आर्यन खान को 2 अक्तूबर, 2021 को उस वक्त हिरासत में लिया गया जब वे लंबे वक्त से अपने दोस्त अरबाज मर्चेंट और कुछ परिचितों के साथ गोवा जाने वाले कॉर्डेलिया क्रूज पर सवार होने वाले थे. अगले दिन उन्हें नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की मुंबई इकाई ने, जिसकी अगुआई तब जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े कर रहे थे>
1985 के नार्कोटिक्स ड्रग्स ऐंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) कानून के तहत मादक पदार्थ रखने और उनका सेवन करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. इन अपराधों के लिए छह महीने से लेकर 20 साल तक के कठोर कारावास का प्रावधान है. संजय सिंह की अगुआई वाले विशेष जांच दल (एसआइटी) ने जिन प्रमुख कारणों से उनके खिलाफ आरोप वापस ले लिए, वे इस प्रकार हैं:
मादक पदार्थ रखना
वानखेड़े की टीम को आर्यन के कब्जे से कोई मादक पदार्थ नहीं मिला, पर शुरुआत में इस आधार पर उनके खिलाफ यह अभियोग लगाया कि क्रूज पर उनके साथ एक ही कमरे में ठहरने जा रहे अरबाज के मोजों से कथित तौर पर 6 ग्राम चरस पकड़ी गई.
अरबाज ने अपने बयान में दावा किया कि चरस उसके निजी इस्तेमाल के लिए थी और आर्यन ने उसे क्रूज पर ड्रग लेकर नहीं चलने की सलाह दी थी, यह कहकर कि ''एनसीबी के लोग सक्रिय हैं.’’ पकड़े जाते वक्त आर्यन के पास नशीले पदार्थों का न मिलना एक बड़ा कारण है, जिसकी वजह से उनके खिलाफ आरोप वापस ले लिए गए.
वानखेड़े ने छापे के दौरान बरामद सारे मादक पदार्थों को एक साथ जोड़ने की कोशिश की, ताकि कुल मात्रा इतनी पर्याप्त हो जाए कि उसे 'व्यावसायिक’ माना जा सके और एनडीपीएस के तहत कठोर सजा की धाराएं लगाई जा सकें और यह जताया जा सके कि एक संगठित गिरोह मौजूद था, जिसमें आर्यन भी थे. मगर एसआइटी ने पाया कि उस दिन ड्रग्स रखने के लिए पकड़े गए समूह आपस में जुड़े नहीं थे.
मादक पदार्थों का सेवन
वानखेड़े की टीम ने आर्यन के मोबाइल फोन से निकाली गई चैट के जरिए यह दिखाने की कोशिश की कि वे नियमित रूप से नशीले पदार्थों का सेवन करते थे. मगर ज्यादातर चैट से कथित तौर पर बस इतना संकेत मिला कि बहुत पहले जब वे अमेरिका के कैलिफोर्निया में थे, भांग खरीदते थे और वहां ऐसा करना गैर-कानूनी नहीं है.
भारत में की गई कुछ बातचीत भी थीं, पर एनसीबी की मुंबई इकाई इसकी तस्दीक के लिए कोई सबूत पेश नहीं कर सकी. जब तक ऐसा प्रमाण न हो, व्हॉट्सऐप चैट अदालत में स्वीकार्य नहीं हैं.
वानखेड़े ने आर्यन के मोबाइल फोन के रिकॉर्ड की जांच करते वक्त स्थापित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया, जिससे मामला और कमजोर हो गया.
एनसीबी की मुंबई टीम गिरफ्तार किए जान के दिन ही नशीले पदार्थ के सेवन की जांच के लिए आर्यन का मेडिकल परीक्षण नहीं करवा पाई, जो बड़ी खामी थी. एसआइटी ने फैसला दिया कि जमा किए गए सबूत उचित संदेह के दायरे से परे नहीं थे.
मादक पदार्थों की खरीद-फरोख्त
एनसीबी की मुंबई टीम ने आर्यन के एक परिचित अचित कुमार के साथ, जिनसे उन्हें 80,000 रुपए लेने थे, उनकी व्हॉट्सऐप चैप को बहुत ज्यादा तवज्जो दी. इस बातचीत में आर्यन ने कर्ज का कुछ हिस्सा वस्तुओं में लौटाने के लिए कहा, जिसका अर्थ चरस मान लिया गया. मगर अचित ने तब तक केवल नकदी में कर्ज चुकाए थे और इसका कोई सबूत नहीं था कि उसने आर्यन को नशीले पदार्थ सप्लाइ किए.
भारत में नशीले पदार्थों का कथित जिक्र करने वाली दूसरी व्हॉट्सऐेप चैट की तब तक कोई कानूनी अहमियत नहीं थी जब तक तस्दीक करने वाले सबूत न हों, जो एनसीबी हासिल नहीं कर पाई.
एसआइटी ने संगठित ड्रग गैंग और अंतरराष्ट्रीय कार्टेल के साथ आर्यन के जुड़े होने की संभावना को भी खारिज कर दिया.

