
नवरात्रि के दौरान 17 अक्तूबर को सप्तमी के दिन पंडाल उत्सव की परंपरागत तरीके से शुरुआत हुई. इस दिन को बेहद शुभ माना जाता है और किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि भगदड़ जैसी त्रासद घटना होगी, जिसमें 19 लोगों की जान चली गई और 25 अन्य जख्मी हो गए.
अचानक मूसलाधार बारिश, पंडाल गिरने की आशंका, प्रवेश और निकास के लिए एक ही संकरा रास्ता, और बाहर बेहद तंग गली, उत्तर कोलकाता के चोरबगान में एक साथ इतने कारण किसी त्रासदी को आमंत्रित कर रहे थे. कोलकाता ने इससे पहले कभी ऐसा मंजर नहीं देखा था.
पश्चिम बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के बाद यह पहली ऐसी पूजा थी और त्योहार खत्म होने से पहले ही विपक्ष ने हंगामा खड़ा कर दिया. भीड़ नियंत्रण में नाकामी, पुलिस की लापरवाही और सबसे बढ़कर पूजा समिति में सियासी नेतृत्व में बदलाव के आरोप लगाए गए.
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुरानी घटनाओं का हवाला दिया जिसमें 2025 में करंट लगने से हुई 13 मौतें भी शामिल थीं. दोनों हादसों में बारिश की अहम भूमिका थी. मगर यहां भारी भीड़, पंडाल गिरने की अफवाह और एक संकरे निकास मार्ग के कारण एक ही जगह कई लोगों की जान गई.
सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अनिंदिता रॉय सरस्वती के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया गया है. आयोजन समिति के कुछ सदस्यों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया. मगर घटना की पृष्ठभूमि पर काफी सवाल उठे. उत्तर कोलकाता की इस प्रमुख चोरबगान सार्वजनीन पूजा में भाजपा के सत्ता में आने के बाद बड़ा बदलाव दिखा था.
बदलाव की हवा
यह कोई मामूली बात नहीं थी. पंडाल निर्माण के लिए पहली खूंटी पूजा पांच जुलाई को हुई थी. इसमें लॉकेट चटर्जी और कौस्तव बागची जैसे भाजपा नेता शामिल हुए. बिमान साहा को मूर्तिकार चुना गया था.
इसकी थीम अकाल बोधन (दुर्गा का अकाल जागरण) थी, जो उस प्रसंग पर आधारित थी जब भगवान राम ने देवी की आराधना की थी. सोलहवीं से अठारहवीं शताब्दी के दौरान दुर्गा पूजा को वसंत से शरद ऋतु में स्थानांतरित करने के पौराणिक आधार को देखते हुए यह थीम वर्तमान समय के अनुकूल बैठती है.
वैसे, 17 जुलाई को वरिष्ठ महासचिव जयंत बनर्जी, उनकी बेटी प्रत्यूषा और समिति के बाकी सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया, जिससे नई प्रबंधन समिति के गठन का रास्ता साफ हो गया. नई समिति में उत्तर कोलकाता के भाजपा अध्यक्ष तमोघ्न घोष को मुख्य सलाहकार, जोरासांको के भाजपा विधायक विजय ओझा को अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के भतीजे देवदीप अधिकारी को मुख्य संरक्षक बनाया गया.


नई तरह की दुर्गा
उनतीस जुलाई को दूसरी खूंटी पूजा हुई. कला का रूप भी बदल गया. सुशांत शिवानी पाल ने बिमान साहा की जगह ली. नई थीम रखी गई ओरोब, जो आरव या शांत का बंगाली रूप है. इसमें मूर्ति कला में उत्सव के बजाय ध्यान की मुद्रा को अपनाया गया.
शेर के बजाय मां दुर्गा एक अर्धचंद्र पर विराजमान थीं; महिषासुर का वध करने के बजाय उन्हें शांतिपूर्ण मुद्रा में दिखाया गया था. इस नए डिजाइन ने उत्सुक भीड़ को खींचा, और आखिरकार अपनी ही शांति छिन्न-भिन्न कर बैठी.
अब इस पर एक सियासी संग्राम छिड़ गया है. ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने पुराने प्रबंधन को जबरन हटाने का आरोप लगाया और मुख्यमंत्री के परिवार के संबंधों की जांच की मांग की है.
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि उन्हें फेरबदल में मुख्यमंत्री के भतीजे के भूमिका की कोई जानकारी नहीं थी. पूजा से ठीक पहले भट्टाचार्य ने अपील की थी कि सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों को खुद को समितियों में शामिल नहीं करना चाहिए.
वहीं, माकपा ने प्रशासन पर प्राथमिकताओं पर ध्यान न देने का आरोप लगाया. मोहम्मद सलीम जैसे नेताओं ने हादसे के बाद वामदल से जुड़े एक पुस्तक स्टाल को हटाने के लिए पुलिस बल की तैनाती पर सवाल उठाए जो इस हफ्ते सुर्खियों में आया एक अन्य मुद्दा था.

