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योगी की भगवा परिक्रमा

चुनाव से ऐन पहले अयोध्या विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी ने हिंदुत्व के मुद्दे को धार देने के लिए न केवल सपा को कड़ी चुनौती दी, बल्कि प्रदेश के एक बड़े इलाके का तूफानी दौरा तक कर डाला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नौ जुलाई को चित्रकूट के कामतानाथ मंदिर में
अपडेटेड 3 अगस्त , 2026

यह कोई ऐसी ऐसी जगह नहीं जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले न गए हों, बल्कि आठ जुलाई से शुरू हुई दो दिवसीय चित्रकूट यात्रा उनके कार्यभार संभालने के बाद से 15वीं यात्रा थी. लेकिन सात वर्ष बाद यह पहला मौका था जब उन्होंने रात यहीं पर बिताई, और प्रशासनिक तथा धार्मिक दोनों ही तरह की गतिविधियां एकदम चरम पर रहीं.

124 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, कौशांबी के साथ जिले की सीमा पर यमुना नदी पर बने पुल का उद्घाटन, एक रक्षा कॉरिडोर और युवा उद्यमियों को वित्तीय सहायता. फिर कामदगिरि पहाड़ी की परिक्रमा की. और एक भाषण भी दिया, जिसमें उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में शासन की बात करने के साथ कड़ा राजनैतिक संदेश भी दिया.

योगी के लिए इनमें कुछ भी नया नहीं, जो आक्रामकता दिखाने में कभी पीछे नहीं रहते, मगर उनके लहजे में एक अलग-सा तीखापन दिखा. अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के कारण सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब तक की सबसे कड़ी चुनौतियों में से एक से जूझ रही है.

यह विवाद ऐसा है जो उसकी पूरी राजनीति की सबसे मजबूत कड़ी यानी आम हिंदू की आस्था को कमजोर कर सकता है. यही वजह है, इस बार जैसी मुश्किल पार्टी ने पहले कभी नहीं झेली. भगवा खेमे में योगी आदित्यनाथ ही सबसे पहले खुलकर इस चुनौती का सामना करने के लिए आगे आए हैं.

आगे की लड़ाई
इस जल्दबाजी की एक बड़ी वजह यह भी है कि उनके राज्य में चुनावी माहौल बनने लगा है. फरवरी 2027 में अब सिर्फ छह महीने बचे हैं. ऐसे में धर्म और आस्था की बातें करके भ्रमित जनता को फिर से साधना बहुत जरूरी था. चूंकि समाजवादी पार्टी (सपा) ने अयोध्या विवाद को हवा दी थी, ऐसे में योगी के लिए अपने सबसे बड़े विरोधी के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोलने की जरूरत थी.

वे नहीं चाहते कि जो लोग असमंजस में हैं वे सपा के पाले में जाएं. इसीलिए आठ जुलाई को चित्रकूट इंटर कॉलेज में अपने भाषण के दौरान विरोधियों पर जमकर निशाना साधा. योगी ने कहा, “हमारी सरकार तुलसीदास जी के जन्मस्थान, वाल्मीकि आश्रम के विकास और चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के घाटों को सुंदर बनाने पर पैसा खर्च कर रही है, जबकि सपा सरकार जनता का पैसा कब्रिस्तानों की चारदीवारी बनवाने में खर्च करती थी”

चित्रकूट को रामायण में भगवान राम के वनवास का एक अहम पड़ाव माना गया है, इसलिए साख फिर से मजबूत करने के अभियान की शुरुआत के लिए यह बिल्कुल उपयुक्त जगह थी. हालांकि, योगी सिर्फ यहीं ठहरते नहीं दिख रहे. वे पूरी तरह ऐक्शन मोड में हैं. 12 जून को वाराणसी से शुरू करके वे महीने भर में करीब 30 जिलों का दौरा कर चुके हैं. फिर, नौ जुलाई को बांदा जिले में उन्होंने बुंदेलखंड को “धरती का स्वर्ग” बनाने का अपना वादा फिर से दोहराया.

दूसरे कार्यकाल में यह पहली बार था जब योगी ने बुंदेलखंड में इतना ज्यादा वक्त बिताया. इससे पहले 20 दिनों में उन्होंने इस इलाके के झांसी, ललितपुर, महोबा और हमीरपुर का भी दौरा किया. जमीनी स्तर पर इस भाग-दौड़ की वजह समझना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं. 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और सहयोगियों ने बुंदेलखंड के सात जिलों की 19 सीटों में से 16 पर जीत दर्ज की थी. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पासा पलट गया. इस इलाके की चार लोकसभा सीटों में से भाजपा सिर्फ झांसी-ललितपुर सीट ही बचा पाई और बाकी तीन सीटें सपा के खाते में चली गईं.

धर्म-जाति का समीकरण
योगी के जनसंपर्क अभियान का तरीका ऐसा था कि इसका फायदा हर तरफ मिल सके. उन्होंने बांदा के एक चौराहे पर 1857 की शहीद वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी की मूर्ति का अनावरण किया. इस कदम को सीधे तौर पर करीब 12.5 लाख आबादी वाले ओबीसी लोध समुदाय को साधने की कोशिश माना जा सकता है. यह समाज अकेले दम पर करीब 40 सीटों का रुख बदल सकता है और मध्य-दक्षिण तथा पश्चिमी यूपी की अन्य 40 सीटों पर गहरा असर डालता है.

मुख्यमंत्री का सबसे तीखा हमला 28 जून को मथुरा के पास हाथरस में दिखा जहां उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को सीधे चुनौती दे डाली. उन्होंने कहा, “सपा अगर सच में धर्म में विश्वास रखती है तो उसे खुलकर कृष्ण जन्मभूमि अभियान का समर्थन करना चाहिए.” अपने इस एक बयान से उन्होंने एक साथ तीन निशाने साधेः विपक्ष को बैकफुट पर ला दिया, लोगों का ध्यान अयोध्या से भटका दिया और हिंदुत्व के मुद्दे को और हवा दे दी. यह सीधे तौर पर 65 विधानसभा सीटों वाले ब्रज क्षेत्र को एक बड़ा संदेश भी था.

यह इलाका भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक रहा है, लेकिन अब यहां भी चुनावी नुक्सान के संकेत मिलने लगे थे. साल 2022 के विधानसभा चुनाव में क्षेत्र में भाजपा की सीटें 57 से घटकर 53 रह गईं; और 2024 के लोकसभा चुनाव में यह गिरावट और साफ दिखी, जब भाजपा ब्रज क्षेत्र की 13 लोकसभा सीटों में 12 से घटकर सिर्फ 8 पर सिमट गई. ऐसे में, बिगड़े खेल को सुधारने के लिए योगी से बेहतर भला कौन हो सकता था? 

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