scorecardresearch
डार्क मोड

वादा, नशा और कत्ल

नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले एक कार्यकर्ता की लाइव-स्ट्रीमिंग के दौरान हुई हत्या ने एक पुराने प्रेत को फिर से जगा दिया. चुनावी परीक्षा से पहले आम आदमी पार्टी मुश्किल में

state scan punjab
फरवरी 2024 में मलेरकोटला के गुबारा गांव में झोटा; और (इनसेट) लाइव-स्ट्रीम हुई वह भिड़ंत जिसमें गोली लगने से उनकी मौत हो गई
अपडेटेड 27 अक्टूबर , 2026

उड़ता पंजाब फिल्म के जरिए राज्य के नशे के संकट को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए एक दशक बीत चुका है. धीरे-धीरे यह मुद्दा अखबारों के पहले पन्नों से गायब हो गया. सियासी खबरों में कभी-कभार मसालेदार तड़के की तरह इसका जिक्र होता रहा या फिर इसे ऐसी पुरानी पृष्ठभूमि के तौर पर पेश किया जाता रहा, जिसे दोहराने की जरूरत नहीं थी.

मगर 13 अक्तूबर को 45 वर्षीय पर‌विंदर ‌सिंह झोटा की हत्या ने जैसे झकझोरते हुए याद दिलाया कि नशे का संकट असल में कभी खत्म हुआ ही न था. झोटा राष्ट्रीय स्तर के पूर्व मुक्केबाज थे और बाद में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बन गए.

मानसा की एक केमिस्ट शॉप में उन्हें गोली मार दी गई. इस पूरी वारदात का उनके ही कैमरे से लाइव प्रसारण हो रहा था. सिनेमा से भी ज्यादा नाटकीय और सिहरन पैदा करने वाली इस घटना के बाद नशे का मुद्दा सियासी बहस में छा सकता है क्योंकि चुनाव ज्यादा दूर नहीं.

भगवंत मान सरकार पर अपने वादों के मुताबिक नतीजे दिखाने का कितना दबाव होगा, यह एक दिन बाद ही साफ हो गया. मानसा में नगर निगम की एक जेसीबी मशीन ने केमिस्ट अश्वनी कुमार के घर का अगला हिस्सा ढहा दिया. उसी दिन झोटा को गोली मारते कैमरे में दिखने वाले अश्वनी को राजस्थान के चूरू से गिरफ्तार कर लिया गया.

मगर घर पर बुलडोजर की कार्रवाई? वैसे, अधिकारियों ने अनधिकृत निर्माण को इसकी वजह बताया. असल में, मानसा में भीड़ का गुस्सा उफान पर था. झोटा समर्थकों ने पहले अश्वनी की दुकान पर बुलडोजर चलाया और फिर उसमें आग लगा दी. ‘योगी आदित्यनाथ जैसी’ कार्रवाई की मांग कर रहे थे. उन्हें पुलिस को रोकना पड़ा.

सबकी निगाहें मान पर
अनधिकृत निर्माण? इसकी बेहद संभावित व्याख्या यह है कि सरकारी कार्रवाई को जायज ठहराने के लिए आनन-फानन में एक आधिकारिक कहानी गढ़ ली गई, जिसके आधार पर मकान ढहाया जा सके और लोगों का गुस्सा शांत किया जा सके.

बताया जाता है कि झोटा एक बुजुर्ग को नशीला पदार्थ बेच रहे अश्वनी से उलझ रहे थे और घटना का लाइव प्रसारण कर रहे थे. इस वाकए की पृष्ठभूमि में एक छोटी-सी पेचीदगी भी है. बठिंडा रेंज के डीआइजी हरजीत सिंह के मुताबिक, हत्या की वजह निजी रंजिश भी हो सकती है.

दोनों लोगों में पहले से तनातनी थी. 2023 में झोटा और उनके साथियों ने अश्वनी को जूतों की माला पहनाकर घुमाया था. उस पर प्रतिबंधित कैप्सूल बेचने का आरोप लगाया गया था. झोटा की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया.

कानून हाथ में लेने के आरोप में झोटा के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ. रिंग के मुक्केबाज की तरह झोटा को संदिग्ध नशा विक्रेताओं से कैमरे के सामने भिड़ना पसंद था. उनके वीडियो से उन्हें काफी लोकप्रियता मिली मगर उन पर कानून हाथ में लेने के आरोप भी लगे. उन पर कई आपराधिक केस भी दर्ज थे.

आक्रोश के बीच पेचीदगियां पीछे छूट गईं. लोग शवगृह के बाहर जमा हो गए और झोटा के परिवार ने मांगें पूरी हुए बगैर उनके अंतिम संस्कार से मना कर दिया. उनके पिता और पूर्व सैनिक भीम सिंह ने सरकार पर नशे के कारोबार पर लगाम कसने में नाकाम रहने का आरोप लगाया. एक जॉइंट ऐक्शन कमेटी ने राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया. उसकी मांगों में सीबीआइ जांच, पुलिस प्रमुख की बर्खास्तगी और सीएम भगवंत मान को पद से हटाना शामिल था.

विपक्षी नेता भी जल्द ही इस मुहिम में कूद पड़े. पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, उनके उत्तराधिकारी केवल सिंह ढिल्लों और, अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल तक ने भी मान पर हमला बोला.

मानसा मालवा क्षेत्र में आता है, जो पंजाब का सबसे बड़ा चुनावी क्षेत्र है. राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से 69 इसी क्षेत्र में हैं. 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) ने इनमें से 66 सीटें जीती थीं.

नशे के कारोबार पर लगाम लगाना पार्टी के प्रमुख चुनावी वादों में से एक था. पुलिस और माफिया के गठजोड़ के खिलाफ कार्रवाई, संपत्तियों की जब्ती, दोषसिद्धि की ऊंची दर और बड़े नामों पर कार्रवाई सरीखे कदमों को सरकार अपनी उपलब्धि बता सकती है.

मगर तय समय-सीमा में लक्ष्य पूरे न कर पाना, नशे का बदलता कारोबार जिसमें सीमा पर ड्रोन के जरिए डिलिवरी, सुप्रीम कोर्ट की फटकार और नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ताओं की जान पर मंडराता खतरा भी सरकार के रिकॉर्ड का हिस्सा हैं.

मान की विडंबना यह है कि इस बार हत्या ने इसी आखिरी पहलू को सामने ला दिया है. चुनाव से कुछ महीने पहले हुई इस वारदात ने उनके नैरेटिव को झीना कर दिया है.

ADVERTISEMENT
Advertisement