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उद‍्घाटन से पहले पुल पर विवाद

भारत-नेपाल सीमा पर बने पुल के साइन बोर्ड पर लिखे गांव के नाम पर विवाद हो गया है. नेपाली पक्ष ने इस पर जताई आपत्ति

Uttarakhand
नवनिर्मित भारत नेपाल मैत्री पुल का दृश्य
अपडेटेड 29 सितंबर , 2026

भारत में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की धारचूला तहसील स्थित छारछुम गांव और नेपाल के सुदूर पश्चिम अंचल दार्चुला को जोड़ने के लिए बने भारत नेपाल मैत्री पुल में दर्ज गांव के नाम पर विवाद पैदा हो गया है.

यह पुल सितंबर 2026 में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला में काली नदी पर बनाया गया है. इसका अभी उद्घाटन नहीं हुआ है. पुल के नेपाली हिस्से की तरफ लगाए गए स्वागत बोर्ड पर भारतीय क्षेत्र के गांव (‘छारछुम’ या ‘झारचं’) का नाम लिखा गया था.

नेपाली नागरिकों और अधिकारियों ने कड़ी आपत्ति जताई कि नेपाली क्षेत्र में भारत के गांव का नाम कैसे लिखा. नेपाल की ओर इस स्थान का पता महाकाली नगर पालिका 8, असिगड़ा (दार्चुला) है. नेपाली पक्ष ने इसकी जानकारी नेपाल के परराष्ट्र मंत्रालय (विदेश मंत्रालय) और जिला प्रशासन को भी दे दी है.

धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने नाम पर निर्णय होने तक साइन बोर्ड को काली पन्नी से ढकवा दिया. पुल का निर्माण करीब 32.98 करोड़ रुपए की लागत से भारत सरकार के अनुदान से हुआ है. पिथौरागढ़ से सीधा मोटर पुल न होने से लोगों को करीब 200 किलोमीटर दूर बनबसा के रास्ते नेपाल जाना पड़ता था.

धारचूला के मल्ला छारछुम में काली नदी पर बना यह करीब 110 मीटर लंबा पुल है जिसकी चौड़ाई 10.50 मीटर है. सितंबर 2022 में इसका शिलान्यास हुआ था. पिथौरागढ़ में दोनों देशों के बीच आवाजाही के लिए 10 अंतरराष्ट्रीय झूला पुल भी हैं लेकिन यह पहला मोटरेबल पुल है.

राज्य लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिशासी अभियंता अरुण ने बताया कि भारत एवं नेपाल, दोनों ओर संपर्क सड़कों के निर्माण, सुरक्षा और कस्टम के लिए शेडों के निर्माण के बाद यह परियोजना संचालन के लिए पूर्णतः तैयार है.

इसके अलावा उत्तराखंड के चंपावत जिले के बनबसा में लैंडपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से लैंड पोर्ट परियोजना और फोर लेन एलिवेटेड रोड का निर्माण किया जा रहा है लेकिन दोनों देशों के लोगों को पुल के खुलने का इंतजार है.

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