scorecardresearch
डार्क मोड

नायडू की बदली रणनीति

सीएम जगन रेड्डी को टक्कर देने में टीडीपी अपने नेता चंद्रबाबू नायडू के प्रति हमदर्दी और पवन कल्याण की जेएसपी के साथ गठबंधन के भरोसे है

टीडीपी प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू अंतरिम जमानत मिलने के बाद 31 अक्टूबर को जेल से बाहर आते हुए
टीडीपी प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू अंतरिम जमानत मिलने के बाद 31 अक्टूबर को जेल से बाहर आते हुए
अपडेटेड 28 नवंबर , 2023

भले ही चुनाव छह महीने दूर हों लेकिन आंध्र प्रदेश का राजनैतिक माहौल गरमाया हुआ है. 31 अक्टूबर को तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू दो महीने जेल में रहने के बाद राजमहेंद्रवरम कारागार से बाहर आ गए. उन्हें आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट से इलाज के लिए चार सप्ताह की अंतरिम जमानत मिलने के कुछ घंटों बाद रिहा कर दिया गया. पूर्व मुख्यमंत्री पर 10 सितंबर से जेल में थे. उन पर अपने कार्यकाल (2014-19) के दौरान बेरोजगारों की ट्रेनिंग के वास्ते आवंटित करोड़ों रुपए की हेराफेरी का आरोप है. रिहाई पर समर्थकों की तरफ से अपने घर तक हुए भव्य स्वागत के बावजूद नायडू की मुश्किलें खत्म होती नहीं दिखतीं.

आंध्र प्रदेश क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट ने उनके खिलाफ सीएम रहते हुए कुछ डिस्टिलरियों के लिए लाइसेंस जारी करने में घूसखोरी का केस 28 अक्टूबर को दर्ज किया है. नायडू का भविष्य अस्पष्ट देख टीडीपी ने अगले साल एक साथ संभव विधानसभा और लोकसभा चुनावों में सत्तारूढ़ युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) से मुकाबले के लिए प्लान बी तैयार कर लिया है.

टीडीपी के संस्थापक दिवंगत एन.टी. रामाराव की तीसरी बेटी नारा भुवनेश्वरी 25 अक्टूबर को अपने पति, टीडीपी अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू के समर्थन में 'निजम गेलवाली' यानी सत्यमेव जयते के नारे के साथ यात्रा पर निकल पड़ीं. अब तक राजनीति से दूर रहीं भुवनेश्वरी,  नायडू के पैतृक गांव नरावरिपल्ले से अपने पिता एनटीआर की प्रतिमा पर माला चढ़ाने के बाद भावुक अंदाज में यात्रा शुरू की. पार्टी का दावा है कि वे समर्थकों के परिवारों को सांत्वना देने के लिए इस दौरे पर हैं, जिनकी कथित तौर पर नायडू की गिरफ्तारी तथा लंबे समय तक जेल में रहने के सदमे से मौत हो गई है.

लेकिन ऐसी यात्रा नई नहीं है. मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी भी ऐसी 'ओडारपु यात्रा' (श्रद्धांजलि यात्रा) पर उन परिवारों से मिलने निकले थे जिन लोगों की कथित तौर पर उनके पिता और तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के निधन के बाद सदमे से मौत हो गई थी. उनकी 2009 में एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी. उस यात्रा से जगनमोहन राजनीति में स्थापित हो गए थे. अब टीडीपी को उम्मीद है कि भुवनेश्वरी की यात्रा से अगले साल चुनावों में लोगों में सहानुभूति की लहर देखने को मिलेगी. 

टीडीपी को इस बात का एहसास है कि वह वाईएसआरसीपी को अपने दम पर कड़ी चुनौती नहीं दे सकती, इसलिए उसने अभिनेता से नेता बने पवन कल्याण की जन सेना पार्टी (जेएसपी) के साथ साझेदारी की है. दरअसल चंद्रबाबू नायडू ने टीडीपी को हमेशा वन-मैन शो की तरह चलाया है, जिससे उसके दूसरे पायदान के नेता हाशिए पर ही रहे हैं. यहां तक कि नायडू के बेटे लोकेश का भी सीमित असर है, जो 2014 में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए और उनके उत्तराधिकारी के रूप में पेश किया गया. 

टीडीपी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि मुख्य योजना नायडू की अनुपस्थिति में मध्यम स्तर के नेताओं और पार्टी काडर को जोड़े रखने की है. राजनैतिक जानकारों का मानना है कि भुवनेश्वरी की यात्रा सहानुभूति तो जगा सकती है, लेकिन पार्टी के पक्ष में जरूरी जोश शायद ही जगा पाए. राजनैतिक विश्लेषक डी. सुब्रह्मण्यम रेड्डी कहते हैं, "टीडीपी का वोट शेयर (2019) में लगभग 40 फीसद था. अगर नायडू जेल में रहते हैं तो इसमें भारी गिरावट आ सकती है और नायडू परिवार शायद उसे रोकने में सक्षम न हो." हैदराबाद विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञानी ई. वेंकटेसु का भी मानना है कि जमीनी स्तर पर जगन रेड्डी के 'बारीक सूचना नेटवर्क' के मद्देनजर भुवनेश्वरी की अपील का खास असर नहीं हो सकता है.

लेकिन नायडू की छवि गिरकर उठने वाले काबिल आदमी की है. उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) अदालत के विशेष न्यायाधीश को एक पत्र लिखकर जेल में अपनी जान को खतरे के मद्देनजर फूलप्रूफ सुरक्षा की मांग करके पीड़ित होने का एहसास दिलाया है. उन्होंने तेलंगाना विधानसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किया है, जहां जेएसपी का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ चुनावी समझौता है. इसके बजाए सिर्फ आंध्र प्रदेश पर ध्यान केंद्रित किया है. टीडीपी के प्रदेश अध्यक्ष के. अत्चन्नायडू कहते हैं, "जिला समन्वय समितियां (टीडीपी-जेएसपी गठबंधन की) स्थानीय इनपुट के आधार पर कार्य योजनाएं तैयार करेंगी, जिसे उचित समय पर राज्य स्तर पर आकार दिया जाएगा."

जगन रेड्डी खुद को हाशिए के तबकों के हमदर्द के तौर पर पेश करते हैं. उनकी सरकार उनके लिए ढेर सारी रियायतें दे रही है. भुवनेश्वरी की यात्रा शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर, वाईएसआरसीपी ने दिसंबर के अंत तक सभी 175 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सामाजिक साधिकार या सामाजिक सशक्तीकरण यात्रा को हरी झंडी दिखा दी. 

यह यात्रा लोगों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करने और सत्ता विरोधी लहर को थामने का काम सौंपा गया है. ये यात्राएं चुनावों के लिए एजेंडा तय कर सकती हैं. नायडू के खिलाफ भ्रष्टाचार के केस में आगे का घटनाक्रम इस प्रहसन को और रोचक बनाएगा.

ADVERTISEMENT
Advertisement