अपने नेता को ऐसा दिखाने से बेहतर क्या होगा कि वह अपने हाथ गंदे होने से नहीं डरता? इसलिए, जब 8 जुलाई को राहुल गांधी ने दिल्ली से शिमला जाते वक्त हरियाणा में एक अनिर्धारित पड़ाव डाला और धान की रोपाई में किसानों के साथ शामिल हुए, तथा ट्रैक्टर भी चलाया, तो कांग्रेसी उसे दिखाने में व्यस्त हो गए. जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, भाजपा ने सबसे पहले यह बताया कि राहुल अपनी शर्ट पर माइक लगाकर किसान बनने का नाटक कर रहे हैं. जल्द ही, उसका परदे के पीछे का वीडियो लीक हो गया और भाजपा के सोशल मीडिया हैंडलों ने आरोप लगाना शुरू किया कि उनकी 'मंचित बातचीत' के दौरान किसानों को धक्का दिया गया. अब लगता है कि राहुल के ऐसे 'अचानक' वीडियो शूट के दौरान, नामित कैमरापर्सन को छोड़कर सेलफोन और अन्य डिजिटल उपकरणों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
पैर और दिमाग का कनेक्शन
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का दिमाग आहत होने पर ज्यादा चलता है. कम से कम राजस्थान के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास का तो यही मानना है. पिछले दिनों मुख्यमंत्री के पांव में चोट लगी तो खाचरियावास ने कहा, ''मुख्यमंत्री के पैर में चोट लगी है इसलिए उनका दिमाग ज्यादा चल रहा है. जब मुख्यमंत्री का दिमाग ज्यादा चलता है तो जनता को ज्यादा फायदा मिलता है. इस बार तो उनका दिमाग खूब दौड़ रहा है.'' सियासी सयाने अब यह खोजबीन करने में जुटे हैं कि आखिर पैर की चोट और दिमाग का क्या कनेक्शन है?
पीएम का इंतजार
हाल में ट्विटर के मुकाबले मेटा ने थ्रेड की शुरुआत क्या की, इससे जुड़ने वालों का तांता लग गया. फिल्मी सितारों और आम लोगों के साथ-साथ कुछ केंद्रीय मंत्रियों ने भी वहां अपनी प्रोफाइल बना ली. इनमें नितिन गडकरी, एस. जयशंकर और पीयूष गोयल शामिल हैं. पर अधिकतर मंत्री अभी थ्रेड पर नहीं आए हैं. दरअसल, सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक थ्रेड जॉइन नहीं किया है. इसलिए अधिकतर केंद्रीय मंत्रियों ने अपने सोशल मीडिया प्रबंधकों को निर्देश दिए हैं कि जब तक प्रधानमंत्री थ्रेड पर नहीं आते उनका थ्रेड प्रोफाइल नहीं बनाना है. एक मंत्री ने तो अपने प्रबंधक को झाड़ लगाई कि प्रधानमंत्री से पहले उनका थ्रेड प्रोफाइल क्यों बना दिया गया.
चावल खाने हैं तो खीर खाओ
राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी को लेकर इन दिनों अटकलों का बाजार गरम है. सपा से गठबंधन तोड़कर उनके भाजपा के साथ जाने की कयासबाजी ने जयंत को राजनैतिक चर्चाओं का केंद्र बना दिया है. असल में जयंत भी इस कयासबाजी को हवा दे रहे हैं. 6 जुलाई को उन्होंने ट्वीट किया, ''वैसे चावल खाने ही हैं तो खीर खाओ.'' इसके कुछ ही देर बाद जयंत ने दूसरा ट्वीट किया, ''खिचड़ी, पुलाव, बिरयानी, जो पसंद हो खाओ.'' माना जा रहा है कि जयंत किसी नए राजनैतिक गठजोड़ की ओर इशारा कर रहे हैं. हालांकि इस ट्वीट से पहले जयंत ने एक बयान में भाजपा के साथ जाने की संभावना को खारिज किया था.
नए सुपर सीएम
इन दिनों गुजरात में सबसे अधिक मांग में पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव हसमुख अधिया हैं. दिसंबर 2022 में सीएम भूपेंद्र पटेल के पद संभालने के एक पखवाड़े के भीतर अधिया को उनका सलाहकार बनाया गया. उन्हें बीते छह माह में सरकार के कई बड़े फैसलों का श्रेय दिया जाता है. बीते महीने जीआइएफटी सिटी और दो अन्य राज्य सार्वजनिक उपक्रमों के अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति ने उन्हें सबसे आगे ला दिया. सत्ता के गलियारों में उनका कद बढ़ रहा है, जो सीएम के मुख्य प्रधान सचिव के. कैलाशनाथन के प्रतिद्वंद्वी हैं. अतीत में कैलाशनाथन की तरह, अब अधिया को 'सुपर सीएम' कहा जाता है.
—साथ में जुमाना शाह, आशीष मिश्र, आनंद चौधरी और हिमांशु शेखर

