scorecardresearch
डार्क मोड

‘धीरे चलें, 500 मीटर आगे ब्लैक स्पॉट है’

जयपुर रेंज पुलिस ने हादसों को कम करने के लिए लागू किए प्रोटोकॉल. ऐप पर जल्द ही आपको पहले से मिल सकती है हादसे की आशंका वाली जगहों की चेतावनी

Rajasthan
दिल्ली-जयपुर हाइवे पर वाहनों की निगरानी करता राजस्थान पुलिस का ड्रोन
अपडेटेड 13 अक्टूबर , 2026

राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)-48 के 180 किलोमीटर लंबे कोटपूतली-बहरोड़ हिस्से पर एक साधारण यातायात नियम लोगों की जान बचा रहा है. दिल्ली और जयपुर के बीच जयपुर ग्रामीण में आने वाले इस हिस्से पर राजस्थान पुलिस ने एक साल से बुनियादी नियम लागू कर रखे हैं:

अपनी लेन में चलें, खतरनाक ओवरटेकिंग न करें और दुर्घटना की आशंका वाले हिस्से से पहले चेतावनी देख लें. सितंबर 2024 से अगस्त 2025 के बीच यहां 435 हादसों में 258 मौतें हुईं और 448 लोग घायल हुए. नियम लागू होने के बाद सितंबर 2025 से अगस्त 2026 तक हादसे घटकर 337, मौतें 203 और घायलों की संख्या 288 रह गई.

इन आंकड़ों से यह पूरी तरह साबित नहीं होता कि सुधार केवल लेन अनुशासन से हुआ, लेकिन उसका असर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. व्यवस्था आसान है. ट्रक, ट्रेलर और बस जैसे भारी वाहन सबसे बाईं लेन में चलते हैं और बीच की लेन ओवरटेकिंग के लिए है. कारों और हल्के वाहनों की अलग लेन है, जबकि सबसे दाईं लेन इमरजेंसी वाहनों के लिए भी है.

अगस्त 2025 में 125 किमी पर शुरू पहल एक महीने के भीतर 55 किमी और बढ़ाई गई. जयपुर रेंज के इंसपेक्टर जनरल राहुल प्रकाश इसकी कमान संभाल रहे हैं. एनएचएआइ ने लेन मार्किंग सुधारने, गैरकानूनी कट बंद करने, झाड़ियां हटाने और साइनबोर्ड लगाने में मदद की.

नियमों का सख्ती से पालन

साइनबोर्ड, टोल प्लाजा पर घोषणाएं और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों से बातचीत वाहन चालकों को जागरूक रखती है. पैट्रोलिंग दस्ते और इंटरसेप्टर वीओसी मोबाइल ऐप पर घटनाएं दर्ज करते, फोटो अपलोड करते और जाम, खराब वाहन तथा कार्रवाई की जानकारी साझा करते हैं.

इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम सीसीटीवी और ट्रैफिक कैमरों से डेटा जुटाकर इमरजेंसी, तेज रफ्तार, गलत पार्किंग, लेन तोड़ने और शराब पीकर वाहन चलाने जैसे उल्लंघन पकड़कर नंबर प्लेट ट्रैक करता है. पूरे इलाके पर ड्रोन से निगरानी होती है.

प्रयोग का दूसरा हिस्सा ज्यादा महत्वाकांक्षी है—जानलेवा दुर्घटनाओं की सबसे ज्यादा आशंका वाली जगहों की पहचान करना. पुलिस ने तीन साल के आंकड़ों से 180 किमी लंबे कॉरिडोर पर 39 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए, जहां तीन साल में 484 मौतें दर्ज हुईं.

यह कवायद अब ज्यादा व्यापक मैपिंग प्रोग्राम का हिस्सा है. जयपुर रेंज के आठ जिलों में पुलिस ने 2023-25 के आंकड़ों से हादसों वाली 101 जगहें पहचानी हैं. इनके भौगोलिक स्थान जोड़कर डिजिटल नक्शा बनाया और जानकारी गूगल से साझा की गई है, ताकि इन्हें गूगल मैप्स में शामिल किया जा सके. मकसद है कि खतरनाक रास्ते की ओर बढ़ रहे ड्राइवर को पहले ही चेतावनी मिल जाए. इस फीचर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल इसकी असली परीक्षा होगा.

व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत बनी हुई है. सीएजी की राजस्थान सड़क सुरक्षा प्रणाली की जांच में पुरानी खामियां फिर सामने आईं. पीडब्ल्यूडी की जांची गई 425 सड़कों में सिर्फ 32 का 2018-19 से 2024-25 के बीच डिजाइन, निर्माण और पूरा होने के चरण में तीन-स्तरीय सुरक्षा ऑडिट हुआ. करीब 146 सड़कों का किसी चरण में ऑडिट नहीं हुआ.

पीडब्ल्यूडी और एनएचएआइ की पांच किमी या ज्यादा लंबी 1,175 सड़कों में सिर्फ 636 का डिजाइन-स्टेज ऑडिट हुआ. मौके पर साइनबोर्ड और क्रैश बैरियर की कमियां मिलीं. राज्य में सड़क हादसों की मौतें 2015 के 10,510 से बढ़कर 2024 में 11,790 हो गईं. आंकड़े भी अधूरे हैं क्योंकि पुलिस हादसे के केवल एफआइआर वाले मामले दर्ज करती है.

जुलाई में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का निरीक्षण उस वक्त किया, जब दौसा के पास हादसे में आठ लोग मारे गए और 28 घायल हुए थे. दिल्ली-लालसोट मार्ग पर 2025 में 33 दुर्घटनाएं और 35 मौतें हुईं. वर्ष 2026 की पहली छमाही में 24 हादसों में 26 लोगों की जान गई. वर्ष 2023 में रास्ता खुलने के बाद से करीब 200 मौतें हो चुकी हैं. एनएच-48 का मॉडल यहां मददगार हो सकता है.

ADVERTISEMENT
Advertisement