scorecardresearch
डार्क मोड

जगन के शीशमहल का करें क्या

जगन इसे भव्य और शानदार कैंप ऑफिस बनाना चाहते थे. अब यह डीलक्स रिसॉर्ट होगा, और शायद अहंकार का संग्रहालय भी

विशाखापत्तनम में रुशिकोंडा परिसर का भव्य नजारा
अपडेटेड 22 जुलाई , 2026

अगर जगन मोहन रेड्डी 2024 के चुनाव के बाद सत्ता में बने रहते तो इतने आलीशान घर-दफ्तर में रहते जो कभी किसी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री का भी नहीं रहा. मुंबई के औसत 2बीएचके से ज्यादा बड़े बाथरूम, उससे दोगुने 1,096 वर्ग फुट में फैला जिम, स्पा, जकूजी, गेम रूम, 650 वर्ग फुट के किंगसाइज बेडरूम.

सभी बेहद महंगे, भव्य सज-धज और कई टनों की सेंट्रल एअरकंडीशनिंग सुविधा से लैस. यह तो सिर्फ 'विजयनगर' है यानी वह हिस्सा जिसे मुख्यमंत्री का 12 कमरों का घर होना था. अन्य तीन हिस्सों के नाम इन इलाकों के तीन सबसे बड़े साम्राज्यों—वेंगी, कलिंग, गजपति—के नामों पर रखे गए थे. ये भी विशाल सुइट, कॉन्फ्रेंस हॉल, बैंक्वेट हॉल, कैफे, रेस्तरां, स्टुडियो और ऐसी ही कई सुविधाओं से सुसज्जित थे.

जगन मुख्यमंत्री के रूप में अपने 2019-24 के कार्यकाल के दौरान अमरावती को नई राजधानी बनाने के चंद्रबाबू नायडू के सपने को तीन राजधानियों के अपने विवादास्पद फॉर्मूले में तब्दील करने का मंसूबा बना रहे थे. यह सब तब था. कार्यपालिका यानी सरकार की राजधानी और इसलिए उनका कैंप ऑफिस भी इस तटीय शहर विशाखापत्तनम में होना था.

जगन की जगमग
नतीजा बेमिसाल संप्रभु किले की शक्ल में सामने आया, यानी 450 करोड़ रुपए में रुशिकोंडा की पहाड़ियों को तराशकर 10 एकड़ में बनाया गया बसेरा, जहां से बंगाल की खाड़ी का विहंगम नजारा दिखाई देता है. लोकप्रिय तट स्थल के ऊपर ईस्टर्न घाट की चोटी पर दुबका यह महलनुमा जी+1 ढांचा मूलत: दौलतमंदों के लिए रिजॉर्ट बनाने की खातिर खड़ा किया गया था. आंध्र प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एपीटीडीसी) के तत्वावधान में काम भी शुरू हो चुका था. मगर 2023 के आखिरी महीनों में जब जगन ने ऐलान किया कि उनका मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) जल्द ही विजाग ले जाया जाएगा, तभी एक सरकारी समिति ने पाया कि यह जगह जगन के वर्केशन-सह-अभयारण्य के लिए बिल्कुल उपयुक्त है, जहां वे छुट्टियां बिताते हुए काम भी करते रह सकेंगे.

मगर जगन इस विशाल आवास में कभी रह नहीं पाए जिसका फरवरी 2024 में उद्घाटन भी हो गया था. जगन का यह 'शीशमहल' चुनाव अभियान के दौरान चर्चा का विषय बन गया और अप्रैल के चुनाव में वे धड़ाम से जमीन पर आ गिरे. इसकी भव्यता—इतालवी संगमरमर, सुनहरे रंग की बाथ फिटिंग, अनोखे बाथ टब और कमोड—उसके बाद रोशनी में आई.

सरकारी तिजोरी में 'सफेद चूना' लगाने को लेकर जगन और उनकी पार्टी को घेरने के बाद नायडू की सरकार सामूहिक माथापच्ची कर रही है कि इस परिसर का बेहतर इस्तेमाल कैसे किया जाए. पेचीदगियां बढ़ गईं जब शिकायतें मिलीं कि इसे तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजे) की मंजूरियों और पर्यावरण के नियमों का उल्लंघन करके बनाया गया और इसके लिए सुरम्य रुशिकोंडा पहाड़ियों को कुछ हद तक नुक्सान पहुंचाया गया.

उधर अधिकारियों का कहना था कि परिसर के बुनियादी रखरखाव का मासिक खर्च बढ़कर 12-15 लाख रुपए हो गया, जबकि इसका उपयोग कुछ भी नहीं हो रहा. इसके उलट, इसे बनाने के लिए तोड़ा गया हरिता रिजॉर्ट लोकप्रिय और शानदार हालत में था और हर साल 7.5 करोड़ रुपए कमा रहा था. नायडू ने पिछले साल एक उपसमिति बनाई थी, जिसने अब इस परिसर को फिर से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को समर्पित करने का फैसला लिया है.

होटल मालिकों का प्रवेश
समिति के मंत्री सदस्य पय्यावुला केशव (वित्त), कंदुला दुर्गेश (पर्यटन) और वीरंजनेय स्वामी (सामाजिक कल्याण) जून के मध्य में इस महल को देखने गए. कंदुला कहते हैं, ''हमें पीपीपी मॉडल अपनाना होगा ताकि एपीटीडीसी भी कुछ राजस्व कमाए.'' वे बताते हैं कि लीला, ताज वगैरह सरीखे बड़े नामों ने दिलचस्पी दिखाई है. वे यह भी कहते हैं, ''कुछ चुनौतियां हैं, जैसे उन तड़क-भड़क भरे कमरों का इस्तेमाल कैसे करें. साथ ही सीआरजेड के नियम आगे के निर्माण में बाधा होंगे, जो होटल मालिकों को हतोत्साहित करने वाला है. हमें इन मसलों को सुलझाना होगा.''

इस बीच नायडू की सरकार जनता के धन से हासिल जगन के ठाठ-बाट को जनता के सामने रखने के लिए उत्सुक दिखाई देती है! इसीलिए कंदुला का कहना है कि परिसर के एक हिस्से को जनसंग्रहालय के रूप में विकसित किया जा सकता है. अगर इसे काव्य में बदला जा सके, तो यह विडंबनाओं से भरा महाकाव्य बन सकता है. 

ADVERTISEMENT
Advertisement