चारमीनार के पास एक नामी फास्ट फूड ठिकाने पर लोगों का पसंदीदा चिकन इंजन ऑयल जैसे गाढ़े काले तेल में तला जा रहा था. लाल और चमकदार दिखाने के लिए उसमें ऐसे नकली रंग इस्तेमाल किए जा रहे थे जो प्रतिबंधित हैं.
दूसरी जगहों की हालत अलग नहीं थी. कहीं खराब मैदा-मसालों से समोसे बन रहे थे, कहीं बासे और कच्चे मांस पर मक्खियां भिनभिना रही थीं. उधर अलमारियों पर कॉकरोच राज कर रहे थे.
पीने का पानी साफ होना एकदम असंभव बात है, और खाने-पीने में इस्तेमाल होने वाली चीजें वैसे ही एक्सपायर हो चुकी दिखीं, जैसे दुकानों के लाइसेंस. हैदराबाद में फूड पुलिस की नई टीम ने फूड आउटलेट्स में जो कुछ भी देखा, उसके बाद तो शायद ही कोई वहां पर खाने की हिम्मत कर पाए. बात सिर्फ सड़क किनारे की दुकानों तक सीमित नहीं, नामी-गिरामी रेस्तरां भी पूरी तरह साफ नहीं दिखे.
बिरयानी, हलीम जैसे व्यंजनों के लिए मशहूर हैदराबाद को खाने के शौकीनों का स्वर्ग माना जाता है. लेकिन रेस्तरांओं के किचन का सच भूख मार देने के लिए काफी था. वैसे तो बाजारों में खानपान की चीजों में साफ-सफाई देखना खाद्य सुरक्षा और नगर निगम के अफसरों का काम होता है. लेकिन यह काम पुलिस की एक स्पेशल यूनिट संभाल रही है.
मार्च में बनी इस टीम का नाम-हैदराबाद फूड एडल्टरेशन सर्विलांस टीम (एच-फास्ट) है. इसके पीछे शहर के पुलिस कमिशनर वी.सी. सज्जनार का दिमाग है, जो सख्ती के लिए ख्यात हैं. सज्जनार 2019 में पूरे देश की सुर्खियों में आए थे, जब साइबराबाद में एक महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के चार आरोपियों को उनके कार्यकाल के दौरान एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया था.
टनों के हिसाब से पकड़ा ‘जंक’ फूड
पिछले करीब तीन महीनों से एच-फास्ट की टीम एक अलग ‘एनकाउंटर’ पर निकलती है. टीम ने अब तक 122 टन से ज्यादा खतरनाक और मिलावटी खाना जब्त करके नष्ट किया है. इसमें 27,024 किलो मिलावटी अदरक-लहसुन का पेस्ट, 25,845 किलो केमिकल से पकाए फल, 60 टन से ज्यादा खराब चिकन और घटिया मांस, 9,260 किलो बासी या मिलावटी अचार, 4,030 किलो मिलावटी खोया, 3,897 किलो नकली चाय पत्ती और 3,260 किलो खराब क्रीम शामिल है. रेस्तरांओं के ‘नॉट अलाउड’ वाले हिस्सों से जो तस्वीरें सामने आई हैं, उन्हें देखकर वहां खाने वाले ग्राहकों के तो होश ही उड़ गए.
1996 बैच के डीजीपी रैंक के आइपीएस अधिकारी सज्जनार कुछ समय पहले सामने आए तिरुपति लड्डू विवाद का जिक्र करते हुए कहते हैं, “एक दौर था जब मिलावट का मतलब था दूधवाला थोड़ा पानी मिला देगा या राशन वाला चावल-दाल में छोटे कंकड़ डाल देगा. लेकिन आज खाने की हर चीज मिलावटी है, और वो भी ऐसी चीजें मिलाई जा रही हैं जो सीधे जानलेवा हो सकती हैं.” ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के खाद्य सुरक्षा और पशुपालन विभाग भी एच-फास्ट के साथ मिलकर काम कर रहे हैं.
नए नियम भी लागू किए जा रहे हैं. लाइसेंस की अनिवार्यता के साथ दुकान के कर्मचारियों को मास्क और दस्ताने पहनना जरूरी होगा. दुकानों को फर्स्ट इन, जो सामान पहले आया है उसे पहले इस्तेमाल करना होगा, ताकि बासी और ताजा सामान आपस में मिल न जाए. सबसे बड़ी बात, एक बार इस्तेमाल हो चुके तेल को दोबारा गरम करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.
एच-फास्ट के इस बड़े खुलासे और उसके बाद जनता का गुस्सा देखकर कुछ रेस्तरांओं ने अब अनोखी शुरुआत की है. उन्होंने अपने किचन की लाइव-स्ट्रीमिंग डाइनिंग एरिया में लगे टीवी पर दिखानी शुरू कर दी है.

