पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गर्मी के दिनों में राज्य के बागों से चुनिंदा आम देश के रसूखदार लोगों को तोहफे के तौर पर भेजती रही हैं. इस साल ऐसे लोगों की उनकी फेहरिस्त में एक नया नाम जुड़ गया है भारत के प्रधान न्यायाधीश डी.वाइ. चंद्रचूड़ का. अब यह तो पता नहीं कि दीदी ने उनसे पहले के प्रधान न्यायाधीशों को कभी मीठा तोहफा भेजा या नहीं लेकिन विपक्ष को इसके पीछे की मंशा को लेकर अंदेशा है. विपक्षी नेता जानना चाह रहे हैं कि कहीं यह बेजा हरकत तो नहीं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में तृणमूल सरकार के कुछ अहम मामलों की सुनवाई चल रही है. वैसे ममता दीदी बंगाल की मिठाई बांटने के मामले में दोस्त या दुश्मन नहीं देखतीं, चाहे वह रसगुल्ला हो या आम. इसे अपने सबसे कट्टर प्रतिद्वंद्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी वे नियमित भेजती ही हैं.
अध्यक्षी का चक्कर
मध्य प्रदेश में पार्टी की कमान को लेकर एक बार फिर से तीर-कमान तने हैं. खजुराहो से सांसद वी.डी. शर्मा भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर रहेंगे, चुनाव तक विस्तार पाएंगे या जाएंगे, भोपाल में यह पार्टी हलकों में रोजाना की चर्चा का विषय है. ऊपरी तौर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, संगठन मंत्री हितानंद शर्मा और खुद वीडी सब ठीक होने का दावा करते हैं. लेकिन अंदरखाने सीएम और अध्यक्ष के बीच शीतयुद्ध के प्रसंग सुनाए जाते हैं. नए नामों में कैलाश विजयवर्गीय, नरेंद्र सिंह तोमर और विंध्य इलाके से आने वाले राजेंद्र शुक्ल का जिक्र आता है. उधर, कांग्रेस में कई कार्यकारी अध्यक्षों में से एक तेज तर्रार विधायक जीतू पटवारी प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ की टीम में कम तवज्जो मिलने से नाखुश बताए जाते हैं. यानी, मुख्यमंत्री पूर्व हों या मौजूदा, पार्टी कांग्रेस हो या भाजपा, अध्यक्षी सब जगह मुद्दा है.
संतों से डर गए स्वामी!
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य लगता है साधुओं से डर गए हैं. 9 जून से सीतापुर स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल नैमिषारण्य पार्टी का दो दिन का कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर था. उसमें पहले ही दिन मौर्य को सामाजिक न्याय विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करना था. लेकिन वे गायब पाए गए. दरअसल उनके आने की खबर पाकर नैमिषारण्य के संतों ने उनका विरोध करने का फैसला किया था. रामचरित मानस पर की गई मौर्य की टिप्पणी को लेकर संत पहले भी गुस्सा जता चुके थे. ऐसे में पार्टी नेतृत्व ने किसी भी विवाद से बचने के लिए मौर्य को शिविर में आने से रोक दिया. वैसे बताया यही गया कि वे तबीयत नादुरुस्त होने की वजह से नहीं आ पाए.
आएंगे तो मुखिया ही
मल्लिकार्जुन खड़गे ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से 12 जून को सभी विपक्षी दलों की बैठक में शामिल होने में असमर्थता जताई थी. कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी जगह किसी और को भेजने की पेशकश की थी, जिसके फौरन बाद बैठक की तारीख बढ़ाकर 23 जून कर दी गई. नीतीश नहीं चाहते थे कि यह विपक्षी एकता की आधी-अधूरी कोशिश साबित हो, लिहाजा उन्होंने साफ कहा कि ''सभी दलों का प्रतिनिधित्व उनके प्रमुख करेंगे.'' कांग्रेस आलाकमान ने इशारा समझ लिया और 72 घंटे के अंदर इस बात की पुष्टि कर दी कि बैठक में न केवल खड़गे बल्कि राहुल गांधी भी शिरकत करेंगे.
वैभव भी ईडी के रडार पर?
राजस्थान में इन दिनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के महंगाई राहत शिविरों की ही नहीं बल्कि उनके 'वैभव' की भी खूब चर्चा है. दरअसल, गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत को लेकर इन दिनों खूब सियासी हमले हो रहे हैं. राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने शेल कंपनियों के जरिए वैभव के बिजनेस लेन-देन को लेकर प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) में शिकायत की है. मुख्यमंत्री का मानना है कि चुनाव से पहले केंद्रीय एजेंसियां भी आएंगी. सियासी सयाने कह रहे हैं कि वैभव ईडी के निशाने पर आ सकते हैं.
— कौशिक डेका, आशीष मिश्र और आनंद चौधरी

