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डार्क मोड

जट्ट बनाम जत्थेदार

धार्मिक सत्ता और राज्य प्रशासन के बीच वर्चस्व की लड़ाई को लेकर मुख्यमंत्री मान ने भले ही थोड़ा सतर्क रुख अपना लिया हो मगर गरगज के साथ उनका टकराव अब भी जारी

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान
अपडेटेड 7 अगस्त , 2026

यह मुकाबला कृपाण की धार जैसा पैना था. भगवंत मान सरकार थोड़ा लड़खड़ाई जरूर मगर फिलहाल झुकने से मना कर दिया है. अकाल तख्त की ओर से दिया गया एक महीने का अल्टीमेटम 29 जुलाई को पूरा होने वाला है. यह महीना वैसे भी काफी उथल-पुथल भरा रहा. फिल्म सतलज पर उठे विवाद ने पंजाब का माहौल गरमा दिया.

इस बीच आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री मजबूती से डटे रहे. उन्होंने आक्रामक तेवरों को थोड़ा संयत जरूर किया मगर हथियार डालते नहीं दिखे. अल्टीमेटम की समयसीमा अगर बिना किसी बड़ी घटना के गुजर गई, तो फिर सारा ध्यान फरमान जारी करने वाले अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज पर टिक जाएगा.

क्या अकाल तख्त अपनी बात मनवा सकता है? क्या उसकी नैतिक सत्ता किसी गुटबाजी में बदले बिना एक बाध्यकारी दबाव बना सकती है? इन सवालों का असल केंद्र बना है बेअदबी विरोधी कानून, जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026. तख्त का कहना है कि इसे पंथिक संस्थाओं की राय लिए बिना तैयार किया गया और इसमें इस्तेमाल की गई भाषा राज्य के अनावश्यक हस्तक्षेप को दर्शाती है.

सबसे बड़ी शिकायत यह है कि इस कानून ने 1959 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अकाली दल प्रमुख मास्टर तारा सिंह के बीच हुए समझौते को नजरअंदाज किया. समझौते में तय हुआ था कि सिख मामलों से जुड़े किसी भी राज्य या केंद्रीय कानून को प्रमुख सिख संस्थाओं के साथ परामर्श से तैयार किया जाएगा.

अकाल तख्त नए अधिनियम की पांच धाराओं में करीब दस संशोधन चाहता है, जिसमें शब्दावली के मुद्दों के साथ सजा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं. तख्त कथित आपत्तिजनक वाक्यांशों को पंथिक मामलों में एक धर्मनिरपेक्ष राज्य का हस्तक्षेप और इन्हें बेअदबी के प्रति अपर्याप्त मानता है.

मान सरकार ने अकाल तख्त के फरमान का पालन करते हुए इस कानून को स्थगित रखने का संकेत अब तक नहीं दिया है. पूरे मामले में नाटकीय मोड़ दिखे. एक वायरल वीडियो के बाद इसने विवाद का रूप ले लिया जिसमें मान को कथित तौर पर अमर्यादित कार्य करते दिखाया गया. उसे प्रामाणिक मानते हुए अकाल तख्त ने मान को ‘गुरु दोखी’ और ‘पंथ विरोधी’ घोषित कर दिया. फॉरेंसिक रिपोर्ट के हवाले से किया गया बचाव भी काम नहीं आया, तो मान ने थोड़ा झुकने की रणनीति अपना ली.

गरगज ने 29 जून को पंजाब के हाल के इतिहास की सबसे उल्लेखनीय बैठक बुलाई, जिसमें मान को छोड़कर, पूरी आप सरकार कानून पर अपनी सफाई देने के लिए कतार में खड़ी दिखी. गरगज ने इंडिया टुडे से कहा, “उन्होंने तो विधेयक के कानून बन जाने के बाद भी इसे नहीं पढ़ा था, जबकि उनमें कुछ बेहद सम्मानित सिख नेता हैं. यह थोड़ा हैरान करने वाला था.”

इस तरह अकाल तख्त के प्रति सम्मान दिखाकर माहौल को शांत किया गया, साथ ही आप ने कार्यकारी जत्थेदार को इस सिख संस्था से अलग दिखाने की कोशिश की, ताकि संदेश दिया जा सके कि जत्थेदार से असहमति का मतलब धार्मिक सत्ता की अवहेलना नहीं है.

अकाल तख्त की बैठक के बाद कार्यकारी जत्थेदार गरगज

किसे करना चाहिए फैसला?
एक तरह से देखा जाए तो आप ने जत्थेदार की नियुक्ति पर ही सवाल उठा दिए हैं और उन्हें सुखबीर बादल के अकाली दल के समर्थन से मनोनीत के तौर पर पेश किया है. यह एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है क्योंकि यह बात कट्टरपंथी समूहों की उस मांग से मेल खाती है जिसमें कहा गया है कि जत्थेदार की नियुक्ति के लिए पूरी कौम का एक सम्मेलन यानी सरबत खालसा बुलाया जाना चाहिए, जैसे पहले की सदियों में होता था ताकि 1925 से चली आ रही अकाली दल की निर्णायक भूमिका की परंपरा को खत्म किया जा सके.

इतिहास में पहले कभी किसी ने जत्थेदार की सत्ता को शायद ही इस तरह से चुनौती दी है. समयसीमा करीब आने के साथ ही मान बेंगलूरू स्थित विपश्यना केंद्र रवाना हो गए. यह मामले से बचना था या फिर अवज्ञा? छह महीने से भी कम वक्त में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए लोगों के बीच बनने वाली धारणा भी काफी अहम हो जाती है.

यह कानून खुद एक जट्ट सिख मुख्यमंत्री का पंथिक वोटों को पाने का प्रयास था और उन्होंने इसमें कोई कसर नहीं छोड़ी. 22 जुलाई को पंजाब पुलिस की एसआइटी ने 2015 की बेअदबी की घटनाओं के दौरान गृह मंत्री रहे सुखबीर बादल की उनकी भूमिका के संबंध में पूछताछ की.

इंडिया टुडे से बातचीत में कार्यकारी जत्थेदार गरगज ने टकराव वाले लहजे से परहेज किया. उनका कहना था कि उन्हें उन सिख मंत्रियों-विधायकों पर भरोसा है जिन्होंने कानून में संशोधन करने का वादा किया है. गरगज का कहना है, “विधानसभा के पास 29 जुलाई तक का समय है. वक्त आने पर उस स्थिति से निबटेंगे.” अब वक्त आ चुका है अल्टीमेटम का अंजाम देखने का.

 

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