हिंदुस्तान यूनिलीवरः स्थापनाः 1933
घूम गई घुंडी
इस कंपनी की कहानी 1888 से शुरू होती है जब ''मेड इन इंग्लैंड बाइ लीवर ब्रदर्स" लिखे हुए क्रेटों की एक खेप कलकत्ता पहुंची थी. इन डिब्बों में सनलाइट साबुन थे जो इंग्लैंड के बाजार में उतरने के चार साल बाद भारत आए थे. जल्द ही दूसरे साबुन भी आ गए, मसलन लाइफ बॉय, विनोलिया, वेलवेट स्किन सोप, लीवर्स हेल्थ सोप और ललबाइ बाथिंग सोप. ये सभी आयातित थे और बंबई, कलकत्ता और मद्रास के प्रतिनिधियों के जरिए बेचे जाते थे. इनकी बिक्री तेज हुई तो भारत में अनुषंगी कंपनी लीवर ब्रदर्स इंडिया की स्थापना हो गई. 1956 में लीवर ब्रदर्स इंडिया, हिंदुस्तान वनस्पति मैन्युफैक्चरिंग कंपनी और यूनाइटेड ट्रेडर्स का विलय हुआ और हिंदुस्तान लीवर नाम की कंपनी वजूद में आई.
दिसंबर 1967 में हिंदुस्तान लीवर रिसर्च सेंटर का उद्घाटन बंबई में हुआ और 2007 में कंपनी का नाम बदलकर हिंदुस्तान यूनिलीवर कर दिया गया. 2016-17 में कंपनी की बिक्री 33,895 करोड़ रुपए रही.
हिंदुस्तान यूनिलीवर के एमडी और सीईओ संजीव मेहता कहते हैं, ''आज हिंदुस्तान यूनिलीवर देश की सर्वाधिक बहुमूल्य कंपनियों में से है जिसका बाजार पूंजीकरण 35 अरब डॉलर से ज्यादा है. हमारा सतत वृद्धि का मॉडल मूल्यों की गुणात्मकता पर टिका है—अच्छा कारोबार करते हुए अच्छी कमाई करना. पिछली सदी में हमने देश के विकास में हिस्सा लिया है और आगे भी इसी उत्साह और शिद्दत के साथ भविष्य निर्माण में जुटे रहेंगे."

