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खास रपटः टाटा कहने का समय?

साइरस मिस्त्री 2016 में टाटा ग्रुप के चेयरमैन के पद से हटाए जाने को लेकर कानूनी लड़ाई भी हारे. अब सबकी नजरें 153 साल पुरानी दिग्गज कंपनी से मिस्त्री परिवार की सम्मानजनक विदाई पर.

साइरस मिस्त्री
साइरस मिस्त्री
अपडेटेड 22 अप्रैल , 2021

टाटा संस के पूर्व चेयरमैन और शापूरजी पलोनजी (एसपी) ग्रुप के चेयरमैन शापूरजी पलोनजी ग्रुप के वारिस 52 वर्षीय साइरस पलोनजी मिस्त्री के लिए कुछ भी सही होता नहीं जान पड़ता. इस साल 26 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अक्तूबर 2016 में टाटा ग्रुप के चेयरमैन के पद से उन्हें हटाए जाने को सही ठहराया. भारत की निजी क्षेत्र की सबसे विशालकाय कंपनियों में से एक के शिखर पर रतन टाटा की जगह लेने के बाद वे महज तीन साल ही रह पाए थे.

इस फैसले के बाद टाटा ग्रुप से मिस्त्री परिवार की विदाई का रास्ता साफ होने के साथ 84 साल का रिश्ता खत्म हो सकता है. यह रिश्ता 1936 में शापूरजी पलोनजी के टाटा संस में फाइनेंसर एफ.ई. दिनशॉ के वारिसों से 12.5 फीसद हिस्सेदारी खरीदने के साथ शुरू हुआ था. यहां अहमियत केवल रुपए-पैसे की नहीं; दोनों घराने कभी इतने करीब थे कि साइरस के पिता पलोनजी मिस्त्री को टाटा साम्राज्य पर अपने जबरदस्त असर की वजह से टाटा समूह के मुख्यालय बॉम्बे हाउस का फैंटम कहा जाता था.

शीर्ष अदालत के फैसले से साइरस और टाटा संस के बीच तीन साल से चल रही लड़ाई का नया अध्याय शुरू हुआ है. साइरस का परिवार टाटा संस में 18.4 फीसद हिस्सेदारी के साथ टाटा ट्रस्ट्स के बाद दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है. 24 अक्तूबर 2016 को टाटा संस के बोर्ड से हटाए जाने के बाद साइरस को दूसरी कंपनियों के बोर्ड से भी हटा दिया गया. इस प्रक्रिया में वाडिया ग्रुप के चेयरमैन नुस्ली वाडिया सरीखे उनके समर्थकों को भी टाटा ग्रुप की कंपनियों से विदा होना पड़ा. अब जब कोर्ट का अंतिम फैसला टाटा के हक में हो चुका है, फोकस आगे की राह पर है.

एसपी समूह
एसपी समूह

टाटा ग्रुप के खिलाफ साइरस मिस्त्री की लड़ाई भारतीय कारोबार के इतिहास की सबसे तीखी लड़ाइयों में से एक के तौर पर जानी जाएगी. उन्होंने अपने हटाए जाने को कंपनी लॉ बोर्ड में चुनौती दी थी. जब वहां से राहत नहीं मिली तो उन्होंने राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में दस्तक दी, जिसने दिसंबर 2019 में टाटा ग्रुप के चेयरमैन के तौर पर उनकी बहाली का फरमान सुनाया. मगर टाटा ग्रुप मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले गया, जिसने साल भर की सुनवाई के बाद टाटा के हक में फैसला दिया.

यह तो पूरी तरह साफ है कि टाटा और मिस्त्री परिवारों के बीच रिश्ता रसातल में पहुंच गया है, लिहाजा दोनों का जुदा होना महज वक्त की ही बात है. संभावना यही है कि मिस्त्री टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी टाटा परिवार को बेच देंगे, जिन्हें खरीद से पहले इनकार का अधिकार हासिल है. यह कदम उठाना जरूरी हो सकता है क्योंकि महामारी की तीखी मार इंजीनियरिंग, निर्माण और रियल एस्टेट के एसपी ग्रुप के मूल कारोबार पर पड़ी है और ग्रुप कर्जों के भारी बोझ से जूझ रहा है.

उसने एकबारगी कर्जों को नए सिरे से पुनर्गठित करने के लिए कर्जदाताओं का दरवाजा खटखटाया है. रेटिंग एजेंसी आइसीआरए के मुताबिक, 150 साल पुराने एसपी ग्रुप की नियंत्रक कंपनी शापूरजी पलोनजी ऐंड कंपनी (एसपीसी) का कुल कर्ज अलग-थलग करीब 5,320 करोड़ रुपए और सब मिलाकर 10,000 करोड़ रुपए है. एसपी ग्रुप का समेकित कर्ज वित्त वर्ष 2017 में 19,981 करोड़ रुपए से बढ़कर 2019 में 31,035 करोड़ रुपए हो गया (दोनों समूहों एसपी और एसपीसी ग्रुप के चेयरमैन साइरस के भाई शापूरजी पलोनजी हैं).

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले भी मिस्त्री परिवार ने शिकायत की थी कि उन्हें पूंजी उगाहने के लिए अपने शेयर वित्तीय फर्मों को गिरवी नहीं रखने दिया जा रहा है. एसपी ग्रुप ने टाटा संस में अपनी 18.4 फीसद में से आधी हिस्सेदारी 5.074 करोड़ रुपए के लिए एक्सिस बैंक और आइडीबीआइ बैंक को गिरवी रख दी है.

किस्मत का खेल
किस्मत का खेल

मगर जब एसपी ग्रुप 3,750 करोड़ रुपए जुटाने के लिए टोरंटो स्थित ब्रुकफील्ड एसेट मैनेजमेंट के साथ बातचीत करता बताया गया, तो टाटा संस ने उसे और ज्यादा हिस्सेदारी गिरवी रखने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी गिरवी रखना मिस्त्री परिवार के लिए कभी पहला विकल्प नहीं रहा.

बीते दो सालों के दौरान एसपीसी ने फोर्ब्स ऐंड कंपनी, स्टर्लिंग ऐंड विल्सन, एक्रकॉन्स और स्टर्लिंग ऐंड विल्सन सोलर सरीखी ऑपरेटिंग फर्म के अपने शेयर गिरवी रखे हैं. रिपोर्टों के मुताबिक कर्ज के संकट का पहला संकेत उस वक्त मिला जब पिछले साल जून में प्रोमोटर ग्रुप कंपनी स्टर्लिंग ऐंड विल्सन सोलर की बकाया रकम चुकाने से चूक गए.

हालांकि प्रोमोटर्स ने वित्त वर्ष 2020 में एसपीसी में 3,875 करोड़ रुपए का निवेश किया जिसमें स्टर्लिंग विल्सन सोलर लि. के पब्लिक ऑफर से मिले 1,900 करोड़ रु. भी शामिल हैं. यह धन ग्रुप की कई कंपनियों की वित्तीय जरूरतें पूरी करने के लिए लगाया गया.

आइसीआरए का एक नोट कहता है, ‘‘एसपी ग्रुप ने टीएसपीएल (टाटा संस प्राइवेट लि.) में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की है और टाटा समूह ने भी इस हिस्सेदारी को खरीदने में अपनी रजामंदी जाहिर की है जो कि लंबी अवधि के लिहाज से एसपी ग्रुप के लिए सकारात्मक है पर अभी तक इस सौदे के लिए मूल्यांकन और समयावधि तय नहीं की गई है.

तो टाटा संस में एसपी ग्रुप की हिस्सेदारी का सही-सही मूल्य निर्धारण कितना होगा? सितंबर 2020 में जब उसने टाटा संस से अलग होने का फैसला किया था, एसपी गु्रप ने 1.78 लाख करोड़ रुपए के मूल्य निर्धारण की बात कही थी. अलबत्ता टाटा ने उनकी हिस्सेदारी इससे आधी ही आंकी और कहा, चूंकि चार्टर्ड अकाउंटेंट वाइ.एच. मालेगाम ने 2016 में टाटा संस का मूल्य निर्धारण 3.8-4.3 लाख करोड़ रुपए के बीच किया था, लिहाजा एसपी ग्रुप की 18.6 फीसद हिस्सेदारी का मूल्य करीब 70,000-80,000 करोड़ रुपए है.

टाटा परिवार एसपी ग्रुप को टाटा संस की हिस्सेदारी बेचने से रोकने में भले कामयाब रहा हो, मगर मिस्त्री परिवार से शेयरों की वापस खरीद में कई पेचीदगियां हैं. दोनों पक्षों को मूल्य निर्धारण पर राजी होना होगा और यह भी साफ नहीं है कि टाटा इस खरीद के लिए पैसा कहां से लाएंगे. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को छोड़कर टाटा के कारोबार भी भारी कर्ज के बोझ से दबे हैं. नियंत्रक कंपनी होने के नाते टाटा संस की आमदनी टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा केमिकल्स सहित अपनी मुख्य आनुषंगिक कंपनियों से मिले लाभांश से होती है.

वित्त वर्ष 2020 में इसने तमाम ग्रुप कंपनियों से अंशपूंजी लाभांश के तौर पर कुल 24,000 करोड़ रुपए की कमाई बताई. इसका करीब 90 फीसद अकेले टाटा कंसल्टेंसी से आया. लेकिन यह मिस्त्री परिवार की हिस्सेदारी खरीदने के लिए काफी नहीं होगा. टाटा को समूह कंपनियों में अपने कुछ शेयर बेचने पड़ सकते हैं. मसलन, टीसीएस में टाटा संस की हिस्सेदारी 72 फीसद है, जिसमें से एक हिस्सा वह बेच सकती है.

हालांकि बाजार के एक सूत्र का कहना है, ‘‘इसकी कोई संभावना नहीं है कि टाटा इस मोड़ पर समूह कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम करना चाहेंगे. टाटा संस मिस्त्री की हिस्सेदारी खरीदने के लिए लंबे वक्त के कर्ज से पूंजी जुटा सकते हैं.’’

मिस्त्री के मामले में विशेषज्ञ कहते हैं कि एसपी ग्रुप को अपने शेयर टाटा को ही उचित मूल्य पर बेचकर सौहार्दपूर्ण तरीके से बाहर होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के वकील एच.पी. रनीना कहते हैं, ‘‘मिस्त्री पर फैसले के अलावा सुप्रीम कोर्ट ने टाटा संस को प्राइवेट कंपनी बनाने का फैसला भी बहाल रखा था. एसपी ग्रुप को टाटा संस जैसी कंपनी में निवेश से प्रबंधन में हिस्सेदारी या वोटिंग का अधिकार नहीं मिल जाएगा.

वे सिर्फ सालाना डिविडेंड ही पा सकेंगे.’’ रैना कहते हैं कि मूल्य निर्धारण के लिए कोर्ट जाने का बहुत मतलब नहीं है. जो मूल्य बताया जा रहा है, उसे स्वीकार करें. एसपी ग्रुप अपने शेयर न बेच सकता है और न ही गिरवी रख सकता है. लिहाजा यह उसके लिए सिरदर्द ही है. 70,000 से 80,000 करोड़ रु. जिसकी पेशकश टाटा कर सकते हैं, वाजिब दिखती है. मिस्त्री-टाटा विवाद का आर्थिक समाधान जो भी हो दोनों के रास्ते कानूनन अलग हो चुके हैं. 

किस्मत का खेल
दिसंबर 2013 
साइरस मिस्त्री ने रतन टाटा से टाटा ग्रुप के चेयरमैन का पदभार संभाला

अक्तूबर 2016
टाटा संस ने मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटाया और रतन टाटा को अंतरिम चेयरमैन बनाया

दिसंबर 2016 
छोटे निवेशकों को दबाने और कुप्रबंधन के आरोप लगाते हुए मिस्त्री नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) गए

जनवरी 2017 
टाटा संस ने एन. चंद्रशेखरन को अंतरिम चेयरमैन बनाया

फरवरी 2017 
मिस्त्री को टाटा संस बोर्ड में डायरेक्टर पद से हटाया गया

सितंबर 2017
टाटा संस के बोर्ड ने पब्लिक कंपनी से प्राइवेट कंपनी बनने की योजना पर मुहर लगाई 

जुलाई  2018 
चेयरमैन पद से हटाने को चुनौती देने वाली मिस्त्री की याचिका एनसीएलटी ने खारिज की 

दिसंबर 2019 
नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने मिस्त्री की चेयरमैन पद पर बहाली का आदेश देते हुए टाटा संस के प्राइवेट कंपनी वाले प्लान को अवैध बताया

मार्च 2021
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलएटी का आदेश पलटा, मिस्त्री को हटाने का फैसला सही बताया.

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