेत भ्रष्टाचार में लिप्त सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहे थे और उन्होंने ही सिंघवी को गिरफ्तार किया था. लेकिन अफसरों की भ्रष्ट लॉबी के दबाव मंक कुछ हफ्तों पहले उन्हें एसीबी से हटा दिया गया.
बाद में अदालत ने आधा दर्जन बड़े अफसरों को तलब किया और गायों की देखभाल में हद दर्जे की लापरवाही के लिए उन्हें फटकार लगाई. उसने सरकार के कमजोर जवाब को खारिज किया जिसमें उसने बताया था कि उसने संकट के समय छुट्टी पर जाने के आरोपी निचले दर्जे के दो अफसरों को मुअत्तल कर दिया है. सरकार ने बड़े अफसरों की भूमिका की कोई जांच-पड़ताल नहीं की, जिसे अदालत ने और वायरल वीडियो ने भी उजागर किया है. हाइकोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों ने न्यायालय के निर्देश की अनदेखी की और तभी चेते जब प्रधानमंत्री मोदी ने रिपोर्ट तलब की. राजे ने आनन-फानन में फौरी कदम उठाए और हालात सुधारने की कोशिश की. उन्होंने गायों को निजी गोशालाओं में भिजवा दिया और हिंगोनिया को गोद लेने के लिए धार्मिक और कॉर्पोरेट जगत के लोगों को न्योता दिया. पर अफसर अभी भी लीपापोती में लगे हैं. मसलन, वे गोशाला के गेट पर मेहमानों के दाखिले के लिए रजिस्टर रखवा रहे हैं और सीसीटीवी कैमरे लगवा रहे हैं.
यही वजह है कि कांग्रेस को अपने राज्य अध्यक्ष सचिन पायलट की अगुआई में बैठे-बिठाए एक मुद्दा मिल गया और उसने हिंदू विश्वासों को लेकर हमला बोल दिया, जो बीजेपी के एजेंडे में सबसे ऊपर हैं. गायों की मौत को लेकर राजे को पार्टी में भी हमलों का सामना करना पड़ रहा है और इसकी अगुआई घनश्याम तिवाड़ी सरीखे उनके विरोधी कर रहे हैं. मगर राजे को इस बात का एहसास नहीं है कि उनके कुछ अफसरशाहों ने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं, जिसमें हिंदू कट्टरपंथी उन्हें हिंदू विरोधी के तौर पर देख रहे हैं. इससे पहले ऐसे ही कुछ अफसरों ने रिंग रोड के आसपास और शहर के भीतर मेट्रो के काम के लिए मंदिरों को ढहा दिया था. तब आरएसएस राजे के विरोध में उतर आया था.
हिंगोनिया की घटना से कुछ वक्त पहले भी बड़े नौकरशाहों को नाकामी से बरी करने की कोशिशें नजर आईं, जब एसीबी ने एक चीफ इंजीनियर आर.के. मीणा और एक अतिरिक्त चीफ इंजीनियर सुबोध जैन को बड़े रिश्वत घोटाले में पकड़ा था. गिरफ्तारियों के बाद प्रमुख सचिव जे.सी. मोहंती को स्थानीय मीडिया में यह कहते हुए पेश किया गया कि इंजीनियरों ने सरकार की बदनामी करवाई है. मगर हर कोई पूछ रहा है कि क्या राजे ने मोहंती से सवाल किया कि वे भ्रष्ट अफसरों की भेजी फाइलों को आंख मूंदकर मंजूरी क्यों दे रहे थे और उन्होंने भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कभी कोई कदम क्यों नहीं उठाया? इंडिया टुडे के साथ बातचीत में आधा दर्जन वरिष्ठ अफसरों ने माना कि पिछले 15 साल में उन्होंने भ्रष्टाचार के लिए अपने किसी मातहत के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. वहीं एसीबी के अफसरों ने स्वीकार किया कि किसी भी प्रमुख सचिव या अतिरिक्त मुख्य सचिव ने उन्हें भ्रष्टाचार की कभी कोई शिकायत नहीं भेजी.
हिंगोनिया मसला अन्य टाली जा सकने वाली त्रासदियों की याद दिलाता है. इनमें अप्रैल में जयपुर के पास सरकारी बाल संरक्षण गृह में लापरवाही की वजह से 12 बच्चों की मौत भी शामिल है. वहीं मई में हाइकोर्ट ने एक महिला की गुमशुदगी के मामले में पुलिस के नाकारापन की सफाई देने के लिए डीजीपी मनोज भट्ट को तलब किया था तो उनको चक्कर आ गए थे. उन्हीं दिनों एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर संगीन मुजरिमों को छोडऩे के बदले दस लाख रुपए की रिश्वत लेने से ठीक पहले पकड़ा गया था.
भ्रष्टाचार से पनपे नाकारापन ने लोगों को इतना नाराज कर दिया है कि वे बीजेपी के खिलाफ वोट देने लगे हैं. पंचायत और स्थानीय निकायों की 37 सीटों के हालिया उपचुनावों में कांग्रेस ने अपनी सीटें बढ़ाकर 16 से 19 कर लीं, जबकि बीजेपी की सीटें 16 से घटकर 10 पर आ गईं. पायलट कहते हैं कि 21 जिलों में फैले और लाखों मतदाताओं की शिरकत वाले ये उपचुनाव मध्यावधि जनमत संग्रह की तरह थे. वहीं बीजेपी के राज्य अध्यक्ष अशोक परनामी कहते हैं कि ज्यादातर चुनाव उन इलाकों में हुए जहां कांग्रेस का मजबूत आधार है. वैसे उन्होंने यह भी कहा कि वे हार के कारणों की पड़ताल करेंगे. यह जरूरी भी है क्योंकि मंत्रियों के साथ बीजेपी कार्यकर्ताओं और विधायकों की ज्यादातर बातचीत में कार्यकर्ताओं ने नौकरशाही में भ्रष्टाचार और नाकारापन पर गुस्सा जाहिर किया है. परनामी ने बीजेपी सरकार का आधा कार्यकाल पूरा होने पर इस किस्म की बातचीत शुरू करके अच्छा ही किया है, क्योंकि इससे कार्यकर्ताओं को अपना गुस्सा निकालने का और उन्हें सुधार के कदम उठाने का मौका मिलेगा. लेकिन भ्रष्टाचार में लिप्त बड़े अफसरों के खिलाफ कड़ाई तो राजे को ही करनी पड़ेगी.
अफसर बन गए वसुंधरा राजे की मुसीबत!
हिंगोनिया की गोशाला में सैकड़ों गायों की मौत ने राजस्थान में नौकरशाहों के नाकारापन और भ्रष्टाचार को फिर उजागर किया.

अपडेटेड 24 अगस्त , 2016
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