ममता बनर्जी के पूर्व विश्वसनीय सहयोगी मुकुल राय ने उन पर निरंकुश होने का आरोप लगाकर भाजपा का रुख कर लिया है. उनके आरोपों का खंडन करते हुए तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि राय ने पार्टी के साथ धोखा किया है. रोमिता दत्ता ने दोनों नेताओं से बात की. पेश हैं संक्षिप्त अंशः
क्या हुआ? ममता के साथ आपके संबंध क्यों खराब हुए?
इसके कई कारण हैं—वंशवादी राजनीति, शारदा घोटाले को उजागर करने के लिए सीबीआइ के साथ सहयोग करने का मेरा फैसला. लेकिन सबसे आखिरी कारण था, पार्टी का कांग्रेस और माकपा के साथ जाने का फैसला. 1997 में तृणमूल कांग्रेस का गठन इसलिए किया गया था, क्योंकि कांग्रेस वाम दलों के साथ संघर्ष के लिए तैयार नहीं थी. अगर कांग्रेस से अलग होने का यही कारण था, तो फिर ऐसा क्या हुआ कि हम कांग्रेस और अपने कट्टर दुश्मन माकपा के साथ गठजोड़ करने के लिए तैयार हो गए. यह पार्टी के लिए अच्छा नहीं था.
क्या आपने ममता से इस विषय पर चर्चा की थी?
तृणमूल कांग्रेस में बातचीत के लिए कोई गुंजाइश नहीं है. वहां एक ही शख्स की चलती है—उम्मीदवारों के चयन से संसद में हमारे रुख तक. ऐसा एक भी मौका नहीं आया, जब हम पार्टी अध्यक्ष (ममता) से अलग कोई फैसला ले सकते थे.
आप तृणमूल को अपने आप में सही नहीं होने के लिए छोड़ रहे हैं, लेकिन भाजपा में शामिल हो रहे हैं?
तृणमूल कांग्रेस के गठन के कुछ ही महीने बाद ममता ने खुद कहा था कि भाजपा ''अछूत" नहीं है. तृणमूल कांग्रेस और भाजपा ने 1998, 1999 और 2002 से 2006 के बीच सीटों को साझा किया था. 1999 का लोकसभा चुनाव हमने राजग सहयोगी के रूप में लड़ा था. ममता अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रेल मंत्री बनी थीं. यहां तक कि बंगारू लक्ष्मण वाले मामले (2001) के बाद भाजपा से नाता तोडऩे के बाद कुछ वर्षों के लिए हम फिर राजग गठबंधन में लौटे. मुझे खुद को उचित ठहराने की जरूरत नहीं है. बिना भाजपा के सहयोग के तृणमूल कांग्रेस अपनी शानदार शुरुआत नहीं कर पाती.
वे आपको अवसरवादी बता रहे हैं, कह रहे हैं कि आपने सीबीआइ से बचने के लिए भाजपा से सौदा कर लिया?
ईडी ने यूपीए सरकार के कार्यकाल में 2013 में शारदा घोटाले की जांच शुरू की और कांग्रेस ने ही सीबीआइ जांच की मांग की थी. मुझे लगा कि जांच में सच का पता लगना चाहिए, क्योंकि इसमें हजारों गरीबों के साथ धोखा हुआ. मैं चाहे किसी भी पार्टी में रहूं, मैं जांच में सहयोग करूंगा. तृणमूल (नेताओं) ने सोचा कि मुझे इसमें फंसाकर वे शारदा घोटाले से अपना हाथ धो सकते हैं. लेकिन मैं इससे बेदाग निकल गया, लेकिन वे नहीं निकल पाए.
शारदा और नारद (घोटाले) में अहम अभियुक्त होने पर भी भाजपा आपको शामिल करने को कैसे तैयार हो गई?
मैंने अपनी बेगुनाही साबित कर दी. सीबीआइ ने मुझे सिर्फ एक बार 30 जनवरी, 2015 को बुलाया था. एजेंसी के पास मेरा पीछा करने के लिए कोई कारण नहीं था. मैं भाजपा के वोटों में दो फीसदी का उछाल देख सकता हूं, जिसके कारण तृणमूल कांग्रेस 2019 में कई सीटें हार जाएगी. भाजपा लोकसभा में 12 सीटें जीत सकती है. जमीनी स्तर पर चीजें बदल रही हैं.
मतदाताओं को आप कैसे समझाएंगे, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय को, जो हमेशा आपको एक धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में जानते रहे हैं?
अल्पसंख्यकों का एक बड़ा तबका नाराज है. सरकार का दावा है कि उसने मुस्लिमों के लिए काफी कुछ किया है, पर दिखता कुछ भी नहीं. मुसलमानों के बीच तीव्र ध्रुवीकरण है, जो लाभान्वित हुए हैं और जो लाभ पाने से वंचित रह गए हैं उनके बीच. पहली बार बंगाल के चुनाव में ध्रुवीकरण होगा और भाजपा इसे सुनिश्चित करके अपना वोट शेयर बढ़ाएगी. 294 विधानसभा क्षेत्रों में से 136 में अल्पसंख्यक प्रभावी नहीं हैं. जहां वे प्रभावी हैं, वहां वे असंतोष की वजह से बंटे हुए हैं. मैं भविष्यवाणी करता हूं कि तृणमूल कांग्रेस के अल्पसंख्यक वोटों में चार फीसदी की गिरावट आएगी.
लेकिन ब्रांड ममता अब भी विशाल बहुमत के बीच सम्मानित हैं?
इंदिरा गांधी भी 1977 में ब्रांड थीं. ऐसी ब्रांडिंग का राजनीति में कोई महत्व नहीं होता. वर्ष 2016 में 100 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस की जीत का अंतर मात्र 5,000-15,000 वोट था और भाजपा को 15,000-20,000 वोट मिले थे. अगर वे वोट कांग्रेस और वाम गठबंधन के पास चले गए, तो कहानी कुछ अलग होगी.
आप मानते हैं कि तृणमूल कांग्रेस में वंशवादी राजनीति है, क्या आप ममता के भतीजे के बारे में संकेत कर रहे हैं?
मैं एक बार फिर कहता हूं कि जिन लोगों ने तृणमूल कांग्रेस के महान आंदोलनों (ननूर, सछपुर, सिंगूर, नंदीग्राम, नेताई) में हिस्सा नहीं लिया, उनके पास नेतृत्व के लिए कोई अनुभव, योग्यता या विश्वसनीयता नहीं है. अफसोस कि खून पानी से अधिक मोटा होता है. लेकिन वंशवाद किसी को नेता नहीं बनाता है. 18 साल बाद भी राहुल गांधी को तैयार किया जा रहा है.
क्या ममता के साथ तालमेल की संभावना बची है?
नहीं. हम ऐसे बिंदु पर पहुंच गए हैं, जहां से लौटा नहीं जा सकता. उन्होंने मुझ पर नजर रखने के लिए अपने प्रशासन को लगा दिया है. मेरा फोन टेप किया जा रहा है.

