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उत्तर प्रदेशः ताज हुआ बेताज

उत्तर प्रदेश पर्यटनः ताज हुआ बेताज

ताज हुआ बेताज
ताज हुआ बेताज
अपडेटेड 17 अक्टूबर , 2017

उत्तर प्रदेश सरकार ने 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर 32 पृष्ठों की एक पुस्तिका का लोकार्पण करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई. उस पुस्तिका में राज्य के कई आकर्षणों को शामिल किया गया पर सबसे हैरानी की बात यह है कि उस में दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल का जिक्र तक नहीं था. स्पष्ट रूप से यह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नजरिए को दर्शाता है. 

उत्तर प्रदेश में भाजपा की भारी जीत और अपनी अप्रत्याशित नियुक्ति के बाद बीते जून में अपनी पहली रैली में आदित्यनाथ ने शिकायत की थी कि ''अतीत में विदेशी गणमान' व्यक्तियों को ताजमहल और अन्य मीनारों की प्रतिकृति उपहार में दी जाती थी, जो भारतीय संस्कृति को प्रतिबिंबित नहीं करते.'' यह उपेक्षा सरकार के पहले बजट में तब और दिखी, जब आगरा आने वाले पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कोई राशि आवंटित नहीं की गई. जुलाई में आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में फिर कहा कि लोगों को 'भारतीय संस्कृति और पहचान को ताजमहल के साथ नहीं जोडऩा चाहिए.'

कोई आश्चर्य नहीं कि उत्तर प्रदेश की नई पर्यटन पुस्तिका में वाराणसी की प्रसिद्ध गंगा आरती को आवरण पृष्ठ पर जगह दी गई है और गोरखनाथ मठ पर पूरे एक पृष्ठ की सामग्री दी गई है. केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष जनवरी से जुलाई के बीच 4,58,000 लोग इस स्मारक को देखने के लिए गए, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के आंकड़े से तीस फीसदी ज्यादा है. 

गाइड रामप्रकाश ने कहा कि ''सरकार समझ रही है कि ताज का ताल्लुक अल्पसंख्यकों से है. पर इसके आसपास की अस्सी फीसदी से ज्यादा दुकानों के मालिक हिंदू हैं.'' पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव यादव के मुताबिक, ''मुख्यमंत्री योगी को प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखकर कहना चाहिए कि वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के ताजमहल आने पर प्रतिबंध लगा दें.'' विवादित पुस्तिका को जारी करने वाली उत्तर प्रदेश की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी को रक्षात्मक कार्रवाई का काम सौंपा गया है. वे कहती हैं कि ताजमहल हमारी सांस्कृतिक धरोहर है. आदित्यनाथ के मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने बताया कि सरकार ने ''ताज से संबंधित परियोजनाओं के लिए 156 करोड़ रु. दिए हैं.''—आशीष मिश्र

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